World Milk Day: इस तरह करें सिंथेटिक और नकली दूध की पहचान, 10 से ज्यादा चीजों के मिलाकर किया जाता है तैयार

इस तरह करें सिंथेटिक और नकली दूध की पहचान

इस तरह करें सिंथेटिक और नकली दूध की पहचान

World Milk Day: एक्सपर्ट के मुताबिक नकली दूध बनाने के लिए रिफाइंड ऑयल और लिक्विड डिटर्जेंट का घोल तैयार किया जाता है. दूध में घी की मात्रा और आरएम वैल्यू बरकरार रखने के लिए केमिकल मिलाया जाता है.

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नई दिल्ली. आज वर्ल्ड मिल्क डे (World Milk Day) है. बचपन से लेकर ढलती उम्र तक में डॉक्टर (Doctor) दूध को शरीर के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद बताते हैं. दूध को कैल्शियम का सबसे बड़ा रिसोर्स बताया गया है लेकिन सिक्कों के चंद लालची लोगों ने इसे भी जहरीला बना दिया है. दूध (Milk) में पानी मिलाने की बात तो छोड़िए, 10 से भी ज्यादा अलग-अलग चीजें मिलाकर सिंथेटिक दूध तैयार किया जा रहा है. फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FASSI) की रिपोर्ट में भी इसका कई बार खुलासा हो चुका है. डॉक्टरों की राय में यह मिलावट कैंसर (Canser) का भी एक बड़ा कारण है.

एक्सपर्ट के मुताबिक नकली दूध बनाने के लिए रिफाइंड ऑयल और लिक्विड डिटर्जेंट का घोल तैयार किया जाता है. दूध में घी की मात्रा और आरएम वैल्यू बरकरार रखने के लिए केमिकल मिलाया जाता है. शुद्ध दूध की रिचर्ड मिशेल वैल्यू (आरएम) करीब 30 से 35 होनी चाहिए. कई बार केमिकल से बना दूध फैक्ट्रियों में खरीद के दौरान फैट और आरएम के मामले में शुद्ध दूध की तरह ही खरा उतरता है.

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नकली दूध पानी में मिल्क पाउडर मिलाकर भी बनाया जाता है. इसमे मक्खन नहीं होता है. चिकनाई के लिए रिफाइंड ऑयल और शैंपू का इस्तेमाल किया जाता है. दूध में झाग बनाने के लिए वाशिंग पाउडर और दूध के सफेद रंग के लिए वाइट पेंट (सफेदा) मिलाया जाता है. दूध में मीठापन लाने के लिए ग्लूकोज डाला जाता है.
दूध की जांच में FASSI को देशभर में क्या मिला

>> 6432 सैंपल में से 368 सैंपल में अफ़लटॉक्सिन एम-1 पाया गया है.

>> अफ़लटॉक्सिन एम-1 दूध में फोडर और फीड के जरिये जाता है.



>> अफ़लटॉक्सिन एम-1 प्रोसेस्ड दूध में सबसे अधिक पाया जाता है.

>> यह तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 551 में से 88 सैंपल में पाया गया.

>> दिल्ली में 262 सैंपल में से 38 सैंपल और केरल में 187 में से 37 सैंपल में पाया गया.

>> मध्यप्रदेश के 335 सैंपल में से 23 सैंपल में सबसे ज्यादा अफ़लटॉक्सिन एम-1 पाया गया.

>> महाराष्ट्र में 678 में से 9, यूपी में 729 सैंपल में से 8 में सबसे ज्यादा अफ़लटॉक्सिन एम-1 मिला.

जांच के दौरान दूध में ये भी मिला

12 मिलावटी सैंपल में से 6 में हाइड्रोजन पेरोक्साइड, 3 में डिटर्जेंट, 2 में यूरिया और 1 सैंपल में न्यूट्रालिज़र पाया गया. 6432 सैंपल में से 156 में maltodextrin और 78 में शुगर पाया गया. सबसे अधिक मामले प्रोसेस्ड मिल्क में पाये गए जो नहीं होना चाहिए.

यूरिया का पता कैसे करें?

>> टेस्ट ट्यूब में थोड़ा दूध और सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाएं.

>> पांच मिनट बाद लाल लिटमस पेपर इसमें डुबोएं.

>> अगर पेपर का रंग नीला हो जाए तो यूरिया मिला है.

वनस्पति की मिलावट कैसे पहचानें?

>> 3 एमएल दूध में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की 10 बूंद मिलाएं.

>> एक चम्मच चीनी मिलाने के पांच मिनट बाद लाल रंग हो जाएगा.

पानी की मिलावट कैसे पहचानें?

>> दूध की बूंद को चिकनी सतह पर गिराएं.

>> अगर बूंद धीरे बहे और सफेद निशान छोड़े तो शुद्ध दूध है.

>> मिलावटी दूध की बूंद बिना निशान छोड़े तेजी से बह जाएगी.

सिंथेटिक दूध कैसे पहचानें?

>> सिंथेटिक दूध स्वाद में कड़वा लगता है.

>> उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसा चिकनापन लगता है.

>> गर्म करने पर पीला पड़ जाता है.

>> अत्याधुनिक उपकरणों का प्रयोग

स्टार्च की पड़ताल कैसे करें?

>> आयोडीन की कुछ बूंदें दूध में मिलाएं.

>> मिलाने पर मिश्रण का रंग नीला हो जाएगा.

फॉर्मेलिन की मिलावट कैसे पकड़ें?

>> 10 एमएल दूध में 5 एमएल सल्फ्यूरिक एसिड मिलाएं.

>> बैंगनी रंग की रिंग का बनना फॉर्मेलिन होने का संकेत.

>> दूध लंबे समय तक ठीक रखने के लिए फॉर्मेलिन मिलाते हैं.

मिलावट खोर लगातार सिंथेटिक दूध को तैयार करने में टाइटेनियम डाई ऑक्साइड, बी वैक्स (मधुमक्खी के छत्ते से निकलने वाला मोम) की मिलावट की जा रही है. टाइटेनियम डाई ऑक्साइड अखाद्य सफेद रंग का पाउडर होता है. इसे पानी में मिलाने पर उसका रंग दूध जैसा दिखने लगता है. फिर दूध में मिठास लाने के लिए वी बैक्स मिलाया जाता है. दूध को तैयार करने के लिए मिलावटखोर लैब भी बना रहे हैं. केमिकल से तैयार दूध को इलेक्ट्रिक मथनी से फेंट दिया जाता है, ताकि समान तरलता हो.

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मिलावट के बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट

वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एके गुप्ता का कहना है कि लगातार सिंथेटिक दूध पीने से कैंसर हो सकता है. दूध में कैल्शियम होता है, लेकिन इसका रिएक्शन उल्टा हो सकता है. इससे हड्डियां मजबूत नहीं होंगी. जबकि केमिकल से आंतों, लीवर को नुकसान पहुंचेगा. खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं में सबसे ज्यादा इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा.

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