कोविड में बढ़ी फिजिकल ट्रेनर्स की मांग, ऐसे बनाएं फिजिकल ट्रेनिंग में करियर

मल्टीनेशनल कंपनियों में भी रेगुलर बेसिस पर कर्मचारियों के लिए फिटनेस सेशंस आयोजित किए जाते हैं.

मल्टीनेशनल कंपनियों में भी रेगुलर बेसिस पर कर्मचारियों के लिए फिटनेस सेशंस आयोजित किए जाते हैं.

अगर आप फिटनेस ट्रेनर बनना चाहते हैं तो दिल्ली समेत देशभर के तमाम राज्यों में सरकारी और प्राइवेट इंस्टिट्यूट और यूनिवर्सिटीज 12वीं के बाद फिटनेस ट्रेनिंग में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स चलाते हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी (Covid-19) और लॉकडाउन (Lockdown) के चलते पिछले डेढ़ साल में सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के लोग अपनी सेहत (Health) और फिटनेस (Fitness) को लेकर काफी जागरूक हुए हैं. लोग पर्सनल सेशन या फिर ऑनलाइन सेशन के जरिए, कैसे भी खुद को फिट रखना चाहते हैं. इसके चलते इन दिनों फिजिकल ट्रेनर (Physical Trainer) की डिमांड (Demand) काफी बढ़ गई है. मौजूदा दौर की बात करें तो वर्तमान और भविष्य के लिहाज से फिजिकल ट्रेनर के तौर पर कैरियर की बेहतरीन संभावनाएं हैं.

कोविड दौर में वर्क फ्रॉम होम (Work from Home) के चलते सिटिंग जॉब का चलन बढ़ गया है. आपको लगातार 8-10 घंटे तक एक जगह बैठकर काम करना होता है. इस व्यस्तता के चलते आप हैल्थी डाइट (Diet) भी नहीं ले पाते. ऐसे में आपको एक अच्छे फिटनेस ट्रेनर की जरूरत होती है, जो आपको आपकी सेहत के अनुसार व्यायाम (Exercise) की जानकारी देने के साथ अलग-अलग हैल्थी डाइट की जानकारी भी दे सके. ये आपको नजे सिर्फ तनाव (Stress) से मुक्ति दिलाते हैं, बल्कि आपके शरीर को सही आकार में भी लाते हैं. चलिए जानते हैं फिटनेस ट्रेनर के तौर पर कैरियर के विकल्प:

महामारी में एकदम बढ़ी मांग:

कोरोना महामारी के इस दौर में फिटनेस इंडस्ट्री एकदम से डिमांड में है. चूंकि लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम कल्चर के चलते ज्यादातर लोग घरों पर ही हैं, इसलिए वे फिटनेस के लिए ऑनलाइन सेशंस का सहारा ले रहे हैं. वैसे जिम, हेल्थ क्लब, स्पोर्ट्स क्लब और फिटनेस सेंटर्स में हमेशा फिटनेस ट्रेनर्स की डिमांड रहती है. यहाँ तक कि मल्टीनेशनल कंपनियों में भी रेगुलर बेसिस पर कर्मचारियों के लिए फिटनेस सेशंस आयोजित किए जाते हैं. लॉकडाउन खुलने के बाद जिम फिर खुलेंगे और वहां फिटनेस ट्रेनर की आवश्यकता जरूर होगी.
फिटनेस ट्रेनर की जिम्मेदारी:

एक फिटनेस ट्रेनर के तौर पर आपको फिजिकल फिटनेस के साथ एरोबिक्स (Aerobics), स्ट्रेचिंग (Stretching), फ्लेक्सिबिलिटी ट्रेनिंग, न्यूट्रिशन आदि की ट्रेनिंग से जुड़ी सभी तकनीकों की जानकारी होना जरूरी होता है. एक फिटनेस ट्रेनर के रोल इस तरह होते हैं:

-अगर आप योगा और नेचुरोपैथी के जानकार हैं तो आप व्यायाम से रोग मुक्त रहना सिखाते हैं.



-खेलों में खिलाड़ियों का स्टेमिना बढ़ाने के लिए जरूरी व्यायामों पर जोर देते हैं.

-एरोबिक्स इंस्ट्रक्टर के तौर पर एरोबिक्स, मसल्स एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग पर ध्यान देते हैं.

कहाँ से करें कोर्स:

अगर आप फिटनेस ट्रेनर बनना चाहते हैं तो दिल्ली समेत देशभर के तमाम राज्यों में सरकारी और प्राइवेट इंस्टिट्यूट और यूनिवर्सिटीज 12वीं के बाद फिटनेस ट्रेनिंग में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स चलाते हैं. इनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी का इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज, गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन, साई एन एस साउथ सेंटर, बेंगलुरु आदि प्रमुख संस्थान हैं.

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