यस बैंक संकट से इस राज्य को लगा बड़ा झटका, फंसे 1909 करोड़ रुपये

यस बैंक संकट से इस राज्य को लगा बड़ा झटका, फंसे 1909 करोड़ रुपये
राज्य के लोगों के भी यस बैंक में 32,000 करोड़ रुपये फंसे

यस बैंक संकट में एक राज्य के करीब 1,909 करोड़ रुपये फंसे हैं. साथ ही इस राज्य के लोगों ने भी यस बैंक में 32,000 करोड़ रुपये जमा कर रखा है.

  • Share this:
शिमला.​​ हिमाचल प्रदेश सरकार के 1,909 करोड़ रुपये यस बैंक में फंसे हुए हैं. इस संबंध में गुरुवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा में जानकारी दी. बजट सत्र में प्रश्नकाल के बाद ठाकुर ने सदन में कहा कि यस बैंक में प्रदेश सरकार की कुल 1,909 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं. इसके अलावा, राज्य लोगों ने भी इस बैंक में करीब 32,000 करोड़ रुपये डिपॉजिट किया है.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की संस्थाएं जिनमें एचपी कोऑपरेटिव बैंक, कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक, एचपी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड, एचपी टावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन और धर्मशाला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सैकड़ों करोड रुपये यस बैंक में जमा हैं.

यह भी पढ़ें: कोरोना वायरस से पीड़ित कर्मचारियों को छुट्टी के पैसे देगा अमेजन



प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बताया कि ये संस्थाएं 27 दिसंबर 2017 को उनकी सरकार आने से पहले से ही यस बैंक में पूंजी जमा करती थीं. उन्होंने सदन में यह भी कहा कि केंद्र सरकार यस बैंक को रिवाइव करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है.
एसबीआई करेगी 7250 करोड़ रुपये का निवेश
केंद्र सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व प्रमुख वित्तीय ​अधिकारी प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया है. गुरुवार को मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, यस बैंक में एसबीआई 10 रुपये प्रति शेयर के भाव से 725 करोड़ शेयर्स खरीदेगी. इसका सीधा मतलब है कि यस बैंक को बचाने के लिए एसबीआई कुल 7,250 करोड़ रुपये खर्च करेगा.

यह भी पढ़ें: खुशखबरी! लगातार दूसरे दिन सोने की कीमतों में आई गिरावट, जानें 10 ग्राम का भाव

3 साल तक अपनी हिस्सेदारी 26 फीसदी से कम नहीं कर सकता SBI
बता दें कि बीते 5 मार्च को ही रिजर्व बैंक ने यस बैंक के बोर्ड को भंग करते हुए प्रशांत कुमार को नया प्रशासक नियुक्त कर दिया था. साथ ही, आरबीआई ने रिकन्स्ट्रक्शन स्कीम के लिए ड्राफ्ट भी पेश किया था. आरबीआई की शर्तों के मुताबिक, निवेश के बाद अगले 3 साल तक SBI अपनी हिस्सेदारी को 26 फीसदी से कम नहीं कर सकता है. तीन साल की अवधि कैपिटल इन्फ्युजन की अविध के दिन से शुरू हो जाएगी.

यह भी पढ़ें: YES Bank को लेकर पीएम मोदी कैबिनेट के साथ ले सकते हैं बड़ा फैसला
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज