REET Exam की तारीख पर सियासी खींचतान, जैन समाज नाराज, कहा-महावीर जयंती के दिन परीक्षा क्यों?

25 अप्रेल को महावीर जयंती है. इस दिन सावर्जनिक अवकाश भी रहता है. जैन समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस दिन अवकाश होना चाहिये ना कि परीक्षा.

25 अप्रेल को महावीर जयंती है. इस दिन सावर्जनिक अवकाश भी रहता है. जैन समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस दिन अवकाश होना चाहिये ना कि परीक्षा.

REET Exam-2020: रीट भर्ती परीक्षा निर्धारिित समय पर होगी या नहीं, इस पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं. परीक्षा तिथि को लेकर जैन समाज (Jain society) ने आपत्ति जताई है. अब यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है.

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जयपुर. रीट भर्ती परीक्षा (REET Exam-2020) की तिथि को लेकर अब राजनीतिक खींचतान (Political pulling) भी शुरू हो गई है. सरकार ने 25 अप्रैल को परीक्षा कराने की तारीख घोषित की है, इस दिन महावीर जयंती होने के कारण जैन समाज ने अपना एतराज जताते हुए कहा है कि इस पर्व पर अवकाश होना चाहिए, ना कि परीक्षा. समाज ने परीक्षा तिथि बदलने की मांग की है. मामला विधानसभा में भी गूंज चुका है. दूसरी तरफ ज्यादातर बेरोजगार अभ्यर्थी परीक्षा को समय पर आयोजित करवाने के पक्ष में हैं. सरकार भी चाहती है, कि परीक्षाएं समय पर हों, राज्य के शिक्षा मंत्री का कहना है कि अभी तक परीक्षा तिथि में बदलाव को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है.

बता दें कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से रीट परीक्षा के लिये अब तक 13 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी आवेदन कर चुके हैं. आवेदन अभी लिए जा रहे हैं. 20 फरवरी तक बोर्ड आवेदन लेगा. लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परीक्षा की तिथि 25 अप्रेल की घोषित की थी. लेकिन परीक्षा तिथि की घोषणा के बाद से ही जैन समाज तिथि को लेकर अपना ऐतराज जता रहा है.

25 अप्रैल को महावीर जयंती है


दरअसल 25 अप्रैल को महावीर जयंती है. इस दिन सावर्जनिक अवकाश भी रहता है. जैन समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि इस दिन अवकाश होना चाहिये ना कि परीक्षा. क्योंकि समाज के अभ्यर्थी भी इस परीक्षा में शामिल होंगे. ऐसे में इस ओर ध्यान देना चाहिये. इस मामले में समाज ने राज्यपाल को भी अवगत कराया है. जैन समाज की इस मांग को हाल में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने भी पत्र लिखकर उठाया था. विधानसभा में भी मामले की गूंज सुनाई पड़ी. शून्यकाल में विधायक कालीचरण सराफ ने भी इस मामले पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए परीक्षा तिथि में बदलाव की मांग रखी है. समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस जयंती पर्व को दिनभर उत्सव की तरह मनाया जाता है. ऐसे में इस परीक्षा की तिथि बदली जानी चाहिए

बेरोजगार संघों की मांग परीक्षा पूर्व निर्धारित तिथि पर ही हो


वहीं बेरोजगार संघों ने परीक्षा को पूर्व निर्धारित तिथि पर ही करवाने की मांग की है. अभ्यर्थियों ने सरकार को कहा कि परीक्षा की तिथि को नहीं बदला जाना चाहिये. क्योंकि करीब 13 लाख बेरोजगार अभ्यर्थी इसका ब्रेसब्री से इंतजार कर रहे है. इसमें सभी जाति, धर्म और समुदायों के लोग शामिल होंगे. अभ्यर्थियों को डर है कि परीक्षा तिथि बदलने से इसका सीधा असर परीक्षा की तैयारियों पर पड़ेगा. दूसरी तरफ मामले में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा तिथि के बदलाव को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है.

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