Success Story: गरीबी के बावजूद IIT-मुंबई में लिया दाखिला, गरीबों को दे रहा है नई ज़िंदगी

वे सिर्फ गरीब और नीची जाति के बच्चों को ही नहीं पढ़ा रहे, बल्कि उन्होंने कसारा में तीन गांवों को गोद ले रखा है. वे उन गांवों में बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाते हैं.

News18Hindi
Updated: August 26, 2019, 9:00 AM IST
Success Story: गरीबी के बावजूद IIT-मुंबई में लिया दाखिला, गरीबों को दे रहा है नई ज़िंदगी
बृजेश सरोज की सफलता की कहानी
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Updated: August 26, 2019, 9:00 AM IST
Success Story: न्यूज 18 हिंदी पर आपको हर दिन एक हस्ती की सक्सेस स्टोरी से रूबरू होने का मौका मिलता है. आज की स्टोरी उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के शख्स की है. जो IIT कर झुग्गी में रहने वालों बच्चों के लिए रौशनी बनकर उभरे. बृजेश सरोज ने समदर्शी फाउंडेशन संस्था की शुरुआत की. उनकी संस्था में सैकड़ों बच्चों का भविष्य परवान चढ़ रहा है. पढ़िए बृजेश सरोज की कहानी.

यूपी के प्रतापगढ़ के बृजेश के पिता सूरत में बुनकर हैं. पैसों के अभाव में उन्होंने छोटी उम्र से हीकाम किया. कभी होटल में, कभी टेंट वाले के यहां. 10वीं में उनके 92% 12वीं में 95% नंबर आए. पैसे जुटाकर आनंद कुमार की 'सुपर-30' जॉइन की. वहां से एक साल तैयारी कर आईआईटी मुंबई में सेलेक्ट हुए. संघर्ष यहां पूरा नहीं, बल्कि यहां से शुरू हुआ. अब बृजेश दाखिला लेने के लिए पैसे जुटाने थे.

अखिलेश यादव ने की थी मदद
बृजेश की कामयाबी को नेशनल कवरेज मिली. उनसे कई नेताओं ने सम्पर्क किया. उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनकी मदद की. जब उनका दाखिला हुआ तब उन्होंने ठाना वो अपने जैसे बच्चों की मदद करेंगे. जो उनके साथ हुआ, वो किसी और के साथ न हो. वे पिछले 3 साल से मुंबई में हैं. बृजेश को आमिर खान ने भी बुलाया और सहायता की.

तीन गांवों को लिया गोद
उन्होंने जो समदर्शी संस्था बनाई उसका मतलब है सब बराबर. उनके एनजीओ में हर जाति धर्म के बच्चे पढ़ने आते हैं. वहां पढ़कर उनका दाखिला सरकारी स्कूल में होता है. खुद कामयाबी की राह पर खड़े होकर संघर्ष करने वालों को मज़बूती से अपना हाथ थमाने की हिम्मत सबमें नहीं होती. लेकिन ब्रजेश ऐसा कर रहे हैं. वे सिर्फ गरीब और नीची जाति के बच्चों को ही नहीं पढ़ा रहे बल्कि उन्होंने कसारा में तीन गांवों को गोद ले रखा है. वे उन गांवों में बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाते हैं.

जिन गांवों को उन्होंने गोद ले रखा है वे गांव पहाड़ पर हैं. बृजेश ने वहां पम्पिंग की सुविधा मुहैया कराई. चक्की लगवाई. वे प्लेसमेंट लेकर सिर्फ अपना भविष्य और परिवार की दशा ही नहीं सुधारना चाहते. समाज की मदद करना चाहते हैं ताकि सरकार और सिस्टम पर जनता का भरोसा बना रहे. बृजेश की कोशिशों की वजह से बहुत से बच्चों को मुफ्त में शिक्षा मिल रही है. शुरुआत से बेहतर पढ़ाई होती तो आगे उनका दाखिला अच्छे संस्थान में हो सकेगा. आज वो अपने सपनों की मंजिल पाने में बस कुछ ही दूर हैं.
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First published: August 26, 2019, 4:42 AM IST
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