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Xiaomi ने 5,500 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने को सही ठहराए जाने पर दिया जवाब, कहा- वैध है लेनदेन

ईडी द्वारा 5500 करोड़ की जब्ती सही ठहराए जाने पर शाओमी ने दिया बयान.

ईडी द्वारा 5500 करोड़ की जब्ती सही ठहराए जाने पर शाओमी ने दिया बयान.

शाओमी ने ईडी द्वारा उसकी 5500 करोड़ की संपत्ति को फ्रीज किए जाने वाले फैसले को सही ठहराए जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया द ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

शाओमी ने कहा है कि उसके द्वारा किए गए लेनदेन वैध हैं.
कंपनी के अनुसार, ईडी ने उसके द्वारा उठाए गए कई सवाओं के जवाब नहीं दिए.
फेमा के तहत नियुक्त अथॉरिटी ने संपत्ति फ्रीज किए जाने को सही ठहराया था,

नई दिल्ली. चीनी स्मार्टफोन निर्माता शाओमी ने उसकी 68.2 करोड़ डॉलर (5551 करोड़ रुपये से अधिक) की राशि को फ्रीज  किए जाने के फैसले को सही ठहराए जाने पर अपनी निराशा जाहिर की है. ईडी ने विदेशी मुद्रा कानूनों (फेमा) के उल्लंघन के आरोप में यह संपत्ति फ्रीज की थी. इसे 30 सितंबर को फेमा के तहत नियुक्त अथॉरिटी ने सही ठहराया था. अब शाओमी ने इस पर एक विस्तृत प्रतिक्रिया दी है.

शाओमी का कहना है कि उसने रॉयल्टी के रूप में क्वॉलकॉम को भुगतान किया था और यह पूरी तरह से वैध है. शाओमी इंडिया ने कहा कि उनके द्वारा पूछे गए कानूनी व तथ्यामक सवालों का कोई जवाब नहीं दिया गया है. कंपनी ने कहा है कि वह अपनी साख व अपने हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी.

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क्या है शाओमी की प्रतिक्रिया
शाओमी ने कहा है कि शाओमी इंडिया उनके समूह की कंपनी है जिसका अमेरिका की क्वालकॉम के साथ एक कानूनी समझौता हुआ था. क्वॉलकॉम से कंपनी ने स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी का लाइसेंसे लिया था जिसके बदले शाओमी को रॉयल्टी चुकानी थी. शाओमी ने कहा कि वह और क्वॉलकॉम दोनों मानते हैं कि यह वैध वाणिज्यिक समझौता है. बकौल स्मार्टफोन निर्माता ये भुगतान उनके फोन के इंडियन वर्जन में इस्तेमाल किए जा रहे स्टैंडर्ड एसेंशियल पेटेंट्स और आईपी के लिए किया गया है. गौरतलब है कि कई स्मार्टफोन निर्माता कुछ टेक्नोलॉजीस का क्वॉलकॉम और मीडियाटेक जैसे चीप सेट निर्माता कंपनियों से लाइसेंस लेते हैं और इसके बदले उन्हें रॉयल्टी देते हैं. कंपनी ने कहा है कि शाओमी इंडिया ने जो भी भुगतान किया वह केवल भारत में हुई फोन बिक्री के लिए किया गया था और यह सभी भुगतान आरबीआई द्वारा अनुमति प्राप्त बैंकिंग चैनल के माध्यम से ही किया गए हैं.

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नहीं लागू होती फेमा की धारा 4
कंपनी ने कहा है कि इस मामले में फेमा की धारा 4 लागू भी नहीं होती है क्योंकि उसकी (शाओमी इंडिया की) विदेश में कोई कंपनी नहीं है. फेमा की धारा 4 के तहत कहा गया है कि किसी भी कंपनी या व्यक्ति को फॉरेन एक्सचेंज या अचल संपत्ति बाहर भेजने की अनुमति नहीं है.

क्या है ईडी का आरोप
ईडी का आरोप है कि शाओमी इंडिया ने जिन तीन विदेशी कंपनियों को पैसा भेजा है उनसे कोई सेवा नहीं ली है. ईडी का कहना है कि कंपनी ने रॉयल्टी की आड़ में ये राशि अनधिकृत रूप से विदेश भेजी है. जो फेमा की धारा 4 का उल्लंघन है. जिन कंपनियों को रॉयल्टी भेजी गई है उनमें शाओमी समूह की भी एक कंपनी शामिल है. इसके साथ ही ईडी का आरोप है कि कंपनी ने विदेशों में पैसा भेजते समय बैंकों को भ्रामक जानकारी भी मुहैया कराई थी.

Tags: Business news in hindi, Disproportionate assets, Enforcement directorate, Xiaomi

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