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26/11 हमले के बाद अर्श से फर्श पर आया Yes Bank, इस तरह हुई आपसी कलह की शुरुआत

26/11 हमले के बाद अर्श से फर्श पर आया Yes Bank

26/11 हमले के बाद अर्श से फर्श पर आया Yes Bank

साल 2008 में मुंबई में हुए 26/11 हमले में यस बैंक के सह संस्थापक अशोक कपूर की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद उनकी बेटी शग ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्ली: साल 2008 में मुंबई में हुए 26/11 हमले में यस बैंक के सह संस्थापक अशोक कपूर की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद उनकी बेटी शगुन कपूर गोगिया ने लंबी कानूनी लड़ाई की और इस लड़ाई के बाद वह बैंक के बोर्ड में शामिल हो गईं. बैंक की गिरती हुई स्थिति को देखते हुए उनकी बेटी ने कहा था कि अगर उनके पापा मुंबई हमले के शिकार नहीं हुए होते तो बैंक की कभी भी ये हालत नहीं होती. आज हम आपको बताते हैं कि कैसे यह बैंक कुछ ही सालों में अर्श से फर्श पर आ गया, जानिए पूरी कहानी-

    इस तरह हुई थी बैंक की शुरुआत
    राणा कपूर और अशोक कपूर ने 1998 में हॉलैंड के रोबो बैंक के साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) रोबो इंडिया फाइनेंस की स्थापना की. इसमें दोनों समेत एक अन्य पार्टनर हरकीरत सिंह की 25-25% हिस्सेदारी थी. 2003 में तीनों ने रोबो इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेच दी. फिर राणा और अशोक ने 200 करोड़ रुपए की पूंजी से यस बैंक शुरू किया. दोनों को रोबो इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेचने से 10-10 लाख डॉलर मिले थे. यस बैंक ने 2004 में अपनी पहली ब्रांच मुंबई में खोली थी. उस समय बैंकिंग सेक्टर पर पूरी तरह सरकारी क्षेत्र के बैंकों का कब्जा था. केवल एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ही प्राइवेट सेक्टर के बैंक थे, लेकिन कुछ ही सालों में देखते ही देखते यह लगभग 2 लाख करोड़ रुपए की पूंजी वाला बैंक बन गया.

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    साल 2004 में हुई थी बैंक की शुरुआत
    इसके बाद साल 2005 में इसका आईपीओ आया था. 2005 में राणा कपूर को एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर और 2009 में बैंक को 30000 करोड़ रुपये की बैलेंस शीट के साथ सबसे तेज ग्रोथ का अवॉर्ड मिला. 2015 में यस बैंक NSE पर लिस्ट हुआ और 2017 में बैंक ने QIP के जरिए 4906.68 करोड़ रुपये जुटाए, जो किसी प्राइवेट सेक्टर बैंक द्वारा जुटाई गई सबसे बड़ी रकम है.

    4 साल बाद ही शुरू होने लगा था विवाद
    बता दें बैंक के शुरुआत के 4 साल बाद ही यह विवाद सामने आने लगा था. इसका असर बैंक के कारोबार पर भी देखने को मिला था. इसी बीच मुंबई हमले में हुई अशोक कपूर की मौत के बाद इस मामले ने काफी बड़ा रूप ले लिया.

    बता दें अशोक कपूर की पत्नी मधु कपूर और यस बैंक के फाउंडर व सीईओ राणा कपूर के बीच बैंक के मालिकाना हक को लेकर लड़ाई शुरू हो गई. मधु अपनी बेटी के लिए बोर्ड में जगह चाहती थीं. मामला मुंबई की अदालत तक पहुंचा और राणा कपूर को जीत हासिल हुई.

    राणा कपूर ने किया कॉर्पोरेट गवर्नेंस से समझौता
    आपको बता दें यस बैंक में कुछ साल पहले यस बैंक में कॉर्पोरेट गवर्नेंस से समझौते के कई मामले सामने आए और इन सबकी वजह राणा कपूर रहे थे. बता दें राणा कपूर ने कर्ज की वसूली करने के लिए बैंक के नियमों को अनदेखा करके पर्सनल रिलेशन को प्राथमिकता दी जिसकी वजह से बैंक की पूंजी नीचे गिरती गई.

    राणा कपूर को बेचने पड़े शेयर्स
    कर्ज को चुकाने के लिए प्रमोटर्स ने धीरे-धीरे बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचनी शुरू की. अक्टूबर 2019 में नौबत यहां तक पहुंच गई कि राणा कपूर तक को अपने शेयर बेचने पड़े और यस बैंक में उनके ग्रुप की हिस्सेदारी घटकर 4.72 रह गई. बैंक की सीनियर पोस्ट्स पर मौजूद लोगों में से भी कई ने यस बैंक का साथ छोड़ा, जिनमें सीनियर ग्रुप प्रसेडिंट रजत मोंगा भी शामिल रहे.

    सरकार ने की मदद
    यस बैंक के ऊपर गहराते इस संकट में सरकार मदद के लिए आगे आई. केंद्र सरकार और आरबीआई ने मिलकर यस बैंक को सहारा दिया. एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने यस बैंक में 2450 करोड़ के निवेश की योजना बनाई और बैंक की मदद की.

    आज क्या है बैंक का शेयर प्राइस?
    आपको बता दें मार्च में यह बैंक का शेयर 5.65 रुपए तक पहुंच गया था, लेकिन सरकार और एसबीआई की मदद से इस बैंक को काफी राहत मिली और बता दें आज के कारोबार दिन में यस बैंक का शेयर 14.15 रुपए के लेवल पर ट्रेड कर रहा है.

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    लिस्ट होने के बाद दिया बंपर रिटर्न
    यस बैंक ने कई साल निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न दिया. शेयर बाजार में जुलाई 2005 में लिस्ट होने के बाद शेयर का भाव 12.37 रुपये से बढ़कर 20 अगस्त 2018 को 404 रुपये हो गया, यानी इस दौरान करीब 3100 फीसदी यानी 33 गुना रिटर्न दिया.

    Tags: Business news in hindi, Yes Bank

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