मैसूर विश्वविद्यालय शताब्दी दीक्षांत समारोह: PM मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए किया संबोधित

pm ने कहा, पूरी शिक्षा व्यवस्था में मौलिक बदलाव लाने वाला एक बहुत बड़ा अभियान है.
pm ने कहा, पूरी शिक्षा व्यवस्था में मौलिक बदलाव लाने वाला एक बहुत बड़ा अभियान है.

मैसूर विश्वविद्यालय की स्थापना 27 जुलाई, 1916 को हुई थी. विश्वविद्यालय की स्थापना तत्कालीन मैसूर रियासत के दूरदर्शी महाराजा, नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार और तत्कालीन दीवान सर एम.वी. विश्वेश्वरैया ने की थी.

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  • Last Updated: October 19, 2020, 4:02 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मैसूर विश्वविद्यालय के शताब्दी दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. कर्नाटक के राज्यपाल और अन्य गणमान्य लोग विद्वत परिषद, सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और अन्य अधिकारियों के साथ इस मौके पर छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ डिजिटल रूप से मौजूद रहे. मैसूर विश्वविद्यालय की 1916 में स्थापना की गई थी. यह देश का छठा और कर्नाटक का पहला विश्वविद्यालय था.

 देश में चौतरफा सुधार हो रहे हैं
दीक्षांत समारोह को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे देश में चौतरफा सुधार हो रहे हैं, इतने सुधार पहले कभी नहीं हुए. शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए लाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, मजदूरों के लिए लाए गए श्रम सुधार सहित अन्य सुधारों की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि ये सुधार इसलिए किए जा रहे है ताकि यह दशक भारत का दशक बने.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से देश के शिक्षा क्षेत्र का भविष्य सुनिश्चित
उन्होंने कहा, ‘‘अगर राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश के शिक्षा क्षेत्र का भविष्य सुनिश्चित कर रही है, तो ये युवाओं को भी सशक्त कर रही है. अगर खेती से जुड़े सुधार किसानों को सशक्त कर रहे हैं, तो श्रम सुधार मजदूरों और उद्योगों दोनों को विकास और सुरक्षा दे रहे हैं.’’



प्री नर्सरी से लेकर पीएचडी तक
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के फायदों के बारे में छात्रों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा यह ‘‘प्री नर्सरी से लेकर पीएचडी’’ तक देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में मौलिक बदलाव लाने वाला एक बहुत बड़ा अभियान है.

देश को उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में स्थापित करने का हर स्तर पर प्रयास
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीत छह सालों में देश को उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में स्थापित करने का हर स्तर पर प्रयास हो रहा है. इसी को ध्यान में ध्यान में रखते हुए देश में प्रबंधन, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संस्थानों और उनमें सीटों की संख्या बढ़ाई गई है.

इन नए संस्थानों की हुई स्थापना
उन्होंने कहा कि छह सालों के भीतर सात नए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), 15 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), हर साल एक नया भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और 16 नए भारतीय सूचना और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) की स्थापना की गई है.

इन संस्थाओं के प्रशासन में सुधार 
प्रधानमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रयास सिर्फ नए संस्थान खोलने तक ही सीमित नहीं है. इन संस्थाओं के प्रशासन में सुधार से लेकर लैंगिक और सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी काम किया गया है. इन संस्थानों को ज्यादा अधिकार भी दिए गए हैं और इनमें पारदर्शिता भी लाई गई है.

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मैसूर विश्वविद्यालय की स्थापना
ज्ञात हो कि मैसूर विश्वविद्यालय की स्थापना 27 जुलाई, 1916 को हुई थी. विश्वविद्यालय की स्थापना तत्कालीन मैसूर रियासत के दूरदर्शी महाराजा, नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार और तत्कालीन दीवान सर एम.वी. विश्वेश्वरैया ने की थी.
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