शिक्षकों के वेतन में हुआ विलंब तो हर महीने अतिरिक्‍त 10,000 देगा DSGMC: दिल्‍ली हाईकोर्ट

शिक्षकों के वेतन में हुआ विलंब तो हर महीने अतिरिक्‍त 10,000 देगा DSGMC: दिल्‍ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉक्टरों की कमिटी बनाने को कहा. (फाइल फोटो)

शिक्षकों के वेतन को लेकर द‍िल्‍ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है क‍ि स्‍कूल अगर समय पर वेतन नहीं देता है तो उन्‍हें हर महीने 10,000 रुपये अतिर‍िक्‍त देना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 9:24 PM IST
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नई दिल्‍ली: दिल्‍ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) के शिक्षकों के लिये बड़ी राहत की खबर है. दिल्‍ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दिल्‍ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) अगर अपने शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं देता है तो उसे हर महीने 10,000 रुपये अतिरिक्‍त भुगतान करना होगा. दरअसल, दिल्‍ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) से संबद्ध स्‍कूलों के कई शिक्षकों को जनवरी 2020 से ही वेतन प्राप्‍त नहीं हुआ है.

न्‍यायमूर्ति सी हरि शंकर ने याचिकाओं के लंबित रहने तक डीएसजीएमसी और इसके स्‍कूलों को वेतन एवं अन्‍य मानदेय जारी रखने का निर्देश दिया, जिसे याचिकाकर्ता शिक्षक, मासिक आधार पर प्राप्‍त करने के हकदार हैं. वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अदालत ने इसकी सुनवाई की थी.

श‍िक्षकों ने अपनी याच‍िका में सातवां वेतन आयोग लागू करने की मांग की थी और साथ में इस बात का भी उल्‍लेख क‍िया था क‍ि उन्‍हें जनवरी 2020 से मार्च 2020 तक का वेतन नहीं द‍िया गया है. अदालत ने कहा कि उसने पहले 22 अगस्त, 2019 को अपने आदेश में कहा था कि वेतन भुगतान में चूक के मामले में, याचिकाकर्ताओं को स्कूलों को प्रति माह 10,000 अतिरिक्त देना होगा.



सुनवाई के दौरान DSGMC के वकील जसमीत स‍िंह ने कहा क‍ि कुछ छात्रों के अभ‍िभावकों ने स्‍कूल फीस नहीं दी है. ऐसे में स्‍कूल श‍िक्षकों को वेतन नहीं दे सका. हालांक‍ि इससे अलग, श‍िक्षकों का कहना है क‍ि स्‍कूल ने छात्रों से मार्च 2020 तक की फीस ले ली है, लेकिन इस बात को दलील के रूप में पेश कर रहे हैं और फंड की कमी बता रहे हैं. जबक‍ि स्‍कूल के पास फंड है.
इससे पहले हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने इसी तरह के मामले में वेतन का भुगतान दो हफ्ते के भीतर करने का आदेश द‍िया था. हाईकोर्ट ने यह आदेश 24 अप्रैल को द‍िया था. कोर्ट ने यह भी कहा था क‍ि वेतन का भुगतान न करने का कोई औचित्य ही नहीं हो सकता है. छात्रों से जब फीस ली जा रही है तो श‍िक्षकों को वेतन म‍िलना ही चा‍ह‍िये.

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