इस क्विज कॉम्पिटिशन को जीतने वाले बच्चे ISRO से देखेंगे चांद पर लाइव लैंडिंग

चंद्रयान-2 को इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने 22 जुलाई दोपहर 2.43 बजे लांच किया था. चंद्रयान-2, 7 सितंबर को चांद पर पहुंचेगा.

News18Hindi
Updated: July 28, 2019, 7:43 PM IST
इस क्विज कॉम्पिटिशन को जीतने वाले बच्चे ISRO से देखेंगे चांद पर लाइव लैंडिंग
क्विज में चंद्रयान 2 से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे.
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Updated: July 28, 2019, 7:43 PM IST
विज्ञान के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए क्विज कॉम्पिटिशन कराए जाएंगे. इस क्विज में विद्यार्थियों से विज्ञान से जुड़े सवालों में चंद्रयान 2 से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे. जो स्टूडेंट्स इसमें पास होंगे वे श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र जाएंगे. ये जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कही.

सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र जाकर विद्यार्थी चंद्रयान 2 की चंद्रमा की सतह पर लैडिंग को देखेंगे. ये उन विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर है जो विज्ञान में रुचि रखते हैं. क्विज की जानकारी MyGov ऐप पर 1 अगस्त को दी जाएगी. पीएम ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स इस क्विज में हिस्सा लें. स्टाफ से आग्रह किया वह अपने स्कूल के सभी विद्यार्थियों को इसमें जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करें.

इस क्विज में हर राज्य से जीते बच्चों की लिस्टिंग की जाएगी. हर राज्य से सबसे नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स भारत सरकार के खर्च पर श्रीहरिकोटा जाएंगे. सितंबर में जब चंद्रयान 2 चंद्रमा की सतह पर लैंड करेगा तब वे छात्र उसकी लैंडिंग देखने का मौका पा सकेंगे.

चंद्रयान-2 को इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से 22 जुलाई दोपहर 2.43 बजे लांच किया था. चंद्रयान-2, 7 सितंबर को चांद पर पहुंचेगा. चंद्रयान -2 फिलहाल पृथ्वी की ऑर्बिट में है, जहां वह चंद्रमा की सात-दिवसीय यात्रा करने से पहले कक्षा में घूम रहा है. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 का रोवर उतरने पर वहां पानी की मौजूदगी के बारे में चौंकाने वाली और काफी अहम जानकारी मिल सकती है. दरअसल, ताजा अध्ययनों में यह पता चला है कि इस क्षेत्र में पहले के अनुमानों से कहीं अधिक मात्रा में पानी बर्फ के रूप में हो सकता है.

चंद्रयान-1 के जरिए चंद्रमा की सतह पर पानी की मौजूदगी का साक्ष्य सबसे पहले जुटाने वाले इसरो की योजना अब नये मिशन के जरिये वहां जल की उपलब्धता के वितरण और उसकी मात्रा की माप कर उन प्रयोगों को आगे बढ़ाने की है. चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव काफी ठंडा और काफी संख्या में विशाल गड्ढों (क्रेटर) वाला है. दरअसल, क्रेटर कटोरे जैसी आकृति वाला एक विशाल गड्ढा होता है जो उल्का पिंड के टकराने, ज्वालामुखीय गतिविधि या विस्फोट के प्रभाव से बनता है.

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First published: July 28, 2019, 7:43 PM IST
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