अखिर क्यों कोविड-19 नहीं बल्कि मंदी की मार झेलने को मजबूर हैं अफ्रीकी देश?

अखिर क्यों कोविड-19 नहीं बल्कि मंदी की मार झेलने को मजबूर हैं अफ्रीकी देश?
अफ्रीका के सहारा क्षेत्र के देशों पर आर्थिक मंदी का साया.

विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भले ही अफ्रीकी देशों में कोरोना वायरस महमारी का प्रकोप कम है, लेकिन इन क्षेत्रों में आर्थिक मंदी का खतरा सबसे अधिक बढ़ गया है. इस क्षेत्र में करीब 2 करोड़ नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है.

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नई दिल्ली. अफ्रीका के सहारा क्षेत्र के देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत नहीं फैला है, लेकिन इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर महामारी का बुरा असर साफ दिखने लगा है. विश्वबैंक के अनुमान के अनुसार, पिछले 25 साल में यह पहली बार हो रहा है कि यह क्षेत्र भी मंदी की चपेट में आने वाला है.

पिछले साल सहारा क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत रही थी. हालांकि इस साल इनकी वृद्धि दर शून्य से 2.1 प्रतिशत से लेकर 5.1 प्रतिशत तक नीचे रहने का अनुमान है. यह इन देशों के तीन प्रमुख व्यापार भागीदार चीन, यूरोपीय संघ और अमेरिका के कोरोना वायरस से बुरी तरह से प्रभावित होने के कारण हो रहा है.

क्या है अफ्रीकी डेवलपमेंट बैंक का अनुमान?
पर्यटन और कच्ची सामग्रियों के प्रमुख बाजारों में गिरावट के साथ ही लोगों को घरों में रोके रखने का बाध्यकारी कदम उठाना आर्थिक लिहाज से तबाही के लिये पर्याप्त है. हालांकि अफ्रीकी विकास बैंक के अनुमान अपेक्षाकृत कम निराशावादी हैं, लेकिन इसका भी मानना है कि जीडीपी में गिरावट की दर 0.7 प्रतिशत से 2.8 प्रतिशत तक रह सकती है.
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2 करोड़ नौकरियों पर खतरा
अफ्रीकी संघ का अनुमान है कि इस महामारी के कारण औपचारिक व अनौपचारिक क्षेत्र में करीब दो करोड़ नौकरियों पर खतरा मंड़रा रहा है. संयुक्त राष्ट्र का आकलन और भयावह है. संयुक्तराष्ट्र के अनुसार पांच करोड़ लोगों तक के बेरोजगार होने जाने की आशंका है.

इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं में विदेश कमाने गये उन कामगारों का भी अहम योगदान है जो वापस अपने देश में पैसे भेजते हैं. बेरोजगारी की उच्च दर तथा आर्थिक नरमी से इसके ऊपर भी असर पड़ रहा है.

विदेश से आने वाले पैसे में भारी कमी
ब्लूमफील्ड इंवेस्टमेंट एनालिस्ट्स की मानें तो इस तरह विदेश से भेजे गये पैसों का 2018 में माली में अर्थव्यवस्था में 5.5 प्रतिशत तथा सेनेगल में 10 प्रतिशत रहा था. अब इस तरह के हस्तांतरण में भारी गिरावट के अनुमान हैं, क्योंकि दुनिया भर में महामारी के संक्रमण को रोकने के लिये लॉकडाउन लागू है.

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बड़े अफ्रीकी देशों पर मंदी का खतरा
विश्वबैंक के अनुसार, इस क्षेत्र की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं दक्षिण अफ्रीका और नाईजीरिया के सामने व्यापक मंदी का खतरा है. विकसित देशों से तेल तथा कीमती धातुओं जैसी कच्ची सामग्रियों की मांग गिरने के कारण इन दोनों के समक्ष दिक्कतें आने लगी हैं. अंगोला के साथ भी यही हो रहा है. कच्चा तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 20 से 30 डॉलर प्रति बैरल के बीच चल रही हैं. नाईजीरिया में यह कच्चा तेल के उत्पादन की लागत है.

सोना का भी नहीं हुआ फायदा
सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना भी इस महामारी से नहीं बच सका है. ब्लूमफील्ड इंवेस्टमेंट एनालिस्ट्स के अनुसार, विमानों के परिचालन में कमी आने तथा सोना के कुछ परिशोधन संयंत्रों के बंद होने से इसका निर्यात भी गिरा है.

पर्यटन से लेकर कॉफी मार्केट तक पर असर
माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बोउबाकर ने शुक्रवार को बताया कि कपास उद्योग किस तरह से तबाह हो रहा है. इस उद्योग में करीब एक चौथाई लोगों को रोजगार मिलता है. पर्यटन के प्रभावित होने से दक्षिण अफ्रीका पर असर हुआ है. इसी तरह कॉफी के बाजार तबाह होने से इथियोपिया को दिक्कतें हो रही हैं.

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