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...जब अंग्रेजी ना पढ़ पाने की वजह से स्‍कूल में प‍िटे थे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

...जब अंग्रेजी ना पढ़ पाने की वजह से स्‍कूल में प‍िटे थे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून 1838 को बंगाली ब्राह्मण परिवार में बंगाल स्थित कंथालपाड़ा में हुआ था.

बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून 1838 को बंगाली ब्राह्मण परिवार में बंगाल स्थित कंथालपाड़ा में हुआ था.

बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून 1838 को बंगाली ब्राह्मण परिवार में बंगाल स्थित कंथालपाड़ा में हुआ था.

    भारत के राष्ट्रीय गीत' वंदे मातरम्' के रचियता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. भारत देश के अलावा विदेशों में भी इनकी रचना के लिए जाना जाता है. बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून 1838 को बंगाली ब्राह्मण परिवार में बंगाल स्थित कंथालपरा में हुआ था. बंकिम जी शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखते थे. इनके पिता सरकारी नौकरी में थे, जो बाद में बंगाल के मिदनापुर के उप कलेक्टर बन गए.

    श‍िक्षक ने की प‍िटाई
    बंकिम चंद्र को बचपन से ही पढ़ने-लिखने में काफी रुचि थी. इनको इंग्लिश भाषा से ज्यादा संस्कृत पसंद थी, इसका एक विशेष कारण यह भी था कि एक बार स्कूल में उनके इंग्लिश के शिक्षक ने उन्हें इंग्लिश न आने पर पिटाई कर दी थी, जिसके बाद से बंकिम चन्द्र को इंग्लिश भाषा से ही चिढ़ हो गई.

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    बंकिमचंद्र चट्टोपाध्‍याय के बारे में ऐसा बहुत कुछ है, ज‍िसे आप संभवत: नहीं जानते होंगे. उनके बचपन और पढ़ाई से संबंध‍ित हम यहां कुछ ऐसी ही तथ्‍य आपके ल‍िये लेकर आए हैं:

    इंग्लिश भाषा से थी चिढ़
    बंकिमचंद्र जी की स्कूली शिक्षा मिदनापुर के सरकारी स्कूल में हुई थी. बंकिम बचपन से ही मेधावी थे. इन्होंने पहली बार स्कूल के दिनों में ही कविता लिखी चिढ़. संस्कृत में ज्यादा रुची को देखते हुए एक बार स्कूल में उनके इंग्लिश शिक्षक ने बंकिम चंद्र की पिटाई भी कर दी थी, जिसके बाद बंकिम चन्द्र जी को इंग्लिश भाषा से ही चिढ़ हो गई थी. बंकिमचंद्र जी पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी आगे थे. स्कूल में उनकी पहचान मेहनती छात्र के रूप में थी. बंकिमचंद्र जी पढ़ाई के साथ साथ खेलकूद में भी आगे थे. स्कूल में उन्हें एक अच्छे मेहनती छात्र के रूप में जाना जाता था.27 june in history, who is Bankim Chandra Chattopadhyay, Bankim Chandra Chattopadhyay, vande matram, anandmath, भारत की राष्ट्रीय गीत, 26 जून का इत‍िहास, 26 जून.


    कुछ ऐसा था बंकिमचंद्र का जीवन

    बंकिमचंद्र जी ने कॉलेज की पढ़ाई हुगली मोहसिन कॉलेज से की थी, फिर उसके बाद उन्होंने आर्ट्स विषय में 1858 में स्नातक किया. इन्होनें कानून की परीक्षा पास कर, इसकी डिग्री भी हासिल की.

    बंकिम की रचना ‘आनंदमठ’ सबसे अधिक लोकप्रिय हुई, इसमें ही बंकिमचंद्र जी ने वंदेमातरम् गीत को पहली बार लिखा था. जो आगे 1937 में भारत का राष्ट्रीय गीत बन गया. बकिम जी को लेखन का शौक था. वे अपने आदर्श ईश्वरचंद्र गुप्ता जी को मानते थे, उन्ही के रास्ते पर चलते हुए उन्होंने भी कविता लेखन के द्वारा अपनी साहित्यिक यात्रा शुरू की.1865 में बंकिम चन्द्र जी ने बंगाली भाषा में अपना पहला उपन्यास लिखा और प्रकाशन किया, जिसका नाम “दुर्गेशनंदिनी” था.

    11 साल की उम्र में हुई शादी:
    बंकिम जी कि शादी मात्र 11 वर्ष में हो गई थी, उस समय उनकी पत्नी महज 5 साल की थी. शादी के 11 साल बाद इनकी पत्नी कि मृत्यु हो गई. जब बंकिम जी 22 साल के थे. इसके बाद बंकिम चन्द्र जी ने दूसरी शादी राजलक्ष्मी देवी से की, जिसके बाद उन्हें तीन बेटियां हुई. बंकिम जी की मात्र 55 साल में अपने कामकाज से सेवानिवृत्त होने के तुरंत बाद ही 8 अप्रैल को 1894 को बंगाल के कलकत्ता में मृत्यु हो गई

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    Tags: Bankim Chandra Chattopadhyay, Bharat, Vande Matram

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