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भारत में अपनी प्रतिभा दिखाने के​ लिए हर किसी को नहीं मिलते समान मौके: रिपोर्ट

पीटीआई
Updated: January 20, 2020, 11:55 PM IST
भारत में अपनी प्रतिभा दिखाने के​ लिए हर किसी को नहीं मिलते समान मौके: रिपोर्ट
सोशल मोबिलिटी इंडेक्स

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम सोशल मोबिलिटी इंडेक्स जारी किया है, जिसमें कुल 82 देशों की लिस्ट में भारत का स्थान 72वां है.

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नई दिल्ली. सोशल मोबिलिटी इंडेक्स के मामले में भारत कुल 82 देशों में 72वें स्थान पर है. डेनमार्क इस मामले में सबसे पहले स्थान पर है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने अपनी एक रिपोर्ट में इस इंडेक्स के बारे में जानकारी दी है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 50वें सालाना बैठक से पहले इस रिपोट को जारी किया गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत उन 5 देशों में है, जिसे सोशल मोबिलिटी से सबसे अधिक लाभ मिलता है. इसमें किसी व्यक्ति को किसी भी आर्थिक-सामाजिक बैकग्रांउड से होने के बावजूद भी अपनी क्षमता साबित करने जैसे पैरामीटर्स को ध्यान में रखा गया है.

दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है 5 फीसदी का असर
बढ़ती सोशल मोबिलिटी आय में ​भिन्नता को प्रभावित करती है. इसमें 10 फीसदी कि इजाफा से साल 2030 तक पुरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर 5 फीसदी तक का असर पड़ सकता है. लेकिन, कुछ ही अर्थव्यव्स्था इस हालत में हैं कि सोशल मोबिलिटी को बढ़ावा दे सकें.

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इस इंडेक्स को तैयार करनेक के लिए 5 प्रमुख बातों को ध्यान में रखा गया है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीक, रोजगार, और सुरक्षा और संस्थान की स्थिति शामिल है. इन सभी 5 प्रमुख बातों से पता चलता है कि लोगों को कितनी कमाई होती है, सामाजिक सुरक्षा मिलती है और वो अपनी जीवन में कितना कुछ सीख पाते हैं.

क्या है भारत की स्थिति
भारत के लिहाज से देखें तो 82 देशों की लिस्ट में 76वां स्थान मिलता है. जीवनपर्यंत सीखने के मामले में 41वां और रोजगार की शर्तों के मामले में 53वां रैंक मिला है. भारत को जिन बातों का खास ध्यान रखना है, उसमें सामाजिक सुरक्षा और रोजगार में समान कमाई शामिल हैं. इन दोनों में भारत की रैंकिंग क्रमश: 76वां और 79वां है.यह भी पढ़ें: 1 जून से लागू होगा एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड, देश में कहीं भी खरीद सकेंगे राशन

कैसे मिलेगा अर्थव्यवस्थाओं को फायदा
इस इंडेक्स में टॉप 5 देशों में की बात करें तो सोशल मोबिलिटी के मामले में सबसे अधिक लाभ लेने वाले देशों में चीन, अमेरिका, भारत, जापान और जर्मनी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, 'अगर कोई देश ऐसा माहौल तैयार करने में सफल रहता है, जहां हर किसी को अपने सामाजिक-आर्थिक बैंकग्राउंट से इतर क्षमता साबित करने का मौका मिलता है तो न सिर्फ इससे सामाज को सीधे तौर पर लाभी मिलेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को हर साल अरबों डॉलर का फायदा मिलेगा.'

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First published: January 20, 2020, 10:52 PM IST
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