GRC मसला: दिल्ली HC ने DU को अपनी पसंद का एक सदस्य रखने की अनुमति दी

GRC मसला: दिल्ली HC ने DU को अपनी पसंद का एक सदस्य रखने की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने फाइनल ईयर एग्जाम के लिए बनी शिकायत निवारण समिति को लेकर सुनवाई की.

दिल्ली HC ने दिल्ली विश्वविद्यालय को शिकायत निवारण समिति में अपनी पसंद का एक सदस्य रखने की अनुमति दे दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 15, 2020, 5:32 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से ओपन बुक एग्जाम (Delhi University’s online open book examination, OBE) कराई जा रही हैं. ओपन बुक परीक्षा की निगरानी के लिए शिकायत निवारण समिति (जीआरसी) पुर्नगठित की गई है. शिकायत निवारण समिति के (Grievance Redressal Committee- जीआरसी) पुनर्गठन में दो शिक्षाविदों को हटा कर, दो वकीलों और उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को शामिल किया गया है. इसी पुर्नगठित समीति को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई.

आप साफ सुथरे हैं, तो किस बात का खतरा
विश्वविद्यालय ने अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल की है. याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, “यदि आप बिलकुल साफ सुथरे हैं, तो आपको किस बात का खतरा है? आप इसे व्यक्तिगत मसला क्यों बना रहे हैं? समिति केवल छात्रों की शिकायतों का निपटारा करेगी.”

शिकायत निवारण समिति
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से पूछा कि यदि सब कुछ “साफ सुथरा” है तो न्यायिक आदेश द्वारा दो शिक्षाविदों को हटा कर दो वकीलों और उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को शामिल कर पुनः गठित की गई शिकायत निवारण समिति (जीआरसी) से उसे “खतरा” क्यों महसूस हो रहा है?



पुनर्गठित जीआरसी में बाहर के लोग क्यों शामिल
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि डीयू को अपनी साख से ज्यादा इसकी चिंता है कि सात अगस्त के आदेश से पुनर्गठित जीआरसी में बाहर के लोग क्यों शामिल हैं.

जीआरसी पुनर्गठन से पूर्व सदस्यों की साख को धक्का 
विश्वविद्यालय ने कहा कि जीआरसी पुनर्गठित करने से उसकी और समिति के पूर्व सदस्यों की साख को धक्का लगा है. डीयू ने पीठ से आग्रह किया कि किसी बाहरी व्यक्ति के हस्तक्षेप के बिना उसे अपना कामकाज करने दिया जाए.

समिति के चार सदस्य पुनः शामिल 
विश्वविद्यालय ने यह भी सुझाव दिया कि समिति के पूर्व चार सदस्यों को पुनः शामिल किया जाए और उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को समिति का अध्यक्ष बनाया जाए. हालांकि पीठ ने सुझाव मानने से इनकार कर दिया.

समिति से बाहर किया एक सदस्य पुनर्गठित जीआरसी में शामिल
इसकी बजाय अदालत ने एक विकल्प सुझाया जिसके तहत समिति से बाहर किए गए एक सदस्य को पुनर्गठित जीआरसी में शामिल किया जाए और इसे छह सदस्यीय समिति बनाकर उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को इसका अध्यक्ष बनाया जाए.

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प्रोफेसर एस सी राय छठे सदस्य के रूप में शामिल 
डीयू ने अदालत के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. इसके बाद पीठ ने प्रोफेसर एस सी राय को छठे सदस्य के रूप में समिति में शामिल किया और कहा कि समिति शुक्रवार से काम करना शुरू कर देगी.
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