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Gold Hallmarking updates: लौंग, बाली व नथनी जैसे कम वजन वाले जेवरों की मजबूती घट जाएगी, एंटीक पर भी उलझन

ज्वैलर्स बोले- सरकार को एंटीक ज्वैलरी पर नियम स्पष्ट करना चाहिए

ज्वैलर्स बोले- सरकार को एंटीक ज्वैलरी पर नियम स्पष्ट करना चाहिए

Gold Hallmarking: नथनी, बाली जैसी ज्वैलरी में ज्यादा शुद्धता वाले तार को कान और नाक में पहनने में दिक्कत होती है. इसलिए ज्वैलर्स हॉलमार्किंग की सीमा 5 ग्राम से ज्यादा वजन वाले जेवर पर लागू करने की मांग कर रहे हैं.

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नई दिल्ली. गोल्ड हॉलमार्किंग (Gold Hallmarking) पर केंद्र सरकार ने नए नियम 15 जून से लागू कर दिए हैं. लेकिन पुरानी यानी एंटीक ज्वैलरी पर यह नियम खामोश हैं. यही नहीं, ज्वैलर्स दो ग्राम की बजाय 5 ग्राम तक की ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग से छूट चाहते हैं.
जेम एंड ज्वैलरी उद्योग की राष्ट्रीय शीर्ष संस्था ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) इस बारें में सरकार से बातचीत की है. जीजेसी के अध्यक्ष आशीष पेठे ने न्यूज18 को बताया कि मौजूदा कानून में स्पष्टता की कमी है. सरकार ने उनकी इस बात काे मानते हुए एक कमेटी गठित की है. पेठे बताते हैं कि एंटीक यानी बहुत पुरानी ज्वैलरी का अलग से कारोबार होता है. नए नियम के मुताबिक इसे गलाकर नई ज्वैलरी बनानी होगी. ऐसे में इसकी डिजाइन और एंटीक वैल्यू खत्म हो जाएगी. वे कहते हैं कि मंदिराें समेत कई घरों में इस तरह की ज्वैलरी है.
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एंटीक पीस सभ्यता का आइना, इन्हें पिघलाने से इतिहास का विनाश
150 साल पुराने हेरिटेज ज्वैलरी हाउस सी कृष्णैया चेट्टी के प्रबंध निदेशक सी विनोद हयाग्रीव ने बताया कि पुराने आभूषण, जिनमें से कुछ कला के टुकड़े हैं और मंदिरों के पास हैं या परिवारों द्वारा विरासत में मिले हैं, उन्हें फिर से बेचा या नीलाम किया जाता है. अब यदि नए नियम का पालन किया गया तो यह भारतीय इतिहास के हजारों वर्षों के विनाश के समान होगा. हालांकि वे कहते हैं कि नए ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग के साथ उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियम बनाना एक अच्छा कदम है, लेकिन सभी पुराने गहनों को पिघलाने और नष्ट करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
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नथनी, बाली में 60 से 65 प्रतिशत शुद्धता ही संभव
मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट कुमार जैन ने न्यूज 18 को बताया कि मौजूदा नियम में 2 ग्राम से कम वजन की ज्वैलरी को गोल्ड हॉलमार्किंग से छूट है. इस ज्वैलरी में लोंग, नथनी जैसे जेवर आते हैं. लेकिन इनका भी वजह 5 ग्राम तक होता है. उनके मुताबिक नथनी, बाली और हीरा समेत दूसरी बेशकीमती रत्न जड़ित ज्वैलरी 60 से 65% शुद्धता वाले सोने के साथ ही बनाई जा सकती है. 18 कैरेट में यह टूटने लगती है. ज्यादा शुद्धता वाला तार कान और नाक में पहनने में दिक्कत होती है.

जवैलर्स यह कर रहे मांग
ज्वैलर्स के मुताबिक 16, 20 और 23 कैरेट में भी बड़ी मात्रा में जेवर बनते हैं, इसलिए इन कैरेट्स को हाॅलमार्किंग के दायरे में लाया जाए. एंटीक ज्वैलरी को हॉलमार्किंग के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए. अपने पुराने स्टॉक की स्थिति पर आधिकारिक स्पष्टता मिले. सरकार ने हॉलमार्क के लिए लगने वाली एचयूआईडी सील समेत दूसरी शर्तों के लिए औपचारिक नोटिफिकेशन अब तक जारी नहीं किया है.
40 लाख रुपए तक के सालाना टर्नओवर वाले ज्वैलर्स को अनिवार्य हॉलमार्किंग से छूट
नया नियम 15 जून से लागू है. लेकिन सरकार ने शुरुआत में गोल्ड हॉलमार्किंग देश के 256 जिलों में लागू की है. यहां जांच करने वाले हॉलमार्किंग सेंटर हैं. यही नहीं, 40 लाख रुपए तक के सालाना टर्नओवर वाले ज्वैलर्स को अनिवार्य हॉलमार्किंग से छूट दी गई है. साथ ही, अगस्त तक व्यापारियों पर सरकार कार्रवाई नहीं करेगी.
इन पर सोना है तो हॉल मार्किंग जरूरी नहीं
घड़ियां, फाउंटेन पेन, ज्वैलरी जैसे, कुंदन, पोल्की, जदायू को भी हॉल मार्किंग से मुक्त रखा गया है.

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