बढ़ सकती है होम लोन और कार लोन की EMI, जानिए नए और मौजूदा ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

SBI के बाद दूसरे बैंक भी ब्याज दरों में वृद्धि का जल्द ऐलान कर सकते हैं.

SBI के बाद दूसरे बैंक भी ब्याज दरों में वृद्धि का जल्द ऐलान कर सकते हैं.

अधिकतर लोग लोन लेकर घर या फिर कार खरीदते हैं. ऐसे में ब्याज दर काफी महत्वपूर्ण होता है. उसके आधार पर EMI तय होती है जिसे हर माह चुकानी पड़ती है. कई बार किसी कारणवश एक EMI मिस हो जाए तो अगला इंस्टॉलमेंट भरते समय पेनाल्टी भी देनी होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2021, 5:46 AM IST
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नई दिल्ली. अधिकतर लोग लोन लेकर घर (Home Loan) या फिर कार (Car loan) खरीदते हैं. ऐसे में ब्याज दर काफी महत्वपूर्ण होता है. उसके आधार पर EMI तय होती है जिसे हर माह चुकानी पड़ती है. कई बार किसी कारणवश एक EMI मिस हो जाए तो अगला इंस्टॉलमेंट भरते समय पेनाल्टी भी देनी होती है. अब खबर है कि लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है. बता दें कि हाल ही में SBI के होम लोन के ग्राहकों की ब्याज दर एक चौथाई फीसदी बढ़ गई है. SBI ने कम ब्याज दर वाली अपनी होम लोन स्कीम वापस ले ही है और ऐसे में ब्याज दरें इस स्कीम से पहले वाले स्तर पर आ गई है. इससे ब्याज दरें पहले के स्तर पर आ गई है.

दूसरे बैंक भी बढ़ा सकते हैं ब्याज दर

ET की खबर के मुताबिक, SBI के बाद अन्य बैंक भी ब्याज दरों में वृद्धि का ऐलान कर सकते हैं. पैसा बाजार के सीईओ और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा ने मुताबिक, होम लोन की विशेष स्कीम वापस लेने से ब्याज दर में सिर्फ 25 बेसिस प्वॉइंट्स का अंतर होगा, लेकिन इसका व्यापक असर पड़ेगा, क्योंकि दूसरे बैंक भी इस तरह के कदम उठा सकते हैं. होम लोन देने वाली बड़ी कंपनी HDFC ने 29 महीने के बाद अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम पर ब्याज दर 10-25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा दी है. ऐसे में उसके फंड की लागत बढ़ी है, जिसका सीधा असर लोन की ब्याज दर पर भी पड़ेगा. इसका सीधा असर आपके लोन की EMI पर पड़ेगा.

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जानें, नए ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

जब ब्याज दरें बढ़ रही हों तब फिक्स्ड रेट पर लोन लेना फायदेमंद होता है. बैंक बाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के मुताबिक, ब्याज की दरें बढ़ रही हैं, इसलिए फिक्स्ड रेट पर कार, होम या दूसरे लोन लेना फायदेमंद रहेगा. इसकी वजह यह है कि इसमें आपका इंटरेस्ट रेट कम बना रहता है. होम लोन के नए ग्राहकों के पास इस मामले में ज्यादा विकल्प नहीं है, क्योंकि कुछ ही संस्थान फिक्स्ड रेट पर होम लोन देते हैं.

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जानें, क्या मौजूदा ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक आम तौर पर ग्राहकों को लोन की अवधि या EMI बढ़ाने का विकल्प देते हैं. हालांकि, लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प सभी ग्राहकों को नहीं मिलता. जानकारों के मुताबिक, बैंक आम तौर पर लोन की असल अवधि या ग्राहक के रिटायरमेंट की अवधि से ज्यादा बढ़ाने की इजाजत नहीं देते, इसलिए कई ग्राहकों के पास अपफ्रंट पेमेंट कर EMI की अवधि स्थिर रखने के अलवा दूसरा विकल्प नहीं होता. अगर आपकी मासिक आय इजाजत दे तो आपको लोन की अवधि में बदलाव नहीं करना चाहिए. आपको बैंक को EMI बढ़ाने के लिए कहना चाहिए. इससे आपकी ब्याज की टोटल रकम भी नहीं बढ़ेगी.
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