बड़ी खबर: UGC गाइडलाइन्‍स पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई कल, छात्रों ने सोशल मीडिया चलाया अभियान

शुक्रवार 14 अगस्‍त को सुप्रीम कोर्ट परीक्षा के आयोजन मामले पर सुनवाई करेगा.

UGC Exam Guidelines: राज्यों के 31 छात्रों के एक समूह द्वारा उच्चतम न्यायालय में याचिका में मांग की गई है कि अंतिम वर्ष के छात्रों को उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर प्रमोट किया जाए.

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    नई द‍िल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट कल, 14 अगस्त को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी अंतिम वर्ष के परीक्षा दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. असम, बिहार, कर्नाटक, मेघालय, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के 31 छात्रों के एक समूह ने मांग की है कि अंतिम वर्ष के छात्रों को उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर प्रमोट किया जाए. यूजीसी ने अपने नवीनतम परीक्षा दिशानिर्देशों में विश्वविद्यालयों को आंतरिक मूल्यांकन और पिछले प्रदर्शन के आधार पर मध्यवर्ती सेमेस्टर के छात्रों को प्रमोट करने की अनुमति दी है.

    लेकिन, दिशानिर्देशों ने ऑनलाइन, ऑफलाइन या मिश्रित (ऑनलाइन और ऑफलाइन) मोड में अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षा के संचालन को अनिवार्य बना दिया है. 20 जुलाई को दायर याचिका में बिहार और असम में बाढ़ की स्थिति सहित कई मुद्दों का भी उल्लेख किया गया था.

    महाराष्ट्र और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों ने पहले अंतिम वर्ष के विश्वविद्यालय परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी ने कहा कि राज्यों को विश्वविद्यालय परीक्षा रद्द करने की कोई शक्ति नहीं है. अंतिम सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि राज्य यूजीसी के नियमों को नहीं बदल सकते हैं. क्योंकि केवल यूजीसी को डिग्री प्राप्त करने के लिए नियमों को निर्धारित करने का अधिकार है.

    छात्र चला रहे कैमपेन:
    अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है और दूसरी ओर छात्र कई सोशल मीडिया अभियान चला रहे हैं. अंतिम वर्ष के छात्र परीक्षा को रद्द करने, पिछले प्रदर्शन के आधार पर प्रमोट क‍िये जाने और डिग्री आवंटन की मांग कर रहे हैं ताकि वे उच्च अध्ययन के लिए प्रवेश ले सकें.



    एक छात्र ने सोशल मीड‍िया पर ल‍िखा है क‍ि हम कोरोना से सुरक्षित हैं लेकिन अवसाद हमें मार रहा है. वहीं एक दूसरे छात्र ल‍िखा है क‍ि कृपया डिग्री जारी करें और परीक्षा भी रद्द करें और छात्र जीवन के साथ खिलवाड़ न करें, हम छात्र किट का परीक्षण नहीं कर रहे थे.

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