'अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी' का एडमिनिस्ट्रेटिव काम सितंबर से शुरू

'अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी' का एडमिनिस्ट्रेटिव काम सितंबर से शुरू
अटल बिहारी वाजयेपी विश्वविद्यालय का भवन करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगा.

कुलपति के अनुसार चिकित्सा विश्वविद्यालय के दूसरे चरण में एक मेडिकल कालेज और अस्पताल का निर्माण किया जाएगा.

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  • Last Updated: August 14, 2020, 6:07 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर लखनऊ में बनने वाले 'अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय' का प्रशासनिक कार्य सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाएगा. इसके लिए फिलहाल गोमतीनगर स्थित राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान में स्थान मिला है.

50 एकड़ भूमि आवंटित
इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सुल्तानपुर रोड पर स्थित चक गंजरिया सिटी परियोजना में राज्य सरकार द्वारा 50 एकड़ भूमि आवंटित की गई है. इसका भवन करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगा.पहले चरण में प्रशासनिक भवन, ऑडिटोरियम, संग्रहालय, अतिथि गृह, आवास व अन्य निर्माण किए जाएंगे.

गोमतीनगर के राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान में जगह
विश्वविद्यालय के कुलपति और प्लास्टिक सर्जन प्रो ए के सिंह ने न्यूज एजेंसी को बताया, 'चिकित्सा विश्वविद्यालय के निर्माण में दो साल लगेंगे, लेकिन हम प्रशासनिक कार्य सितंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू कर देंगे. प्रशासनिक कार्यालय के लिये शहर के गोमतीनगर स्थित राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान में नौवें तल पर काफी बड़ा स्थान मिला है, जहां से हम काम शुरू कर रहे हैं.'



विश्वविद्यालय के अन्तर्गत साठ मेडिकल व डेंटल कॉलेज
उन्होंने बताया कि इस चिकित्सा विश्वविद्यालय के अन्तर्गत प्रदेश के करीब साठ सरकारी और निजी मेडिकल कालेज व डेंटल कालेज, करीब 300 नर्सिंग कालेज और पैरामेडिकल प्रशिक्षण संस्थान आयेंगे.

इस प्लानिंग से होगा काम
सिंह के मुताबिक 'सितंबर से काम शुरू करने के बाद सबसे पहले हम प्रदेश के पैरामेडिकल कालेजों को साथ लाएंगे. उसके बाद अगले साल से प्रदेश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कालेज और डेंटल कालेजों को एक साथ लाने का काम शुरू करेंगे. उसके बाद नर्सिंग कालेजो को जोड़ा जाएगा.’’

किंग जार्ज, संजय गांधी, सैफेई आर्युर्विज्ञान संस्थान शामिल नहीं
इस चिकित्सा विश्वविद्यालय के तहत किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय, संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, सैफेई आर्युर्विज्ञान संस्थान जैसे संस्थान नही आयेंगे. इसके अलावा सभी मेडिकल और डेंटल तथा अन्य चिकित्सा संस्थान आयेंगे. इसके अंतर्गत वे चिकित्सा संस्थान आयेंगे जहां पठन-पाठन होता है.

शिक्षा गुणवत्ता में सुधार 
सिंह के मुताबिक संस्थानों के पाठ्यक्रम के साथ ही चलने वाली कक्षाओं तक पर विश्वविद्यालय से नजर रखी जाएगी और शिक्षा गुणवत्ता में सुधार होगा. कुलपति के अनुसार चिकित्सा विश्वविद्यालय के दूसरे चरण में एक मेडिकल कालेज और अस्पताल का निर्माण किया जाएगा.

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मोदी ने 25 दिसंबर 2019 को रखी नींव
इस चिकित्सा विश्वविद्यालय की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2019 को रखी थी. उस अवसर पर मोदी ने कहा था कि यह विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई को समग्रता और सम्पूर्णता देगा. इस विश्वविद्यालय से प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई की गुणवत्ता में और सुधार होगा.
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