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विश्व मुद्रा भंडार में आई रिकॉर्ड 1 ट्रिलियन डॉलर की कमी, भारत की क्या है स्थिति?

 भारत का फॉरेन करेंसी भंडार इस साल 96 अरब डॉलर घटकर 538 अरब डॉलर हो गया है.

भारत का फॉरेन करेंसी भंडार इस साल 96 अरब डॉलर घटकर 538 अरब डॉलर हो गया है.

विश्व मुद्रा भंडार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बाकी देशों की करेंसी का कमजोर होना है. हाल ही मे ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

विश्व मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 1 ट्रिलियन डॉलर घट गया है.
अब 7.8% घटकर 12 ट्रिलियन डॉलर रह गया है.
यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने बड़ी समस्या है.

नई दिल्ली. दुनिया भर में ग्लोबल फॉरेन करेंसी रिजर्व में काफी तेजी से गिरावट आ रही है. इस वजह से उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के सामने बड़ी समस्या खड़ी होती जा रही है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल विश्व मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 1 ट्रिलियन डॉलर घट गया है. विश्व मुद्रा भंडार लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर या 7.8% घटकर 12 ट्रिलियन डॉलर रह गया है. यह 2003 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है.

विश्व मुद्रा भंडार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बाकी देशों की करेंसी का कमजोर होना है. हाल ही में डॉलर अन्य रिजर्व करेंसी जैसे यूरो और येन के मुकाबले दो दशक के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.

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कई देशों के सामने खड़ी हुई समस्या
इस समस्या से निपटने के लिए भारत और चेक रिपब्लिक जैसे कई देशों की सेंट्रल बैंक अपनी करेंसी को सपोर्ट करने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं. बहुत से केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं में होने वाली गिरावट को रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर रहे हैं. इन देशों करेंसी मार्केट में अपने विदेशी मुद्रा कोष से डॉलर की बिक्री के लिए मजबूर होना पड़ा है. इससे इन देशों खजाना दिनों-दिन खाली होता जा रहा है. मुद्राओं की रक्षा के लिए भंडार का उपयोग करने की प्रथा कोई नई बात नहीं है. जब विदेशी पूंजी की बाढ़ आती है तो केंद्रीय बैंक डॉलर खरीदते हैं और मुद्रा की वृद्धि को धीमा करने के लिए अपने भंडार का निर्माण करते हैं. बुरे समय में वे पूंजी की घटने से रोकने के लिए भंडार को बढ़ाते हैं.

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96 अरब डॉलर कम हुआ फॉरेन करेंसी रिजर्व
उदाहरण के लिए भारत का फॉरेन करेंसी भंडार इस साल 96 अरब डॉलर घटकर 538 अरब डॉलर हो गया है. देश के केंद्रीय बैंक ने कहा कि वैश्विक घटनाक्रमों के कारण रुपये की विनियम दर में गिरावट को रोकने के जारी प्रयासों के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में यह कमी आई है. यह अप्रैल से वित्तीय वर्ष के दौरान रिजर्व में गिरावट का 67 प्रतिशत हिस्सा है. रुपये में इस साल डॉलर के मुकाबले करीब 9 फीसदी की गिरावट आई है और पिछले महीने यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था.

क्या है भारत की स्थिति?
डॉयचे बैंक एजी के मुख्य अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकार एलन रस्किन ने कहा, ” कई केंद्रीय बैंकों के पास अभी भी हस्तक्षेप जारी रखने के लिए पर्याप्त शक्ति है. भारत में विदेशी भंडार अभी भी 2017 के स्तर से 49% अधिक हैं और 9 महीने के आयात का भुगतान करने के लिए पर्याप्त है. लेकिन कई देशों के लिए वे जल्दी से समाप्त हो रहे हैं. इस साल 42% की गिरावट के बाद पाकिस्तान का 14 बिलियन डॉलर का भंडार तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है.

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