स्कूलों पर बड़ी खबर: 22 फीसदी इमारतें पुरानी या जर्जर, जानिए 12 शहरों के 26 हजार स्कूलों का सच

स्कूलों पर बड़ी खबर: 22 फीसदी इमारतें पुरानी या जर्जर, जानिए 12 शहरों के 26 हजार स्कूलों का सच
एक रिपोर्ट में स्कूलों को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आईं हैं.

नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड राइट्स (National Commission for Protection of Child Rights) यानी एनसीपीसीआर (NCPCR) की रिपोर्ट में और भी कई अहम जानकारियां सामने आईं हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 24, 2020, 12:53 PM IST
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नई दिल्ली. अगर आपके बच्चे स्कूल जाते हैं तो ये खबर आपके लिए है. एक नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि देशभर में करीब 22 प्रतिशत स्कूल की इमारतें या तो बहुत पुरानी है या बिल्कुल जर्जर हालत में हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड राइट्स (National Commission for Protection of Child Rights) यानी एनसीपीसीआर (NCPCR) की रिपोर्ट में ये बात सामने आई है. ये रिपोर्ट देश के 12 शहरों के 26 हजार से ज्यादा स्कूलों के सर्वे पर आधारित है.

रिपोर्ट को इस तरह समझिए
22 प्रतिशत स्कूल पुरानी और जर्जर इमारतों में संचालित किए जा रहे हैं.
31 फीसदी स्कूल की इमारतों में दरारें भी मौजूद हैं.
19 प्रतिशत स्कूल रेल ट्रैक के पाास स्थित हैं.
1 प्रतिशत स्कूलों में ही बच्चों की सुरक्षा के लिए स्पीड ब्रेकर्स समेत जेबा क्रॉसिंग का साइनबोर्ड है.


74 प्रतिशत स्कूलों में पानी और टॉयलेट की सुविधा इमारत के अंदर ही है.



रिपोर्ट इन शहरों पर आधारित
रिपोर्ट में देश के सभी चारों हिस्सों नॉर्थ, वेस्ट, ईस्ट और नॉर्थ-ईस्ट को आधार बनाया गया है. इसके तहत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों को शामिल किया गया तो ओडिशा, मिजोरम, उत्तराखंड, मेघालय, झारखंड और चंडीगढ़ की भी मौजूदगी रही.

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ये खतरनाक स्थिति
रिपोर्ट में साफतौर पर कहा गया है कि ये एक खतरनाक स्थिति है. इसने स्टूडेंट्स की हेल्थ और फिजिकल सेफ्टी को जोखिम में डाल दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, 49 प्रतिशत स्कूलों में दिव्यांगों को ध्यान में रखकर टॉयलेट बनाए गए हैं. वहीं, मिड डे मील की क्वालिटी से 57 प्रतिशत बच्चे ही संतुष्ट हैं. हालांकि U-DISE डाटा के अनुसार इन शहरों में 81.5 प्रतिशत स्कूलों में मिड डे मील मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन इस रिपोर्ट के अनुसार 81.5 प्रतिशत में से 56 प्रतिशत स्कूलों में ही मानकों के अनुसार मिड डे मील दिया जा रहा है.
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