बड़ी खबर: मेड‍िकल छात्रों के ल‍िये खुशखबरी, यहां शुरू हुए 9 नये मेड‍िकल कॉलेज

9 नये मेड‍िकल कॉलेजों को मंजूरी
9 नये मेड‍िकल कॉलेजों को मंजूरी

नौ नये मेड‍िकल कॉलेज खुलने के बाद, छात्रों के पास ज्‍यादा व‍िकल्‍प और संभावनाएं होंगी.

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मुंबई: COVID-19 महामारी के बीच मेड‍िकल छात्रों के ल‍िये बड़ी खुशखबरी है. महाराष्ट्र में नौ नए सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी चल रही है. इस योजना पर लंबे समय से व‍िचार चल रहा था और अब राज्‍य सरकार इसे पूरा करने जा रही है. 9 नये मेड‍िकल कॉलेजों के खुलने के बाद एडम‍िशन के ल‍िये ज्‍यादा सीटें मौजूद होंगी. रायगढ़, सतारा, गढ़चिरौली, बुलढाणा, अमरावती, नंदुरबार, उस्मानाबाद और परभणी में प्रस्तावित इन कॉलेजों में भी मरीजों के लिए तृतीयक उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी.

डॉ. टी.पी. लहाणे, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान (DMER) ने इस प्रस्ताव की पुष्टि की और कहा कि प्रत्येक कॉलेज में MBBS पाठ्यक्रम के लिए 100 सीटें उपलब्‍ध होंगी. इन्हें जिले के नागरिक अस्पतालों में शुरू किया जाएगा. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सिंधुदुर्ग में एक मेडिकल कॉलेज की भी घोषणा की है.

वर्तमान में, महाराष्ट्र में 24 सरकारी और नागरिक संचालित मेडिकल कॉलेजों में 4,080 एमबीबीएस सीटें हैं. 17 निजी और अल्पसंख्यक कॉलेजों में पाठ्यक्रम के लिए 2,120 सीटें भी मौजूद हैं. यह प्रस्‍ताव करीब 10 साल से लंबित था. उदाहरण के लिए, रायगढ़ और नंदुरबार मेडिकल कॉलेजों की योजना 2009 में बनाई गई थी. सातारा, नंदुरबार, अलीबाग, मुंबई, बारामती, गोंदिया और चंद्रपुर सात नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए साल 2012 में स्वीकृति दी गई थी.



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साल 2014 से 2019 के बीच चंद्रपुर, गोंदिया, जलगांव और बारामती मेडिकल कॉलेजों का संचालन किया गया. सूत्रों की मानें तो मुंबई के उपनगरीय इलाके में एक मेडिकल कॉलेज के लिए कुछ प्रस्ताव, राजनीतिक हित के अभाव के कारण रुके हुए थे. राज्‍य ने गारई में संस्‍थान के ल‍िये करीब 25 एकड़ जमीन च‍िन्‍ह‍ित कर ली है.

सूत्रों के अनुसार दरअसल, मेडिकल एजुकेशन और पब्‍ल‍िक हेल्‍थ सेक्‍टर में परेशानी निवेश को लेकर है. सिविल अस्पतालों की इमारतों और कर्मचारियों के लिये मेडिकल कॉलेज को तीन साल के लिए 500 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी. 100 छात्रों को अंडर ग्रेजुएट स्‍तर पर दाखिला देने के लिये मेडिकल कॉलेज को कम से कम 500 बेड वाले अस्‍पताल की जरूरत होगी.

साल 2016 में राज्‍य सरकार ने एक कमेटी बनाई थी, जिसने यह सुझाव दिया था कि जिले के अस्‍पतालों को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित कर दिया जाए और इसके लिये प्राइवेट-पब्‍ल‍िक पार्टनरशिप (PPP) की मदद ली जा सकती है.
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