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Business Idea: इस फसल की खेती कर कमा सकते हैं लाखों रुपये, जानिए तरीका

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जीरा आमतौर पर भारत के सभी रसोई घरों में पाया जाता है. जीरे में कई औषधीय गुण भी शामिल होते हैं, जिसकी वजह से इसकी मांग द ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

भारत एक कृषि प्रधान देश है. आज भी भारत की लगभग 58% आबादी के आजीविका का स्रोत कृषि है.
जीरे की खेती के लिए हल्की और दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है.
देश का 80 फीसदी से अधिक जीरा गुजरात और राजस्थान में उगाया जाता है.

नई दिल्ली. भारत एक कृषि प्रधान देश है. आज भी भारत की लगभग 58 प्रतिशत आबादी के आजीविका का स्रोत कृषि है. अगर आप भी खेती के जरिए अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो आज हम आपको एक ऐसे ही फसल के बारे में बताएंगे, जिसकी डिमांड साल भर बनी रहती है. हम बात कर रहे हैं जीरा की खेती (Cumin Farming) के बारे में. जीरा आमतौर पर भारत के सभी रसोई घरों में पाया जाता है. जीरे में कई औषधीय गुण भी शामिल होते हैं, जिसकी वजह से इसकी मांग दोगुना हो जाती है.

मसाला फसलों में जीरे का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है. कोई भी सब्जी बनानी हो या दाल या अन्य कोई डिश सभी में जीरे का प्रयोग किया जाता है. बिना इसके सारे मसालों का स्वाद फीका सा लगता है. जीरे को भूनकर छाछ, दही आदि में डालकर खाया जाता है. जीरा न केवल आपके स्वाद को बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ की दृष्टि से भी इसका सेवन काफी फायदेमंद है. इसका पौधा दिखने में सौंफ की तरह होता है. संस्कृत में इसे जीरक कहा जाता है, जिसका अर्थ है, अन्न के जीर्ण होने में (पचने में) सहायता करने वाला. यदि इसकी उन्नत तरीके से खेती की जाए तो इसका बेहतर उत्पादन कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. आइए, इसे उगाने के तरीके के बारे में बात करते हैं.

ये मिट्टी हैं बेहतर
जीरे की खेती के लिए हल्की और दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में जीरे की खेती आसानी से की जा सकती है. बुआई से पहले यह जरूरी है कि खेत की तैयारी ठीक ढंग से कर ली जाय. जिस खेत में जीरे की बुआई करनी है, उस खेत से खरपतवार निकाल कर साफ कर लेना बहुत जरूरी है ताकि अच्छे से फसल की वृद्धि हो सके.

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ये हैं बेहतर किस्म के जीरे
आर जेड-19 – जीरे की यह किस्म 120-125 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इससे 9-11 क्विंटल तक प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त होता है.
आर जेड- 209 – यह भी किस्म 120-125 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इसके दाने मोटे होते हैं. इस किस्म से 7-8 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उपज प्राप्त होती है.
जी सी- 4 – जीरे की ये किस्म 105-110 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इसके बीज बड़े आकार के होते हैं. इससे 7-9 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
आर जेड- 223 : यह किस्म 110-115 दिन में पककर तैयार हो जाती है. जीरे की इस किस्म से 6-8 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. लिहाजा, इन किस्मों को उगाकर अच्छी कमाई की जा सकती है.

जीरे से कमाई
जीरे की उपज और उससे कमाई की बात करें तो जीरे की औसत उपज 7-8 क्विंटल बीज प्रति हेक्टयर हो जाती है. जीरे की खेती में करीब 30,000 से 35,000 रुपये प्रति हेक्टयर खर्च आता है. अगर मान लीजिए जीरे की कीमत 100 रुपये प्रति किलो है तो 40000 से 45000 रुपये प्रति हेक्टयर शुद्ध लाभ हासिल किया जा सकता है. ऐसे में अगर 5 एकड़ की खेती में जीरा उगाया जाए तो 2 से सवा दो लाख रुपये की कमाई की जा सकती है.

बता दें कि जीरे की खेती के लिए उपयुक्त समय नवंबर माह के मध्य का होता है. देश का 80 फीसदी से अधिक जीरा गुजरात और राजस्थान में उगाया जाता है. राजस्थान में देश के कुल उत्पादन का करीब 28 फीसदी जीरे का उत्पादन होता है.

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