CBSE और CISCE बोर्ड 50 फीसदी तक कम कर सकते हैं सिलेबस, बन रही है योजना

सीबीएसई सिलेबस को कम करने पर विचार कर रही है.
सीबीएसई सिलेबस को कम करने पर विचार कर रही है.

CBSE, CISCE और अन्य बोर्डों ने जुलाई 2020 में पहले से ही सिलैबस को 25 से 30 फीसदी तक कम कर दिया है. स्कूल बंद हैं और ऑनलाइन क्लासें ही चल रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 6:36 PM IST
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नई दिल्ली. केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और भारतीय स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा परिषद (CISCE) ने कोरोना वायरस के कारण आगामी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में पचास फीसदी कटौती करने का सोचा है. सेशन अभी शुरू नहीं हुआ है और परीक्षा का समय भी जल्दी आ जाएगा इसलिए पाठ्यक्रम को छोटा करने का विकल्प देखा जा रहा है. इसके अलावा अकादमिक वर्ष बढ़ाने और परीक्षा को 45 से 60 दिन आगे खिसकाने पर भी विचार किया जा रहा है.

CBSE, CISCE और अन्य बोर्डों ने जुलाई 2020 में पहले से ही सिलैबस को 25 से 30 फीसदी तक कम कर दिया है. स्कूल बंद हैं और ऑनलाइन क्लासें ही चल रही हैं. हालांकि 15 अक्टूबर से स्कूलों को खोलने का अधिकार राज्यों को है लेकिन उस दौरान उपस्थिति की अनिवार्यता नहीं होगी. कई राज्यों ने स्कूल नहीं खोलने का फैसला भी लिया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ सीबीएसई प्रवक्ता ने कहा है कि जुलाई में 30 फीसदी पाठ्यक्रम कम करने के बाद साधारण रूप से क्लासें नहीं चली हैं. इस तरह स्थिति रहेगी तो बोर्ड परीक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम में और कमी की जा सकती है. बोर्ड जल्दी ही निर्णय लेगा कि 70 फीसदी या 50 फीसदी पाठ्यक्रम कटौती पर परीक्षा करानी है या नहीं.



CBSE 2021 में होने वाली परीक्षाओं को अप्रैल तक के लिए टाल सकती है, तब तक रेगुलर क्लासें लेने का कोई प्रावधान हो जाए, उसके बाद परीक्षा का आयोजन किया जा सकता है. 10वीं और 12 वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए सीबीएसई ने कम पाठ्यक्रम के आधार पर सैम्पल टेस्ट पेपर भी रिलीज किये हैं.
CISCE के मुख्य कार्यकरी गेरी आथर्टन ने भी कुछ इसी तरह की बात की और कहा कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए बोर्ड परीक्षा पाठ्यक्रम में कटौती की सम्भावना है. अभी यह नहीं बताया जा सकता कि इसमें कितनी कटौती की जा सकती है.

CBSE और CISCE दोनों वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद ही पाठ्यक्रम में कटौती या बोर्ड परीक्षाओं को आगे खिसकाने का निर्णय लेंगे. कोरोना वायरस के कारणों नियमित क्लासों में काफी व्यवधान पिछले कुछ महीनों से चल रहा है. ऑनलाइन क्लासें ही फिलहाल चल रही हैं. शारीरिक क्लासों की कमी अब तक नहीं दिखी. ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन क्लासें चुनौती थी लेकिन वहां भी ऐसा संभव हो पा रहा है.

हालांकि परीक्षाओं में दो महीने की देरी से पूरी प्रक्रिया पर ही असर पड़ेगा. हालाँकि बोर्ड परीक्षाओं में देरी या पाठयक्रम में कटौती, दोनों ही निणर्य शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार ही लिए जाएँगे.
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