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Children's Day 2019: बैरिस्टर बनने गए जवाहरलाल नेहरू राजनीति में कैसे आए, जानें कितने पढ़े-लिखे थे वो

Children's Day 2019: बैरिस्टर बनने गए जवाहरलाल नेहरू राजनीति में कैसे आए, जानें कितने पढ़े-लिखे थे वो

1912 में भारत लौटने के बाद, नेहरू ने खुद को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया था.

1912 में भारत लौटने के बाद, नेहरू ने खुद को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया था.

1912 में भारत लौटने के बाद, नेहरू ने खुद को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया था.

    14 नवंबर को हर साल हमारे देश में बाल दिवस मनाते हैं. 1964 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद सर्वसहमति से ये फैसला लिया गया कि जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के तौर पर माना जाए. भारत में 14 नवंबर को स्कूलों में तरह-तरह की मजेदार गतिविधियां, फैंसी ड्रेस कॉम्पटीशन और मेलों का आयोजन होता है. बाल दिवस के खास मौके पर जानते हैं पंडित नेहरू की एजुकेशन के बारे में.

    पंडित नेहरू की एजुकेशन-
    मोतीलाल नेहरू और स्वरूप रानी नेहरू के बेटे जवाहरलाल नेहरू की शुरुआती पढ़ाई घर पर ही हुई. उनके पिता ने उन्हें private governesses और ट्यूटर्स की मदद से घर पर ही पढ़ाया. एक ट्यूटर, फर्डिनेंड टी ब्रुक्स के प्रभाव में वह विज्ञान और थियोसोफी में रुचि रखने लगे थे. फिर 1905 में इंग्लैंड के प्रमुख स्कूल हैरो से उनकी संस्थागत स्कूली शिक्षा शुरू हुई.

    अक्टूबर 1907 में वे ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज (Trinity College, Cambridge) गए और 1910 में natural science में ऑनर्स की डिग्री हासिल की. इसी दौरान उन्होंने पॉलिटिक्स, इकोनॉमिक्स, इतिहास और literature desultorily को भी पढ़ा. इसी दौरान उनकी राजनीतिक और आर्थिक समझ बेहतर हुई.

    1910 में डिग्री पूरी करने के बाद, नेहरू लंदन चले गए और इनर टेम्पल (Inner Temple) में कानून की पढ़ाई की. अगस्त 1912 में भारत लौटने के बाद, नेहरू ने खुद को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया और बतौर बैरिस्टर काम करने कोशिश की. लेकिन, अपने पिता के विपरीत, उन्होंने अपने पेशे में कम दिलचस्पी दिखाई और राष्ट्रीय राजनीति में रुचि लेने लगे. राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भागीदारी ने धीरे-धीरे उनके कानूनी व्यवहार की जगह ले ली थी. दरअसल नेहरू ने एक छात्र और बैरिस्टर के रूप में ब्रिटेन में ही भारतीय राजनीति में रुचि विकसित की थी.

    बाल दिवस पर बच्चों से जुड़ी कुछ कोटेशन-
    -हम बच्चों को सिखाते हैं कि जीवन कैसे जिएं. हमारे बच्चे हमें बताते हैं कि जीवन किस लिए जिएं.
    -बच्चे क्या बनेंगे तय करते-करते हम भूल जाते हैं कि वो आज भी कुछ हैं.
    -बच्चों को प्यार की सबसे ज्यादा जरूरत तब होती है जब वो इसे न पाने वाले काम कर रहे हों.
    -किसी समाज की गंभीरता को देखने के लिए देखना चाहिए कि उस समाज में बच्चों का जीवन कैसा है.

    बता दें कि आजाद भारत में हमेशा से बाल दिवस 14 नवंबर को नहीं मनाया जाता था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 नवंबर को बाल दिवस मनाने की परंपरा है. यूनाइटेड नेशंस के इंटरनेशनल चिल्ड्रन्स डे को एक समय तक बाल दिवस के तौर पर मनाया जाता था. संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1954 में शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में बच्चों की अच्छी परवरिश को बढ़ावा देना है.

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    Tags: Jawaharlal Nehru

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