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चंद्रयान 2 मिशन: जानिए ISRO से जुड़ने के तरीके और वहां काम करने के लिए योग्यता

इसरो के वैज्ञानिकों ने मिशन मून (Mission Moon) में लैंडिंग की जिस तरह से तैयारी की थी, उस तरह से हो नहीं पाई.

इसरो के वैज्ञानिकों ने मिशन मून (Mission Moon) में लैंडिंग की जिस तरह से तैयारी की थी, उस तरह से हो नहीं पाई.

अगर आप भी ISRO के साथ काम करना चाहते हैं, तो जानिए वहां पहुंचने के लिए योग्यता और काम सीखने के अवसर क्या हैं.

  • News18Hindi
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    चंद्रयान 2 मिशन: भारत के मिशन चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) में आखिरी वक्त पर दिक्कत आ गई. जब लैंडर चंद्रमा (moon) की सतह से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर था, उसका संपर्क धरती के कंट्रोल रूम से टूट गया. अगर आप भी ISRO के साथ काम करना चाहते हैं, तो जानिए वहां पहुंचने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए. वहां होने वाला काम सीखने के अवसर क्या हैं. इसरो भी अब नासा की तरह स्टूडेंट्स के लिए इंटर्नशिप्स, फेलोशिप्स आयोजित करता है. इसरो की ओर से अंतरिक्ष को जानने और समझने के लिए स्कूल स्टूडेंट्स के लिए ट्रेनिंग का आयोजन किया जाता है.

    -स्कूल लेवल के स्टूडेंट्स के लिए इसरो ने सैटेलाइट व लॉन्च पैड विजिट की अनुमति दे दी है. इससे पहले ये सुविधा प्रतिबंधित थी. इसरों इसरो में साइंटिस्ट या इंजीनियर बनने के लिए स्टूडेंट्स को 12th में मैथ्स और फिजिक्स मजबूत करने होंगे. 12th के बाद डिपार्टमेंट ऑफ साइंस के जरिए इसरो के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IISc) में दाखिला लें.

    -यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम के जरिए इसरो इसी साल से देश के स्कूल स्टूडेंट्स को अपने सेंटर्स पर सैटेलाइट्स बनाने की प्रक्रिया सिखा रहा है.

    -कॉलेज लेवल के स्टूडेंट्स के लिए इसरो IIT, NIT और इसी तरह के और भी सरकारी और निजी संस्थानों से ग्रेजुएट, पोस्ट-ग्रेजुएट्स स्टूडेंट्स का चयन करता है. इन इंस्टीट्यूट से पढ़ रहे जिन स्टूडेंट्स के पास एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, रेडियो इंजीनियरिंग या इंजीनियरिंग फिजिक्स की डिग्री हो तो शॉर्टलिस्ट होने की संभावनाएं अधिक रहती हैं.

    -इसरो इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स, डेवलपर्स और सिविल इंजीनियर्स की भी नियुक्ति करता है.

    -डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के अंतर्गत कई ऐसे केंद्रों में इंटर्नशिप्स करके भी इसरो से जुड़ सकते हैं. ये इंटर्नशिप्स एस्ट्रोनॉमी, रडार, डिजिटल सिस्टम क्षेत्रों में उपलब्ध होती है. इसके जरिए रिमोट सेंसिंग व जियोइंफॉर्मेटिक्स जमें ट्रेनिंग भी पा सकते हैं.

    -इसरो में जूनियर रिसर्च फेलो बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए इंटरव्यू होता है. सेलेक्शन के बाद रिसर्च करने का अवसर मिल सकता है. इस फेलोशिप के लिए स्टूडेंट्स को पोस्टग्रेजुएट डिग्री और नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट पास हो.

    -बीटेक, बीई की डिग्री वाले भी सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड (आईसीआरबी) की ओर से आयोजित होने जाने एग्जाम के जरिए नौकरी पा सकते हैं. इसके लिए बीई या बीटेक में 65 प्रतिशत अंक हो. एग्जाम के पहले चरण में लिखित परीक्षा होगी. दूसरे चरण में पर्सनल इंटरव्यू होगा. सफल होने के बाद इसरो में जूनियर साइंटिस्ट या जूनियर इंजीनियर की नौकरी पा सकते हैं.

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