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कभी चाय बेचता था ये टीचर, आज उनके पढ़ाए 14 स्‍टूडेंट्स का NEET में हुआ सेलेक्शन

News18Hindi
Updated: September 12, 2019, 11:47 AM IST
कभी चाय बेचता था ये टीचर, आज उनके पढ़ाए 14 स्‍टूडेंट्स का NEET में हुआ सेलेक्शन
कभी चाय बेचता था ये टीचर, आज उनके पढ़ाए 14 स्‍टूडेंट्स का NEET में हुआ सेलेक्शन

अजय खुद तो डॉक्‍टर नहीं बन पाए लेकिन किसी और स्‍टूडेंट्स के साथ ऐसा न हो इसके लिए मुफ्त में कोचिंग की शुरुआत की. आज उनकी कोचिंग में पढ़ने वाले 14 स्‍टूडेंट्स ने NEET एग्‍जाम क्रैक कर लिया.

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  • Last Updated: September 12, 2019, 11:47 AM IST
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वे खुद डॉक्‍टर बनना चाहते थे, लेकिन पिता की मौत ने उनके इस ख्‍वाब को तोड़ दिया. हालात ऐसे बने कि मेडिकल फील्‍ड में जाने के सपने को छोड़कर उन्‍हें घर खर्च चलाने के लिए कमाने का फैसला करना पड़ा. आज वे चाय और शर्बत बेचते हैं. हालांकि इन सबके बीच भी उन्‍होंने अपनी ख्‍वाहिश को कभी मरने नहीं दिया बल्‍कि इसको पूरा करने के लिए उन्‍होंने एक अलग ही रास्‍ता निकाला. इसके लिए उस शख्‍स ने आर्थिक रूप से कमजोर स्‍टूडेंट्स को NEET की फ्री कोचिंग, भोजन और हॉस्‍टल की सुविधा मुहैया कराते हैं, जिससे किसी अन्‍य स्‍टूडेंट्स का सपना केवल गरीबी की वजह से मर न जाए. गरीब बच्‍चों को मुफ्त में कोचिंग देने वाले इस शख्‍स का नाम है अजय बहादुर सिंह.आइए जानते हैं कैसे की उन्‍होंने ये शुरुआत.

दरअसल ओडिशा से ताल्‍लुक रखने वाले अजय बहादुर सिंह खुद डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन तभी पिता की गुर्दे के प्रत्यारोपण की जरूरत आ गई. इन कठिन हालातों ने परिवार को अपनी संपत्ति बेचने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे अजय आर्थिक रूप से मजबूर हो गए. ऐसे में अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए उन्‍हें कमाने का फैसला करना पड़ा.

चाय और शर्बत बेचना शुरू किया 

अजय ने बिगड़ती आर्थिक स्‍थिति को संभालने के लिए एक स्टाल लगाया, जहां उन्होंने चाय और शर्बत बेचना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे वक्‍त बीतता गया लेकिन अजय का डॉक्टर बनने का सपना कहीं न कहीं उनको परेशान कर रहा था.उन्‍होंने अपने इस सपने को पूरा करने केे लिए एक तरीका खोज निकाला.

कोचिंग पढ़ाना शुरू किया
अजय के धीरे-धीरे हालात सुधरे तो उन्होंने एक कोचिंग संस्थान शुरू करने का फैसला किया, जहां वे ऐसे छात्रों को पढ़ाते थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते. उनके सपने अधूरे रह जाते हैं. ऐसे स्‍टूडेंट्स को उन्‍होंने पढ़ाने का फैसला किया.

'जिंदगी फाउंडेशन' की शुरुआत
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अजय ने साल 2018 से जिंदगी फाउंडेशन की नींव डाली, जहां वो जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं. ये कोचिंग बिहार के जाने माने आनंद कुमार की 'सुपर 30' कोचिंग की तर्ज पर बनी है. यहां ऐसे स्‍टूडेंट्स को पढ़ाया जाता है जो प्रतिभाशाली तो हैं लेकिन संसाधनों की कमी से महंगी कोचिंग में पढ़ नहीं पाते.

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर


14 स्‍टूडेंट्स का हुआ सेलेक्‍शन
इस साल अजय के पढ़ाए हुए 14 स्‍टूडेंट्स का NEET में सेलेक्‍शन हुआ है.वहीं अजय ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया था कि उन्होंने 2018 में ज़िंदगी की शुरुआत की थी. इसमें 18 बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था जिसमें से 12 को  ओडिशा के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिल गया है.

डॉक्‍टर भी देते हैं मुफ्त क्‍लास
आनंद कुमार के सुपर 30 से प्रेरित होकर डॉ भारत सरन ने बाड़मेर, राजस्थान में 2012 में '50 ग्रामीणों सेवा संस्थान' की स्थापना की, जहां मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को तैयारी मुफ्त में  करवाई जाती है. उन्होंने बताया  हर साल 1 बच्चे का खर्चा 25000 रुपये आता है.

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First published: July 15, 2019, 10:47 AM IST
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