मिलिए देश के उन दिव्‍यांगों से, जिन्‍होंने पास किया UPSC Exam

शारीरिक रूप से दिव्‍यांग होने के बावजूद UPSC की जनरल कैटगरी में 815 रैंक पाने वाली इरा सिंह देश की पहली प्रतिभागी हैं. मिलिए ऐसे ही कुछ और रियल लाइफ के हीरोज से.

News18Hindi
Updated: July 9, 2019, 10:22 AM IST
मिलिए देश के उन दिव्‍यांगों से, जिन्‍होंने पास किया UPSC Exam
ये हैं वो 5 दिव्यांग, जिन्‍होंने आईएएस एग्‍जाम में पाई सफलता
News18Hindi
Updated: July 9, 2019, 10:22 AM IST
हर कोई चाहता है कि एग्‍जाम में उसे सफलता मिले, लेकिन कामयाबी तो उसी को मिलती है जो इस राह में आने वाली चुनौतियों से हार नहीं मानता बल्‍कि इनसे लड़कर अपना रास्‍ता बना लेता है. ऐसा ही कर दिखाया है कुछ युवाओं ने. ये युवा शारीरिक रूप से तो सक्षम नहीं थे, लेकिन इन्‍होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. अपनी अटूट मेहनत से देश की सबसे प्रतिष्‍ठित UPSC Exam में सफलता पाई.

इस लिस्‍ट में सबसे पहला नाम आता है इरा सिंघल का. इरा UPSC सिविल सर्विस एग्‍जाम 2014 की टॉपर हैं. शारीरिक रूप से दिव्‍यांग होने के बावजूद UPSC की जनरल कैटगरी में 815 रैंक पाने वाली देश की पहली प्रतिभागी हैं. इरा मेरठ के सोफिया गर्ल्स स्कूल से लेकर दिल्ली के लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल में अव्वल रहीं. वह दिल्ली में धौलाकुआं के आर्मी पब्लिक स्कूल में भी पढ़ीं. नेताजी सुभाष इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की और यहां पर पहले नंबर पर बनी रहीं. फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से एमबीए किया.

इसके बाद उन्‍होंने UPSC Exam की तैयारी की और परीक्षा में सफलता हासिल की. हालांकि शारीरिक रूप से विकलांग होने की वजह से उन्‍हें पोस्टिंग नहीं दी गई. उन्‍होंने हार नहीं मानी और सेंट्रल एडमिनिस्‍ट्रेटिव ट्रिब्‍यूनल में केस दायर किया. साल  2014 में केस जीतने के बाद उन्‍हें हैदराबाद में पोस्टिंग मिली. इस बीच उन्‍होंने अपनी रैंक सुधारने के लिए कोशिशें जारी रखीं. आखिरकार अपने चौथे प्रयास में उन्‍होंने सिविल सर्विस एग्‍जाम की जनरल कैटेगरी में टॉप किया.

इरा सिंघल साभार फेसबुक


इस लिस्‍ट में दूसरा नाम आता कर्नाटक के तुमकुरु जिले के केम्पा होन्नाह का. केम्‍पा ने इस एग्जाम में 340वां स्‍थान हासिल किया. साल 2016 में उन्‍होंने अपने तीसरे प्रयास में परीक्षा को बिना किसी विशेष कोचिंग के क्रैक किया था. उन्‍होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी और दोस्तों को दिया. उन्होंने डेक्कन हेराल्ड से बात करते हुए कहा, मेरी पत्नी अंकिता समर्थन का स्तंभ रही हैं. उन्होंने मुझे पढ़ने, नोट्स बनाने और रिकॉर्डिंग सुनने में मदद की.

इस उपलब्धि के पीछे वह मुख्य ताकत हैं. वह यहां असली IAS अधिकारी हैं. हालांकि ये सफर उनके लिए आसान नहीं था. जब वह क्‍लास तीन में थे तब उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी. उन्‍होंने अपनी शिक्षा मैसूर के सरकारी नेत्रहीन स्‍कूल से ली थी. उन्होंने महाराजा कॉलेज से स्नातक किया और फिर कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी (केएसओयू) से ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद केम्पा मैसूर में वोंटिकोप्पल गवर्नमेंट पीयू कॉलेज में प्रोफेसर बन गए थे. इसके बाद उन्‍होंने घर में ही UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की और तीसरे प्रयास में आखिरकार उन्‍होंने सफलता हासिल कर ली.

केम्‍पा साभार फेसबुक

Loading...

तीसरे स्‍थान पर हैं जयंत मनकले. जयंत ने साल 2018 में चौथे प्रयास में 923 की अखिल भारतीय रैंक हासिल की थी. जंयत को भी दुर्लभ बीमारी की वजह से आंखों की रोशनी छिन गई थी. उनकी मुश्‍किलें यहीं कम नहीं हुई. कुछ साल बाद उनके पिता की भी मौत हो गई. इसके बाद उन्‍हें आर्थिक तंगी से जूझना पड़ा. इस दौरान उनके पास कॉलेज की फीस भरने के पैसे नहीं होते थे. इस दौरान उनकी मां और बहन ने घर के बने मसाले और अचार बेचकर पढ़ाया.

जयंत साभार फेसबुक


चौथे स्‍थान पर यूपी के अमरोहा जिले के संतेंद्र सिंह हैं. सतेंद्र ने साल 2018 में 714 रैंक हासिल की है. सतेंद्र जब सिर्फ 1.5 साल के थे, तब उन्‍हें निमोनिया हो गया था. इसके बाद उनके माता-पिता उन्‍हें एक डॉक्‍टर के पास ले गए, जहां उन्‍हें एक गलत इंजेक्‍शन लगाया गया. इसकी वजह से उनकी रेटिना और ऑप्टिक नसों को नुकसान होने के कारण उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी. वह नई दिल्ली के किंग्सवे कैंप क्षेत्र में ब्लाइंड बॉयज के लिए हिंदी माध्यम के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गए. यहां से उन्‍होंने पढ़ाई पूरी की.


सतेंद्र सिंह साभार फेसबुक

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नौकरियां/करियर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 3, 2019, 5:00 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...