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ZEEL-Sony deal: क्या निजी फायदे के लिए जी एंटरटेनमेंट का सस्ते में सोनी के साथ विलय किया गया?

 Zee एंटरटेनमेंट

Zee एंटरटेनमेंट

Zee Entertainment Enterprises Ltd (ZEEL) के दो सबसे बड़े शेयरहोल्डर्स में से एक Invesco Oppenheimer जी से MD & CEO Punit Goenka को हटाने के लिए अड़ा हुआ है. साथ ही बोर्ड के पुनर्गठन की मांग कर रहा है. सोनी के साथ मर्जर डील के बावजूद ZEEL के दो सबसे बड़े शेयरहोल्डर्स दो बार पत्र लिख कर EGM की मांग दुहरा चुके हैं.

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    नई दिल्ली . पिछले हफ्ते  ZEEL-Sony deal सामने आई थी. हालांकि डील के बाद भी जी एंटरटेनमेंट के बोर्ड में घमासान जारी है. इस डील और जी के बोर्ड में जारी विवाद पर कई कहानियां सामने निकल कर आ रही हैं. एक तरफ जी के दो सबसे बड़े शेयरहोल्डर्स कंपनी की EGM बुलाने की मांग पर अड़े हैं तो वहीं दूसरी तरफ कुछ विदेशी स्टेकहोल्डर्स यह कह रहे हैं कि सोनी के साथ सस्ते में डील कर ली गई है.

    Zee Entertainment Enterprises Ltd (ZEEL) के दो सबसे बड़े शेयरहोल्डर्स में से एक Invesco Oppenheimer जी से MD & CEO Punit Goenka को हटाने के लिए अड़ा हुआ है. साथ ही बोर्ड के पुनर्गठन की मांग कर रहा है. सोनी के साथ मर्जर डील के बावजूद ZEEL के दो सबसे बड़े शेयरहोल्डर्स दो बार पत्र लिख कर EGM की मांग दुहरा चुके हैं.

    SEBI का नया रेगुलेशन 
    इंवेस्को द्वारा ईजीएम पर जोर देने के पीछे एक तात्कालिक कारण सेबी का नया रेगुलेशन भी है. इसमें independent directors के नियुक्ति के संबंध में दिशा-निर्देश है, जो जनवरी 2022 से प्रभावी हो जाएगा.

    सेबी के नए रेगुलेशन के मुताबिक, स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति, पुनर्नियुक्ति और हटाने के लिए (appointment, re-appointment and removal of independent directors) एक विशेष प्रस्ताव (special resolution) की आवश्यकता होगी. साथ ही इसमें मतों की संख्या विपक्ष से तीन गुना होनी चाहिए. वर्तमान में इसके लिए सिर्फ 50 प्रतिशत वोट शेयर की आवश्यकता होती है.

    यह भी पढ़ें – Invesco ने जी एंटरटेनमेंट को फिर लिखा पत्र, पुनित गोयनका को हटाने की मांग दोहराई

    ZEEL-Sony सौदे की गैर-बाध्यकारी प्रकृति ( non-binding nature ) को ध्यान में रखते हुए, Invesco सेबी के नए नियम के प्रभावी होने से पहले बोर्ड का पुनर्गठन चाहता है. मामले से जुड़े एक शख्स ने कहा कि, ‘अगर किसी कारण से डील नहीं होती है और समय बीत जाता है, तो बोर्ड में बदलाव करना मुश्किल हो सकता है. लिहाजा दोनों बड़े शेयरहोल्डर्स उसके पहले ही बोर्ड में बदलाव चाहते हैं.

    ZEEL minus Subhash Chandra family
    इस पूरे मामले में एक दूसरा एंगल भी है. वो है ZEEL minus Subhash Chandra family यानी जी से सुभाष चंद्रा फेमिली को बाहर किया जाए. इसकी वजह ये है कि जी के लिए और भी ग्राहकों को तलाशना जो नए बोर्ड से संभव है. कई सारे दूसरे निवेशक जी को खरीदने में इंट्रेस्टेड हो सकते हैं अगर जी से सुभाष चंद्रा का परिवार बाहर हो जाए. कई बड़े निवेशकों को बोर्ड में सुभाष चंद्रा परिवार से दिक्कत है.

    एक प्रमुख proxy advisory firm के प्रवक्ता ने कहा कि, यह कुछ ऐसा है कि ” एक अवांछित किरायेदार के साथ एक घर का मूल्य निर्धारण करने जैसा है बनाम एक खाली घर का मूल्य निर्धारण करने से.”

    चंद्रा परिवार के पास एक और रास्ता
    एक अन्य सलाहकार ने कहा कि एक इस मामले में चंद्रा परिवार के पास एक और रास्ता है. सुभाष चंद्रा परिवार ZEEL में अपना स्टेक अगले पांच साल में 4 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर ले. यह सिर्फ एक QIP के माध्यम से होगा या सोनी अपना हिस्सा कम कर के सुभाष चंद्रा परिवार को दे.

    एक प्रमुख Foreign fund managers के मुताबिक, सोनी ने ZEEL के प्रमोटर्स के हितों को बचाने के लिए ZEEL को सस्ते में ही खरीदा होगा.

    क्या सस्ते में डील हुई 
    इसको एक डील की एक सिंपल कैलकुलेशन से समझ सकते हैं. ZEEL की वैल्यू 3.2 बिलियन डॉलर (23,680 करोड़ रुपए) थी लेकिन सोनी ने डील के लिए ZEEL की वैल्यू 2 बिलियन डॉलर ( 14,800 करोड़) लगाई. ZEEL के 246 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से सौदा किया. साथ ही ZEEL promoters को 2 फीसदी एक्स्ट्रा हिस्सेदारी देना भी गैरजरुरी लगता है.

    बड़े प्रमोटर के खड़े होने से मामला बदला 
    एक foreign institutional stakeholder ने कहा कि ZEEL एक यूनिक एसेट है. साथ ही देश के मजबूत मीडिया फ्रेंचाइजी में से एक है जिसमें प्रबल तेजी की संभावना है. अब यह एक संपत्ति का खेल बन गया है. अब पूरी संभावना है कि इसमें और भी नॉन मीडिया कंपनी भी इस डील में ओपन बिडिंग के जरिए इंट्रेस्ट लेंगी.

    जब बड़े निवेशक चुप रहते हैं तो दूसरे कुछ नहीं कर सकते हैं. लेकिन इंवेस्को के स्टैंड लेने के कारण स्थिति अब बदल जाएगी. इंवेस्को द्वारा ZEEL promoters के खिलाफ मजबूत स्टैंड लेने और governance अनियमितता को उजागर करने के कारण सस्ते वैल्यूएशन पर शेयरों की ट्रेडिंग करने के दिन चले गए.

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