Yes Bank Crisis: बैंक के डूबे कर्ज से आपकी जेब पर ऐसे बढ़ता है बोझ, जानिए कितना है NPA

बैंकों ने लोन की EMI पर छूट देने से जुड़ी गााइडलाइंस की घोषणा कर दी है.
बैंकों ने लोन की EMI पर छूट देने से जुड़ी गााइडलाइंस की घोषणा कर दी है.

YES बैंक संकट के बाद जानिए कितना है बैंकों का डूबा कर्ज यानी एनपीए (NPA), इसके बढ़ने से आम बैंक ग्राहकों को इस तरह होता है सबसे अधिक नुकसान, आरबीआई के मुताबिक इस समय सबसे ज्यादा 1,59,661 करोड़ रुपये का एनपीए भारतीय स्‍टेट बैंक (SBI) का है

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नई दिल्ली. पीएमसी बैंक (Punjab and Maharashtra Co-operative Bank) के बाद यस बैंक (Yes Bank) में आर्थिक संकट गहरा गया है. जब से यह ऐलान हुआ है कि एक माह में इसके खाताधारक सिर्फ 50 हजार रुपये ही निकाल सकते हैं, बैंक शाखाओं में लंबी लाइन लगने लगी. लोग चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी पैसा निकाल लिया जाए वरना कहीं उनका पैसा डूब न जाए. यहां पर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर बैंक आर्थिक संकट के दलदल में फंसते क्यों जा रहे हैं. क्या इसके पीछे एनपीए (NPA-Non Performing Assets) यानी इनका डूबता कर्ज जिम्मेदार है. आइए सरकारी बैंकों के आर्थिक हालात को समझते हैं.

एनपीए बैंक का वह कर्ज होता है जो डूब गया है. जिसे फिर से वापस आने की उम्मीद न के बराबर होती है. जिस बैंक का एनपीए जितना अधिक है वो आर्थिक रूप से उतना ही कमजोर होता है और बैंकों की यह गलती उसके ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ती है.

सरकार ने संसद में दी डूबे कर्ज़ से जुड़े आंकड़ों की जानकारी- देश के 5 बड़े सरकारी बैंक के एनपीए पर इसी 3 मार्च को राज्यसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2019-2020 में सबसे ज्यादा 1,59,661 करोड़ रुपये का एनपीए भारतीय स्‍टेट बैंक (SBI) का है. पंजाब नेशनल बैंक 76,809 करोड़ के साथ दूसरे और बैंक ऑफ बड़ौदा 73,140 करोड़ रुपये के साथ तीसरे नंबर पर है. बैंक ऑफ इंडिया का 61,730 करोड़ रुपये का कर्ज डूब गया है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का एनपीए 49,924 करोड़ रुपये हो चुका है.



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Yes Bank के ग्राहक अब महीने में सिर्फ 50 हजार रुपये निकाल सकेंगे

5 करोड़ से अधिक कर्ज लेने वाले एनपीए खाते -विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोग बैंकों के करोड़ों रुपये लेकर विदेश भाग चुके हैं और बैंक लाख कोशिशों के बावजूद अपने पैसे वापस पाने में अभी तक नाकाम रहे हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुताबिक, 31 मार्च 2019 तक 5 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज नहीं चुकाने वाले 6,699 खातों को डूबे कर्ज (NPA) की श्रेणी में डाल दिया गया है. वहीं, प्राइवेट सेक्टर बैंक में इनकी संख्या 1859 है. इसके अलावा विदेशी बैंकों के भी 220 कर्जदारों को एनपीए की लिस्ट में डाल दिया गया है. जबकि स्माल फाइनेंस बैंकों में पांच करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लेकर उसे वापस न करने वाले सिर्फ 6 ऐसे कर्जदार हैं.

डूबे कर्ज से बैंक खाताधारकों को क्या होता है नुकसान -एस्कॉटर्स सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि एनपीए बढ़ने से सबसे अधिक नुकसान बैंक कस्टमर को ही होता है. इस समय सरकारी बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज का 10 फीसदी से अधिक एनपीए हो चुका है, जो बैंकों की सेहत के लिए ठीक नहीं है. इससे आम खाताधारकों की ही जेब कटती है. मतलब साफ है कि अगर बैंक के पास कम पैसा होगा तो ग्राहकों को आसानी से कर्ज नहीं मिलेगा. वहीं, बैंक अपनी सर्विस को बेहतर करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा खर्च नहीं कर पाएगा. जैसे ऑनलाइन सर्विसेज, एटीएम सर्विसेज और ग्राहकों से जुड़ी अन्य सुविधाओं का विस्तार नहीं कर पाएगा.

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भारतीय स्टेट बैंक का सबसे ज्यादा एनपीए है


बैंकिंग सेक्टर से जुड़े जानकार कहते हैं कि पहले बिना सोचे-समझे किसी सिफारिश और जुगाड़ से ऐसे व्यक्ति और संस्थान को बैंक लोन दे देते हैं जो उसे वापस नहीं करते. फिर जब बैंक पर आर्थिक बोझ बढ़ने लगता है तो नुकसान की भरपाई के लिए बैंक मैनेजमेंट अपने कस्टमर पर तरह-तरह के चार्ज लगा देते हैं.

मिनिमम बैलेंस और क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड पर तरह-तरह का नियम थोप देते हैं. ट्रांजेक्शन पर पैसा कटने लगता है, एटीएम से पैसे निकालने पर चार्ज बढ़ा देते हैं, आपकी जमा रकम पर ब्याज कम कर देते हैं.

देश में कितना है सरकारी बैंकों का डूबा कर्ज-आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2015 को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल एनपीए 2,79,016 करोड़ रुपये था जो 31 मार्च 2018 तक बढ़कर 8,95,601 करोड़ रुपये हो गया. सरकार की कोशिशों के बाद 31 दिसंबर 2019 तक यह फिर घटकर 7,16,652 करोड़ रुपये रह गया है.

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आरबीआई के मुताबिक 7,16,652 करोड़ रुपये है सरकारी बैंकों का एनपीए


एसबीआई में विलय होने वाले बैंकों का एनपीए-आरबीआई के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2016-17 में स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद का कुल डूबा कर्ज 18,212 करोड़ रुपये था. स्टेट बैंक ऑफ पटियाला का 17,847 करोड़ रुपये, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर का 10,677, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर का 9,915 और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर का एनपीए 8,817 करोड़ रुपये का था. यहां तक कि भारतीय महिला बैंक लिमिटेड में भी 55 करोड़ रुपये का कर्ज डूब गया था.

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