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    15 अक्टूबर से शुरू होगा एशिया के सबसे लंबी सुरंग का काम, जानिए भारत के लिए क्यों जरूरी है इसका बनना

    (प्रतीकात्मक तस्वीर)
    (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    जोजिला सुरंग (Zoji-la Tunnel) के बन जाने से हर एक मौसम में आवाजाही हो पायेगी. श्रीनगर, द्रास, कारगिल और लेह क्षेत्र के बीच सालों भर संपर्क बना रह पायेगा. माना जा रहा है कि इस सुरंग के बन जाने से इन क्षेत्रों के सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 11, 2020, 1:21 PM IST
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    नई दिल्ली. श्रीनगर को लेह से जोड़े रखने वाले एशिया की सबसे लंबी 14.2 किमी की जोजिला सुरंग ((Zoji-la Tunnel)) परियोजना का काम 15 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) 15 अक्टूबर सुबह 11 बजे फर्स्ट ब्लॉस्ट समारोह का वर्चुअली उद्घाटन करेंगे. सामरिक नजरिए से बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाने वाले इस सुरंग के बन जाने से लद्दाख को जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश से सालों भर जोड़ा जा सकेगा. अगले छह साल में यह सुरंग परियोजना पूरी होगी.

    सामरिक दृष्टिकोण से अहम है जोजिला सुरंग
    भारत-चीन सीमा (Indo-China Border) पर बढ़ते तनाव के बीच 3,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित जोजिला दर्रा की रणनीतिक अहमियत काफी बढ़ गई है. साल भर आवाजाही बने रहने से सुरक्षा जवानों को सीमा पर पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी बहुत फायदा होगा. आधुनिक भारत के इतिहास में यह सुरंग सुरक्षा के नजरिए से भी यह सुरंग मील का पत्थर साबित होने वाला है. सभी जानते है कि लद्दाख, गिलगिट और बाल्टिस्तान क्षेत्र में आतंकवादियों की गतिविधियोंं का खतरा हमेशा बना रहता है. इस सुरंग के बन जाने से इन आतंकवादियों के नेटवर्क को तोड़ने के सेना के अभियान को और धार मिल पायेगा. यहीं नहीं चीन-भारत सीमा पर पीएलए के नापाक हरकतों को भी मुंहतोड़ जवाब देने की कोशिशें और पैनी हो पायेगी.

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    इस मायने में भी यह सुरंग है काफी महत्त्वपूर्ण


    जोजिला सुरंग के बन जाने से हर एक मौसम में आवाजाही हो पायेगी. श्रीनगर, द्रास, कारगिल और लेह क्षेत्र के बीच सालों भर संपर्क बना रह पायेगा. माना जा रहा है कि इस सुरंग के बन जाने से इन क्षेत्रों के सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी. यहीं नहीं सर्दियों के मौसम में भी लोग लद्दाख जा पायेंगे. जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. फिलहाल एनएच 1 के जरिए द्रास और कारगिल जैसे दुर्गम सड़कों से श्रीनगर और लेह के बीच साल में सिर्फ 6 महीने ही आवाजाही हो पाता है. दुनियां के सबसे ज्यादा खतरनाक सड़कों में शुमार इस स्ट्रेच से जाने पर हमेशा सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.

    जोजिला सुरंग के निर्माण से 3 घंटे का सफर महज 15 मिनट में
    14.15 किमी लंबी इस सुरंग के बन जाने से मुसाफिरों को जोजिला दर्रा को क्रॉस करने में महज 15 मिनट का समय लगेगा. फिलहाल इसे पास करने में यात्रियों को 3 घंटे का सफर करना होता है. यात्रियों का ना सिर्फ समय बचेगा बल्कि ईंधन और धन की भी काफी बचत होगी. माना जा रहा है कि इस सुरंग के निर्माण से क्षेत्र के स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. कृषि उपजों को सालोभर बाजार मिल पायेगा. क्षेत्र के किसानों की आमदनी बढ़ाने

    क्या होगी जोजिला सुरंग तैयार करने की लागत?
    पूर्ववर्ती डिजाइन में परियोजना की लागत 8000 करोड़ के आसपास बैठ रही थी, जिसे घटाकर अब साढ़े चार हजार के करीब लाया गया है. इस सुरंग के निर्माण के लिए बीआरओ ने साल 2013 में डीपीआर तैयार किया था. जिसे बाद में बीओडी एन्यूईटी मोड पर इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए इस परियोजना को 4 बार ठेका दिया गया लेकिन यह सफल नहीं हो पाया.

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    जुलाई 2016 में ईपीसी मोड पर इसे लागू करने के लिए यह प्रोजेक्ट एनएचआईडीसीएल को दिया गया. काम का ठेका ITNL (IL&FS) को दिया गया काम की प्रगति जुलाई 2019 तक होती रही लेकिन इसी बीच IL&FS में वित्तीय संकट के बादल गहराने लगे थे. इसके बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने फरवरी 2020 को इस परियोजना के प्रगति की समीक्षा की और इसके लागत को घटाकर 4429.83 करोड़ रुपये कर दिया. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सुरंग परियोजना का शिलान्यास 25 मई 2018 को लेह में किया था.

    परियोजना से जुडी ये जानकारियां भी अहम
    इस परियोजना के तहत कुल 14.15 किमी का सुरंग तैयार किया जाना है. इसके साथ ही 18.63 किमी लंबी एप्रोच रोड का भी निर्माण किया जाना है. पहाड़ों में गिरने वाले बर्फ के चट्टानों से सुरक्षा और सड़क सुरक्षा के लिए भी इंतजाम किए जा रहे है,मसलन कैच डेम्स,स्नो गैलरी,कट और कवर,डिफ्लेक्टर डैम जैसी सुरक्षात्मक कदम उठाये जा रहे है. इस जोजिला सुरंग परियोजना को 6 साल में पूरा किया जाना है. जबकि इससे जुडे एप्रोच सड़कों के निर्माण में ढ़ाई साल का वक्त लगेगा.

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    सुरंग की सुरक्षा व्यवस्था होगी विश्व स्तरीय
    सुरंग में कई सुरक्षात्मक कदम भी उठाये जा रहे है. सुरंग के दोनों तरफ 750 मीटर में आपातकाल ले बाई बनाया जायेगा.इसके अलावा दोनों तरफ साइट वॉक भी बनाया जायेगा. आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरंग में मैन्यूअल फायर अलार्म पुश बटन लगाया जायेगा जिसे सुरंग में गुजरने वाले ड्राइवर इस्तेमाल कर सकेंगे. पोर्टेबल अग्निरोधक यंत्र भी लगाया जायेगा. सुरंग के अंदर टेलिफोन की सुविधा होगी ताकि किसी आपात स्थिति में संपर्क किया जा सके.

    सुरंग के अंदर पर्याप्त लाईटिंग की व्यवस्था होगी. विडियों सर्वेलेंस की व्यवस्था होगी जिसके तहत सुरंग के दीवारों पर चपे-चपे पर सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे. सुरंग के बाहरी दोनों हिस्से में भी सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे. इन कैमरों के डेटा पर संबंधित अथॉरिटी पैनी नज़र रखेंगे.यही नहीं सेंट्रल कंट्रोल रुम के साथ ट्रेफिक कंट्रोल सिस्टम भी विकसित किया जायेगा.
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