नई शिक्षा नीति के लिए असम सरकार बनाएगी 40 सदस्यों की कमेटी, मंत्री ने कही ये बात

नई शिक्षा नीति के लिए असम सरकार बनाएगी 40 सदस्यों की कमेटी, मंत्री ने कही ये बात
New Education Policy 2020: पैनल को तमाम तरह के सब-ग्रुप्स में डिवाइड किया जाएगा ताकि नई पॉलिसी के तमाम पहलुओं की जांच की जा सके.

New Education Policy 2020: पैनल को तमाम तरह के सब-ग्रुप्स में डिवाइड किया जाएगा ताकि नई पॉलिसी के तमाम पहलुओं की जांच की जा सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 4:25 PM IST
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नई दिल्ली. असम सरकार (Assam Government) केंद्र की नई शिक्षा नीति (New Education Policy 2020) को लागू करने के लिए राज्य में 40 सदस्यों की एक कमेटी बनाएगी. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पैनल की अध्यक्षता शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव करेंगे. कमेटी अपनी रिपोर्ट 31 दिसंबर तक सब्मिट करेगी और इसे राज्य में लागू किए जाने का ब्लूप्रिंट जनवरी तक तैयार किया जाएगा.

कई सब-ग्रुप्स में डिवाइड होगा पैनल
पैनल को तमाम तरह के सब-ग्रुप्स में डिवाइड किया जाएगा ताकि नई पॉलिसी के तमाम पहलुओं की जांच की जा सके. नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए कुछ स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स जरूरी हैं और कमेटी इसे अच्छे तरीके से लागू करने के लिए काम करेगी.

असम सरकार ने किया नई शिक्षा नीति का स्वागत
हिंदुस्तान टाइम्स
के मुताबिक मंत्री ने कहा कि असम सरकार इस नई शिक्षा नीति का स्वागत करती है. यह एक ऐतिहासिक क्षण है यह अलग अलग स्ट्रीम्स आर्ट्स एंड कल्चर, भाषा खासकर क्षेत्रीय भाषा के इंटीग्रेशन के लिए काफी फायदेमंद होगी. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में जो सुधार किए गए हैं, उनमें से कई की शुरुआत पहले ही की जा चुकी है.



यह काफी लिबरल पॉलिसी है क्योंकि इसके जरिए 5वीं कक्षा तक शिक्षा मातृभाषा या रीजनल लैंग्वेज में दी जाएगी, 12वीं कक्षा तक शिक्षा को यूनिवर्सनलाइज किया जाएगा. बता दें इस नई शिक्षा नीति को 29 जुलाई को स्वीकृत किया गया था.

ग्रेड 5 या आठवीं तक अपनी भाषा में पढ़ाई पर जोर
नई शिक्षा नीति के अनुसार, नीति में कम से कम ग्रेड 5 तक और उससे आगे भी मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा को ही शिक्षा का माध्यम रखने पर विशेष जोर दिया गया है. यह आठवीं कक्षा तक भी हो सकता है. त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्‍प शामिल होगा. किसी भी विद्यार्थी पर कोई भी भाषा नहीं थोपी जाएगी. भारत की अन्य पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगे.
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