इलेक्‍शन ड्यूटी से बचने के लिए यूनिवर्सिटी के 100 प्रोफेसरों ने निकाला ये उपाय

पंजाब यूनिवर्सिटी

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नियमों के तहत किसी भी ऐसे फैकल्‍टी मेम्‍बर को इलेक्‍शन ड्यूटी में नहीं लगाया जा सकता, जो...

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  • Last Updated: April 17, 2019, 10:33 AM IST
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लोकसभा चुनाव के दौरान इलेक्‍शन ड्यूटी से बचने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने नया रास्‍ता निकाल लिया है. अभी तक करीब 100 प्रोफेसरों ने लोकसभा इलेक्‍शन में खड़े होने के लिए यूनिवर्सिटी ऑ‍थोरिटी से स्‍वीकृति मांगी है. पंजाब में 19 मई को लोकसभा चुनाव होने वाले हैं.

दरअलस, पटियाला में जिला निर्वाचन आधिकारी द्वारा यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को इलेक्‍शन ड्यूटी पर लगाने के फैसले से यूनिवर्सिटी की टीचिंग फैकल्‍टी नाराज हैं और वह इसका विरोध कर रही है. उनका कहना है यूनिवर्सिटी एक ऑटोनोमस बॉडी है और नियम व शर्तों में इस बात का उल्‍लेख है कि टीचिंग फैकल्‍टी पर इलेक्‍शन ड्यूटी के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता. उन्होंने कहा कि उन्हें चुनावी ड्यूटी पर लगाना, विश्वविद्यालय कैलेंडर में प्रदान किए गए राजनीतिक और संवैधानिक जनादेश का स्पष्ट उल्लंघन है और वे तब तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती.

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मंगलवार को, असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों सहित 85 प्रोफेसरों ने पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला में अधिकारियों को आवेदन प्रस्तुत किए और आग्रह किया कि वे आगामी लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं. नियमों के तहत किसी भी ऐसे फैकल्‍टी मेम्‍बर को इलेक्‍शन ड्यूटी में नहीं लगाया जा सकता, जो चुनाव लड़ रहा है. इसे लेकर यूनिवर्सिटी की टीचिंग फैकल्‍टी स्‍ट्राइक पर चली गई है और इसके कारण शैक्षणिक व रिसर्च का काम पूरी तरह रुक गया है.
विश्वविद्यालय ने अपनी सिंडिकेट बैठक में पहले ही तीन विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों को चुनाव लड़ने की स्वीकृति दे दी थी, लेकिन बाद में कुछ अन्य प्रोफेसरों ने भी चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी है.

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यूनिवर्सिटी के रजिस्‍ट्रार मनजीत सिंह निज्‍जर ने कहा कि चुनाव लड़ने की अनुमति मांगने के लिए कई प्रोफसरों के आवेदन हमें मिल रहे हैं. अभी तक हमने 16 सदस्‍यों को इसकी स्‍वीकृति दे दी है. वहीं कई प्राध्यापकों ने चुनाव ड्यूटी को पूरा करने के लिए कहे जाने पर विरोध प्रदर्शन किया और उन्होंने इस संबंध में कुलपति के साथ बैठक की.

अब तक यूनिवर्सिटी के 85 शिक्षकों ने चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी है. विरोध कर रहे शिक्षक ना केवल विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्‍क‍ि इस मुद्दे पर चुप्‍पी साधने के लिए वह यूनिवर्सिटी एडमिनिस्‍ट्रेशन और जिला निर्वाचन आधिकारी के खिलाफ भी नारे लगा रहे हैं.

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हालांकि वीसी ने शिक्षकों को आश्‍वस्‍त किया है कि वह इस मामले में दखल देंगे और इससे संबंधित उच्‍च अधिकारियों से इस मामले में बात करेंगे.

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