ODOP: ट्विटर पर पूछा सवाल, तो विदेश से आया जवाब औरैया का देसी घी और चित्रकूट के खिलौने हैं मशहूर

मशहूर हैं खिलौने

मशहूर हैं खिलौने

ODOP के नाम से बने ट्वीटर (Twitter) हैंडल पर एक सवाल पूछा जाता है. खास बात यह है कि सवाल का सही जवाब देने के साथ ही लोग सवाल के साथ जुड़ी अपनी पुरानी यादें भी शेयर कर रहे हैं.

  • Share this:

नई दिल्ली. एक जनपद, एक उत्‍पाद (ODOP) योजना से अब देश ही नहीं दुनियाभर में भी आम भारतीयों को जोड़ा जा रहा है. यह पहल शुरु की है यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने. ओडीओपी के नाम से बने ट्वीटर (Twitter) हैंडल पर एक सवाल पूछा जाता है. खास बात यह है कि सवाल का सही जवाब देने के साथ ही लोग सवाल के साथ जुड़ी अपनी पुरानी यादें भी शेयर कर रहे हैं. जैसे एक सवाल पूछा गया था कि यूपी (UP) में लकड़ी से बने खिलौने (Toys) किस जिले की पहचान हैं. सही जवाब आया विदेश में रहने वाले राजेश सिंह का. लेकिन जवाब के साथ ही उन्होंने बताया कि कैसे वो बचपन में अपने दोस्त के संग लकड़ी से बनी ट्रेन (Wooden Train) और हाथी-घोड़े के साथ खेलते हुए पूरा दिन बिता देते थे.

गौरतलब रहे यूपी की पहचान योगी सरकार की योजना (ओडीओपी सिर्फ यूपी के उत्‍पादों को ही वैश्विक मंच पर पहचान नहीं दिला रही है, बल्कि कामगारों को रोजगार दिलाने के साथ-साथ आमजन से जुड़कर उनको बचपन की पुरानी यादें ताजा करा रही है. इसी के तहत ओडीओपी योजना ट्वीटर हैंडल पर एक सवाल पूछा जाता है. जिसका नतीजा यह निकलता है कि देश ही नहीं विदेश में बैठे लोग भी उस सामान के साथ जुड़ जाते हैं.

योगी सरकार ने यह योजना साल 2018 में शुरू की थी. इसी के चलते गोरखपुर का टेराकोटा, लखनऊ का चिकन, फिरोजाबाद का कांच का सामान, चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने, सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल, आगरे का पेठा समेत तमाम सामान को एक नई पहचान मिली है.

ग्रेटर नोएडा जाना हुआ और आसान, इस पुल से जोड़ी गई है नोएडा की सड़क
ओडीओपी को विदेशों में भी मिल रही पहचान

ऑनलाइन शापिंग वेबसाइट के जरिए भी इंटरनेशनल लेवल पर ओडीओपी उत्‍पादों की बिक्री में खासी वृद्धि हुई है. विदेशी बाजारों में खासतौर से अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में हस्तनिर्मित सामान की बहुत मांग है. इसी कामयाबी को देखते हुए योगी सरकार ओडीओपी योजना के लिए इस बार के बजट में 250 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं. मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है. वहीं, ये भी फैसला किया गया है कि एमएसएमई सेक्टर में उद्योग लगाने के लिए 1000 दिनों तक किसी भी लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज