CBSE Board दिलचस्प खबर : चीन के साथ 1962 में चल रहा था युद्ध, जानिए तब क्या हुआ था सीबीएसई बोर्ड के साथ

CBSE Board दिलचस्प खबर : चीन के साथ 1962 में चल रहा था युद्ध, जानिए तब क्या हुआ था सीबीएसई बोर्ड के साथ
सीबीएसई बोर्ड की दसवीं के नतीजों का ऐलान जल्द किया जाएगा.

CBSE 10th, 12th Result: बॉर्डर पर चल रही इस लड़ाई के बीच कहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार करने की भारत सरकार लगातार कोशिश कर रही थी.

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नई दिल्ली. बात 1962 की है जब भारत और चीन के बीच युद्ध (India-China 1961 War) शुरू हो गया था. दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चे पर आ गए थे. पूरा विश्व लगभग दो भागों में बंट गया था. रूस और अमेरिका उस वक्त दो ध्रुव थे. हालांकि, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उस वक्त किसी भी गुट का हिस्सा बनने के बजाय गुट निरपेक्ष आंदोलन शुरू किया था. वे गुट निरपेक्ष देशों के संगठन की अगुवाई कर रहे थे. हालांकि भारत ने 50 के दशक में आखिर में सोवियत संघ (अब रूस) से मिग विमानों की खरीद करके अमेरिका और ब्रिटेन को नाराज़ कर दिया था. लेकिन फिर भी इस युद्ध में अमेरिका ने भारत का साथ दिया. हालांकि, रूस ने भारत के साथ मित्रता निभाने का वादा करके भी तटस्थता की नीति अपनाई और न ही उसने चीन का साथ दिया, न ही भारत का.

खैर..., बॉर्डर पर चल रही इस लड़ाई के बीच कहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार करने की भारत सरकार लगातार कोशिश कर रही थी. क्योंकि, यह बात बिल्कुल साफ थी कि बिना शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के हम भले ही सीमा पर लड़ाई जीत जाएं लेकिन देश के अंदर की लड़ाई हार जाएंगे. उस वक्त भारत में शिक्षा का स्तर काफी नीचे था. लेकिन सरकार ने भी गरीबी और अशिक्षा के खिलाफ लड़ने के लिए कमर कस रखी थी. जहां एक तरफ हम कूटनीतिक मसलों को हल करने की कोशिश कर रहे थे वहीं पूरे देश में शिक्षा को प्रोन्नत बनाने में भी लगे हुए थे.

1952 में हुई सीबीएसई की स्थापना
इसी कड़ी में देश में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की स्थापना हुई. देश में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और पाठ्यक्रम के एकीकरण को लेकर 1952 में सीबीएसई की स्थापना की गई थी. सीबीएसई की स्थापना के समय इसका कार्यक्षेत्र बहुत विस्तृत नहीं था. बाद में 1962 में इसके कार्यक्षेत्र में विस्तार किया गया और भारत-चीन युद्ध के वक्त इसे पुनर्गठित किया गया. और तब से लेकर अब तक लगातार इसके कार्यक्षेत्र में विस्तार होता रहा है. वर्तमान समय में न सिर्फ पूरे देश में बल्कि दुनिया के 21 देशों में सीबीएसई बोर्ड फैला हुआ है. दुनिया के 21 देशों में करीब 141 स्कूल इससे संबंद्ध हैं.
क्या है इतिहास


देश में सबसे पहले 1921 में शिक्षा बोर्ड की स्थापना हुई थी, जिसका नाम था 'यूपी बोर्ड ऑफ हाईस्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन'. इसका कार्यक्षेत्र राजपूताना, मध्य भारत और ग्वालियर था. इसके बाद 1929 में तत्कालीन भारत सरकार ने एक संयुक्त बोर्ड बनाने की सिफारिश की जिसका नाम 'बोर्ड ऑफ हाईस्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन', राजपूताना रखा गया. इसके अन्तर्गत अजमेर, मेरवाड़ा, मध्य भारत और ग्वालियर का क्षेत्र आता था. समय के साथ इसका विस्तार होता रहा, लेकिन बाद में राज्यों के अलग बोर्ड बनने और राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना के साथ ही इसका क्षेत्र धीरे-धीरे घटता गया. जिसकी वजह से सरकार ने 1952 में बोर्ड के संविधान में संशोधन करके इसका प्रसार 'सी' और 'डी' क्षेत्रों पर कर दिया और इसका नाम बदलकर 'केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड' यानी 'सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन', सीबीएसई कर दिया. बाद में 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय इसका पुनर्गठन किया गया.

...जब दिल्ली बोर्ड बन गया था सीबीएसई का हिस्सा
पुनर्गठन के तहत 'दिल्ली बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन' को सेंट्रल बोर्ड के साथ मर्ज कर दिया गया. इसलिए उस वक्त दिल्ली बोर्ड से संबद्ध सारे स्कूल सेंट्रल बोर्ड का हिस्सा हो गए. इसके बाद चंड़ीगढ़ संघ शासित प्रदेश, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के स्कूलों को भी सेंट्रल बोर्ड से संबद्ध कर दिया गया.

सरकार से पैसे नहीं लेता है सीबीएसई बोर्ड
सीबीएसई बोर्ड अपने खर्चे खुद उठाता है. यह भारत सरकार से किसी भी तरह का खर्च नहीं लेता. बोर्ड अपनी सारी वित्तीय ज़रूरतों को ऐनुअल फीस चार्जेज़, संबंद्धता शुल्क, एडमिशन फीस, कई प्रवेश परीक्षाओं के आवेदन शुल्क और बोर्ड पब्लिकेशन इत्यादि से पूरा करता है.

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पूरी दुनिया में सीबीएसई के करीब 20 हज़ार से ज्यादा स्कूल हैं. सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में एक जैसी शिक्षा दी जाती है जिससे ट्रांसफेरेबल ज़ॉब वाले लोगों को मिड-सेशन में ट्रांसफर होने पर भी बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं होता. हर साल सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा में लाखों छात्र भाग लेते हैं.
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