Home /News /career /

सभी राज्यों के लिए एक शिक्षा नीति व्यावहारिक नहीं, सभी की सामाजिक-आर्थिक स्थिति अलग: विशेषज्ञ

सभी राज्यों के लिए एक शिक्षा नीति व्यावहारिक नहीं, सभी की सामाजिक-आर्थिक स्थिति अलग: विशेषज्ञ

प्रतिष्ठित संस्थाओं के माध्यम से दी जाएगी निःशुल्क कोचिंग. (सांकेतिक तस्वीर)

प्रतिष्ठित संस्थाओं के माध्यम से दी जाएगी निःशुल्क कोचिंग. (सांकेतिक तस्वीर)

बंगाल सरकार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जुलाई में अनुमोदित नयी शिक्षा नीति पर टिप्पणी साझा करने के लिए इस महीने की शुरुआत में छह सदस्यीय समिति का गठन किया था.

    नई दिल्ली. नयी शिक्षा नीति का अध्ययन करने और उसको लेकर विचार साझा करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित छह-सदस्यीय समिति के एक सदस्य ने कहा कि सभी राज्यों पर उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखे बिना एक शिक्षा प्रणाली लागू करना व्यावहारिक विचार नहीं है.

    नीति पर विचार करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार 
    समिति के सदस्य ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि नीति के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है जिसे कुछ दिनों में राज्य सरकार को सौंपा जाएगा.

    राज्यों की जरूरतें और आर्थिक स्थिति अलग
    उन्होंने कहा, ‘‘हमने रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है जिसे कुछ दिनों में सरकार को सौंपा जाएगा. मेरा विचार है कि 130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में आप राज्यों की जरूरतों और आर्थिक स्थिति का विचार किये बिना सभी राज्यों पर एक समान शिक्षा नीति नहीं लागू कर सकते. जो मणिपुर में लागू हो सकता है, हो सकता है कि उसका बंगाल में कोई मतलब नहीं हो.’’

    मंजूरी देने से पहले राज्यों को विश्वास में लेना चाहिए
    उन्होंने नयी शिक्षा नीति (एनईपी 2020) में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं का फिर से प्रारूप बनाने और प्राइमरी स्कूल में सुधार जैसे कुछ पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र को मंजूरी देने से पहले राज्यों को विश्वास में लेना चाहिए था.

    प्रत्येक राज्य का अपना बोर्ड है
    समिति के सदस्य ने न्यूज एजेंसी से कहा, ‘‘वर्तमान शिक्षा नीति जिसमें प्रत्येक राज्य का कक्षा 10वीं तक परीक्षा संचालित करने के लिए अपना स्वयं का बोर्ड है, इसे किसी वैकल्पिक तंत्र के बिना पूरी तरह से बदला नहीं जा सकता. नीति को मंजूरी देने से पहले हो सकता है कि इन चीजों को ध्यान में नहीं लिया गया हो. मैंने रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है.’’

    एम फिल समाप्त करने का कारण स्पष्ट नहीं
    उन्होंने दावा किया कि समिति को शिक्षा प्रणाली के लिए की गई कुछ सिफारिशों के निहितार्थ को समझने में काफी मुश्किल हुई. उन्होंने साथ ही कहा कि ‘‘शोधार्थियों के लिए एम फिल समाप्त करने का कारण बहुत स्पष्ट नहीं है.’’

    विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए दरवाजे खोलती है
    उन्होंने कहा, ‘‘यह नीति विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए देश में आधार स्थापित करने के लिए दरवाजे खोलती है. यह भी स्वागत योग्य कदम नहीं है क्योंकि हमारे देश में पहले से ही उच्च श्रेणी के उच्चतर शिक्षण संस्थान हैं.’’

    ये भी पढ़ें-
    ओडिशा में मीलों पैदल चलकर, पेड़-पहाड़ियां चढ़कर ऑनलाइन क्लास ले पाते हैं छात्र
    UP सरकार के प्राइमरी स्कूलों में फिर मिलेंगी सर्दियों की छुट्टियां,पढ़ें डिटेल

    छह सदस्यीय समिति के सदस्य
    राज्य सरकार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जुलाई में अनुमोदित नयी शिक्षा नीति पर टिप्पणी साझा करने के लिए इस महीने की शुरुआत में छह सदस्यीय समिति का गठन किया था. इसके सदस्यों में यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति सुरंजन दास, सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, शिक्षाविद् पी. सरकार और ऑन्कोलॉजिस्ट नृसिंह प्रसाद भादुड़ी शामिल हैं. (भाषा के इनपुट के साथ)

    Tags: Better education opportunities, Education news, Education Policy, Education Policy 2020, Education System

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर