AI की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी में CBSE, लेकिन क्या भारतीय स्कूल इसके लिए तैयार हैं?

एक बार पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद आठवीं, नौवीं और दसवीं कक्षा के स्टूडेंट्स आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस विषय को विकल्प के रूप में चुन सकेंगे.

News18Hindi
Updated: January 15, 2019, 2:03 PM IST
AI की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी में CBSE, लेकिन क्या भारतीय स्कूल इसके लिए तैयार हैं?
सांकेतिक तस्वीर
News18Hindi
Updated: January 15, 2019, 2:03 PM IST
राखी बोस

सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स जल्द ही वैकल्पिक विषय के रूप में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (एआई) की पढ़ाई करेंगे. पिछले एक दशक में जिस तरह रोजमर्रा की जिंदगी में इसका प्रभाव बढ़ रहा है, इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि संस्थाएं लोगों को एसआई के लिए ट्रेनिंग दे रही हैं और उन्हें इसमें निपुण बनाने की कोशिश कर रही हैं.

हालांकि अभी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा स्कूलों में एआई की पढ़ाई शुरू करवाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. लेकिन सीबीएसई से जुड़े एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि ऐसा करना बोर्ड के एजेंडा में शामिल है. पहचान जाहिर न करने की शर्त पर सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'ये एक उभरता हुआ क्षेत्र है और वैश्विक स्तर पर भी काफी जरूरी है. अमेरिकी स्कूलों में भी एआई की पढ़ाई हो रही है'.



एक बार पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद आठवीं, नौवीं और दसवीं कक्षा के स्टूडेंट्स इस विषय को विकल्प के रूप में चुन सकेंगे. 2018 भारत में एसआई के रिसर्च और जॉब सेक्टर के रूप में विकास के तौर पर काफी महत्वपूर्ण साल रहा है. जॉब सर्च साइट 'इनडीड' के अनुसार एआई से जुड़ी नौकरियों की तलाश करने वालों में 179 फीसदी का इजाफा हुआ है.

नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने एआई के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार की है जिससे इस विषय पर भारत को दुनिया के बाकी देशों से बढ़त मिल सके. इसके अलावा इस क्षेत्र में आगे रिसर्च और सहयोग के लिए #AIforAll पहल भी शुरू की गई है. एआई के अध्ययन ने भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका और चीन के बाद तीसरे बड़े कौशल के रूप में उभारा है.



कौन पढ़ाएगा AI
Loading...

लेकिन बड़ी बात ये है कि क्या भारतीय स्कूल सिस्टम भारत के बच्चों को उस स्तर की विशेज्ञता देने में सक्षम है जिसकी जरूरत इस विषय के लिए है. सीबीएसई इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल कर सकता है लेकिन ये स्कूलों पर होगा कि वे स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक उपलब्ध करवा सकें.

बंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के प्रोफेसर गौतम आर देसीराजु बताते हैं, 'सबसे पहले तो हमें इस विचार को मिटाने की जरूरत है कि केवल इंसान सोच सकते हैं, कंप्यूटर नहीं. एआई का यही आधार है कि मशीन कैसे सोचता है और ये समझना होगा कि कैसे इंसानों की जरूरतों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.' प्रोफेसर ने आगे कहा, 'इसके लिए हमें कंप्यूटर की कक्षाओं को फिर से देखना होगा और स्टूडेंट्स को ये समझाना होगा कि कंप्यूटर क्या कर सकते हैं और क्या नहीं. इस समय तो कई स्कूलों में कंप्यूटर फैकल्टी भी अच्छी नहीं है.'

वहीं हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) के पूर्व इंजीनियर जर्मिया ऑन्गलु इस बात से बिलकुल इत्तेफाक नहीं रखते. उनका कहना है कि देश के अधिकतर स्कूलों में फिजिक्स और कैमेस्ट्री के प्रैक्टिकल के लिए भी पर्याप्त संसाधन नहीं है. यहां तक कि कंप्यूटर कक्षाएं भी एक मजाक बनकर रह गई हैं. केवल ऐसे स्कूल एआई की पढ़ाई करवाने के लिए सक्षम हैं, जहां एआई की पर्याप्त टेक्नॉलजी और मशीनरी मौजूद है. ये एक प्रैक्टिकल सबजेक्ट है और केवल थ्योरी की पढ़ाई करवाना ही काफी नहीं है.



हालांकि सीबीएसई ने औपचारिक रूप से ऐसी कोई घोषणा अभी तक नहीं की है, लेकिन न्यूज 18 को सूत्रों ने बताया कि एआई के पाठ्यक्रम के बारे में सीबीएसई महकमे में चर्चा चल रही है. भारत एआई लैब की स्थापना के लिहाज से भी अमेरिका की सिलिकॉन वैली और चीन के मुकाबले काफी पीछे है.

ऑटोमेशन की इतनी ज्यादा मांग के बावजूद भारत के आधा से ज्यादा कॉलेजों में एआई का कोई नया कोर्स नहीं चल रहा. पिछले साल जून में टेक महिंद्रा के सीईओ सीपी गुरनानी ने टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि भारत के 94 फीसदी आईटी ग्रेजुएट हायरिंग के योग्य नहीं हैं.

करियर और जॉब्स से जुड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...