DU Admission 2019: रहने-खाने की ही नहीं इन चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं बाहरी छात्र

DU Admission 2019:दिल्‍ली यूनिवर्सिटी में दाखिले की कड़ी प्रकिया से जूझने के बाद अब छात्र-छात्राओं के सामने कुछ और चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है.

News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 2:37 PM IST
DU Admission 2019: रहने-खाने की ही नहीं इन चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं बाहरी छात्र
DU Admission 2019: रहने-खाने की ही नहीं इन चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं बाहरी छात्र
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Updated: July 29, 2019, 2:37 PM IST
DU Admission 2019: दिल्‍ली यूनिवर्सिटी में दाखिले की कड़ी प्रकिया से जूझने के बाद अब छात्र-छात्राओं के सामने कुछ  और चुनौतियांं खड़ी हो गई है. दरअसल यहां के छात्र-छात्राओं को अब रहना और खाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है. दिल्‍ली के बाहर के रहने वाले स्‍टूडेंट्स को इन मुश्‍किलों से जूझना पड़ रहा है.  इस बारे में सोनीपत की छात्रा मुस्‍कान जैन का कहना है कि उन्‍हें किरोड़ीमल कॉलेज के BA Political Science (Honours)  कोर्स में प्रवेश मिला है.

वे यहां यहां एक अच्‍छे हॉस्‍टल के लिए भटक रही हैं. अभी तक उन्‍होंने जो भी हॉस्‍टल् देखे हैं वे बहुत ज्‍यादा महंगे हैं. टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बात करते हुए छात्रा ने बताया कि उन्‍होंने कॉलेज के पास स्‍थित कमला नगर, शक्‍ति नगर के हॉस्‍टल देख चुकी हैं लेकिन इन सभी इलाकों में हॉस्‍टल की कीमत बहुत है, जिसे वे अफोर्ड नहीं कर सकतीं.

वहीं इसके बारे में गोरखपुर के एक और छात्र मयंक शेखर पांडेय ने बताया कि, यहां एक अच्‍छी और सुरक्षित जगह तलाशना एक बड़ा मुद्दा है. मुझे एक फ्लैट खोजने में एक महीने से ज्‍यादा का  समय लग गया, क्योंकि किराया बहुत ज्‍यादा था. दरअसल हमें कॉलेज के वक्‍त में एक फिक्‍सड पॉकेट मनी दी जाती है. उसी में सारे खर्च करने होते हैं.

केन्‍या से ताल्‍लुक रखने वाले विदेशी छात्र एडविन किप्टू ने बताया कि उन्‍हें रहने की समस्याओं का सामना करने के साथ-साथ भाषा की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है. इस बारे में बेंगलुरु की रागश्री सेनगुप्ता कहती हैं कि दक्षिण भारत से होने के कारण, सबसे बड़ी समस्या भाषा की है क्योंकि बेंगलुरु में हिंदी बहुत बड़े पैमाने पर नहीं बोली जाती है, जबकि यहां स्‍थिति बहुत अलग है. ऐसे में बहुत ज्‍यादा समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है.

वहीं डीयू के एक अधिकारी के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में 68,000 से अधिक दाखिले हुए हैं और स्नातक पाठ्यक्रमों में 50 प्रतिशत से अधिक छात्र दिल्ली के बाहर से हैं. ऐसे में इन सभी छात्र-छात्राओं को मुश्‍किलों से जूझना पड़ रहा है.

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First published: July 29, 2019, 2:37 PM IST
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