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खुशखबरी! पढ़ते-लिखते वक्त खेलोगे-कूदोगे तो जल्दी बनोगे नवाब


Updated: October 31, 2019, 2:36 PM IST
खुशखबरी! पढ़ते-लिखते वक्त खेलोगे-कूदोगे तो जल्दी बनोगे नवाब
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इस नए अध्ययन की माने तो जो बच्चे स्कूल में खेलकूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों (Sports & Physical Activity in School) में हिस्सा लेते हैं उनके बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ जाती है.

  • Last Updated: October 31, 2019, 2:36 PM IST
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वॉशिंगटन. पुरानी कहावत है जिसे आजकल कम ही सुनने को मिलता है- 'खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे तो बनोग नवाब'. ब्रिटिश पत्रिका स्पोर्ट्स मैगजीन (Sports Magazine) के अनुसार वैज्ञानिकों ने इस कहावत को अब झूठा साबित कर दिया है. इस नए अध्ययन की माने तो जो बच्चे स्कूल में खेलकूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों (Sports & Physical Activity in School) में हिस्सा लेते हैं उनके बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ जाती है.

अब कुछ स्कूलों ने इसे अपने पढ़ाई के तरीकों में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. जैसे कुछ स्कूलों में अपने पाठ्यक्रम में एक्टिविटी का हिस्सा बढ़ा दिया है. जबकि कुछ स्कूल गणित के प्रश्न हल करने के लिए बच्चों की उछलकूद की मदद लेने की पहल कर रहे हैं.

वैज्ञानिक अध्ययन में यह पाया गया कि पढ़ाई के दौरान शारीरिक गतिविधि का इस्तेमाल करने से किसी न किसी रुप में बच्चे का प्रदर्शन सुधर रहा है. यूसीएल सेंटर फॉर बिहेवियर चेंज, यूसीएल साइकोलॉजी एण्ड लैंग्वेज साइंस के मुख्य शोधकर्ता डॉ. एमा नॉरिस ने बताया कि बच्चों में सिडेंटरी लाइफस्टाइल का बड़ा हिस्सा स्कूल का होता है. स्कूल में अपने 7-8 घण्डे बिताने के दौरान बच्चे सबसे कम शारीरिक गतिविधि में शामिल होते हैं. पढ़ाई के दौरान शारीरिक हरकतों को शामिल करने से उनकी यादाश्त तेज होती है.

लीडिन यूनिवर्सिटी नीदरलैंड के शोधकर्ता डॉ. टॉमी वैन स्टीन ने कहा कि शिक्षक इन शारीरिक गतिविधियों के तरीकों को आसानी से अपने पाठ्यक्रम में शामिल करक बच्चों का प्रदर्शन सुधार सकते हैं.

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एक अध्ययन के दौरान दो साल तक हफ्ते में तीन बार इस विधि से पढ़ाई करने वाले बच्चे स्पैलिंग और गणित दूसरे छात्रों के मुकाबले चार महीने पहले सीख गए.


यह अध्ययन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, नीदरलैंड, क्रोएशिया, चीन, आयरलैंड, इजराइल, पुर्तगाल और स्वीडन के बच्चों के बीच किया गया. तीन से 14 साल के उम्र समूह के 12,663 बच्चों में से आधे अमेरिका के थे. अध्ययन के दौरान आठ और नौ साल के कुछ बच्चों ने एक जगह पर दौड़कर विश्व के अलग-अलग देशों की यात्रा करने का अभिनय किया.

शोध में शामिल बच्चे अपने समकक्ष छात्रों की तुलना में कहीं अधिक एकाग्र और सक्रीय रहे. इनकी भागीदारी भी सामान्य से अधिक पाई गई. नीदरलैंड में एक अध्ययन के दौरान दो साल तक हफ्ते में तीन बार इस विधि से पढ़ाई करने वाले बच्चे स्पैलिंग और गणित दूसरे छात्रों के मुकाबले चार महीने पहले सीख गए.
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First published: October 31, 2019, 2:36 PM IST
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