APJ Abdul Kalam: स्कूल के बाद अखबार बेचे, मिसाइल मैन से राष्ट्रपति तक...ऐसा रहा सफर

APJ Abdul Kalam: स्कूल के बाद अखबार बेचे, मिसाइल मैन से राष्ट्रपति तक...ऐसा रहा सफर
पढ़िए अब्दुल कलाम के जीवन का पूरा सफर

बच्चों से खुलकर बातें करना, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना, उनमें ज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ाना उनकी शख्सियत का महत्त्वपूर्ण भाग था. लेकिन बच्चों से इतना लगाव रखने वाले कलाम साहब का खुद का बचपना काफी कष्ट में बीता.

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नई दिल्ली. भारत के 11वें राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) अपनी नायाब शख्सियत की वजह से जाने जाते हैं. भारत के मिसाइल मैन (Missile Man of India) कलाम साहब पूरा जीवन ही ऐसा रहा है कि जो कि किसी के लिए भी प्रेरणा स्रोत हो सकता है. बच्चों से कलाम साबह को खास प्रेम था. बच्चों से खुलकर बातें करना, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना, उनमें ज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ाना उनकी शख्सियत का महत्त्वपूर्ण भाग था. लेकिन बच्चों से इतना लगाव रखने वाले कलाम साहब का खुद का बचपना काफी कष्ट में बीता.

बचपन में बेचा अखबार
अब्दुल कलाम का बचपन काफी मुश्किलों में गुजरा. साल 1939 में जब वे आठ साल के थे तब अपने पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए अखबार बेचा करते थे. उस समय सुबह के वक्त ट्रेन से पेपर आया करता था जिसे लेकर सड़कों पर एपीजे अब्दुल कलाम बेचा करते थे. पढ़ने का शौक ऐसा था कि इन अखबारों को वे खुद भी पढ़ा करते थे. हालांकि, अखबार बेचने से उन्हें काफी कम पैसा मिलता था.

पैसे के लिए बेचे इमली के बीज
इनका एक और किस्सा काफी मजेदार है. बात दूसरे विश्व युद्ध के वक्त की है उस समय इन्हें अखबारों के जरिए जानकारी मिली कि इमली के बीजों की मांग काफी बढ़ रही है. उसका उपयोग शायद युद्ध की सामग्री बनाने में होनी थी. ये बात अब्दुल कलाम ने अपने बड़े भाई से बताई. वे दोनों जंगल जाकर इमली का बीज इकट्ठा करके ले आते थे जिसके उन्हें पैसे मिल जाते थे. इस बात को अब्दुल कलाम ने अपनी आत्मकथा में लिखा है.



1969 में पहुंचे इसरो
कलाम जी की शुरुआती पढ़ाई रामेश्वरम एलीमेंट्री स्कूल में हुई थी. उसके बाद उन्होंने बीएससी की फिर साल 1955 में मद्रास इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी MIT से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. बात साल 1969 की है जब कलाम साहब इसरो पहुंचे.

आर्मी के लिए बनाया था छोटा हेलीकॉप्टर
एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, डीआरडीओ में साइंटिस्ट के तौर पर नियुक्त हुए. करियर के शुरुआती समय में उन्होंने इंडियन आर्मी के लिए एक छोटा हेलीकॉप्टर का डिजाइन बनाया. दरअसल, उस वक्त पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च नाम की एक कमेटी बनाई थी. अब्दुल कलाम इस कमेटी के सदस्य थे. इस दौरान अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ कार्य करने का मौका मिला.

रोहिणी उपग्रह किया था स्थापित
साल 1969 में उन्होंने डीआरडीओ छोड़कर इसरो को ज्वाइन कर लिया. वह पहले सैटेलाइट लॉन्च वीकल के प्रोजेक्ट हेड नियुक्त किए गए. साल 1980 में उन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा निकट स्थापित किया. इसके बाद भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया. इसी के लिए कलाम जी को पद्मभूषण पुरस्कार भी मिला.

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साल 2002 मे बने राष्ट्रपति
साल 2002 में कलाम को भारत का 11वां राष्ट्रपति चुना गया. वे काफी मेहनती थे. अपनी मेहनत के बल पर ही वे एक गरीब परिवार से होकर भी राष्ट्रपति के पद पर पहुंचे.
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