Success Tips: क्‍या आप भी बनना चाहते हैं IAS अध‍िकारी तो जानें क्‍या है पहली जरूरत

अगर आप IAS अध‍िकारी बनना चाहते हैं तो इसकी तैयारी की शुरुआत कैसे और कहां से करें, जान‍िये

डॉ. विजय अग्रवाल | News18Hindi
Updated: August 15, 2019, 7:55 PM IST
Success Tips: क्‍या आप भी बनना चाहते हैं IAS अध‍िकारी तो जानें क्‍या है पहली जरूरत
अगर आप IAS अध‍िकारी बनना चाहते हैं तो इसकी तैयारी की शुरुआत कैसे और कहां से करें, जान‍िये
डॉ. विजय अग्रवाल | News18Hindi
Updated: August 15, 2019, 7:55 PM IST
यह एक सामान्य सा, बहुत ही सरल और व्यावहारिक वैज्ञानिक फॉर्मूला है कि यदि आपको कोई बड़ा काम करना है, तो इसके लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है. इस जरूरत में दो ऊर्जाएं मुख्य होती हैं- एक शारीरिक ऊर्जा तथा दूसरी मानसिक ऊर्जा. मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि यदि आपने IAS बनने का फैसला किया है, तो यह एक बहुत बड़ा काम करने का फैसला है. यह सरकारी तंत्र में प्रवेश करने का सबसे ऊपर का स्तर है. इसके लिए प्रतियोगी परीक्षा की जो प्रणाली तैयार की गई है, वह इस परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक बना देती है. यदि लगभग 12 लाख युवाओं में से केवल एक हजार को सफल होना हो, तो कठिनता का अंदाजा इन आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है.

मानसिक क्षमता के साथ शारीर‍िक ऊर्जा भी जरूरी:
जाहिर है कि यह एक कठिन और बड़ा ही नहीं, बल्कि बेहद कठिन और बहुत बड़ा काम है. इसलिए इसके बारे में अंतिम निर्णय लेने से पहले आपको जायजा इस बात का लेना चाहिए कि इसके लायक शारीरिक और मानसिक ऊर्जा आपके पास है या नहीं. यह बात मुझे इसलिए बतानी पड़ रही है, क्योंकि लाखों अबोध-अनजान युवा इस IAS के ग्लैमर में आकर, जो बहुत स्वाभाविक है, इसकी तैयारी में लग जाते हैं. काफी समय तक लगे रहते हैं, लेकिन अंत तक उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हो पाता. तो इसे आप खुद के मूल्यांकन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कसौटी कह सकते हैं.आइए, इसे हम व्यावहारिक स्तर पर जानें.

शारीरिक ऊर्जा का संबंध यहां बहुत अच्छे स्वास्थ्य तथा इस बात से नहीं है कि आप एक बार में कितने दंड-बैठक लगा सकते हैं. न ही इसका कोई संबंध आपकी भुजाओं के मसल्स तथा पेट के एब्स से है.

स्वास्थ्य के स्तर पर यह परीक्षा आपसे केवल दो बातों की मांग करती है. पहला यह कि आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ठीक-ठाक हो. यानी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको बीमार करने के लिए दोयम दर्जे का छोटा सा जीवाणु या जीवन-पद्धति में आया थोड़ा सा बदलाव पर्याप्त है. इस परीक्षा की तैयारी के लिए एक ठीक-ठाक स्वास्थ्य की अपेक्षा इसलिए की जाती है, क्योंकि इसकी तैयारी एक लम्बे वक्त की मांग करती है. यह ‘लम्बा वक्त‘ जहां दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ है, वहीं वर्ष से भी. यानी यह एक मैराथन दौड़ है. क्या आपके पास इस दूरी को पूरा करने की शारीरिक ऊर्जा है, वह भी दौड़ते हुए? बीच में रुककर सुस्ताने की गुंजाइश नहीं है.

जहां तक मानसिक ऊर्जा का सवाल है, यह मुख्यतः तीन बातों से जुड़ी हुई है. पहला यह कि आपको हताश और निराश करने के लिए बाहरी किन परिस्थितियों और कितनी मेहनत की जरूरत होगी. यानी आप अपने उद्देश्य के प्रति मानसिक रूप से कितने मजबूत हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने थोड़ा सा इसके खिलाफ बोल दिया, या किसी की असफलता की बात सुन ली, और आप हथियार डाल कर बैठ गए. आप बड़ा काम करने जा रहे है. काम जितना बड़ा होगा, उसमें सफल होने की संभावना उतनी ही कम होगी. इसलिए जब लोग आपकी सफलता पर अपना संदेह व्यक्त करेंगे, तो उनके संदेह के सच होने की उम्मीद ज्यादा होगी. क्या आप इस नकारात्मक वातावरण से स्वयं को अप्रभावित रख पाएंगे?

इस परीक्षा के तीन स्तर होते हैं. इन तीनों स्तरों को आपको एक ही साथ पार करना होता है. ज्यादातर यही होता है कि सफलता को पाने से पहले कई-कई बार आप की भेंट असफलता से होगी. क्या आप इसे संभाल पाएंगे? कहीं ऐसा तो नहीं कि इन असफलताओं के कारण आप स्वयं पर से अपना विश्वास ही खो दें! आईएएस बनने का निर्णय लेने से पहले आपको चाहिए कि आप इन बिंदुओं पर इत्मीनान के साथ विचार करें.
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(डॉ विजय अग्रवाल का कॉलम 'IAS की तैयारी' हमारी वेबसाइट पर हर सप्ताह मंगलवार को पढ़ सकते हैं. इसमें हर सप्ताह IAS परीक्षा में कामयाबी के गुरु मंत्र देंगे)

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First published: July 23, 2019, 4:20 PM IST
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