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EDUSET Program: एजुसेट प्रोग्राम का शेड्यूल जारी, जानिए कब-कब होंगे लेक्चर

Punjab News: शिक्षा विभाग ने एजूसेट प्रोग्राम का शेड्यूल जारी किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Punjab News: शिक्षा विभाग ने एजूसेट प्रोग्राम का शेड्यूल जारी किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

EDUSET Program: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के एजूसेट (Educational Satellite) के जरिए दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम चलाया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 7:02 PM IST
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चंडीगढ़. पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने एजुकेशनल सेटेलाइट यानी एजुसेट प्रोग्राम (EDUSET Program) के द्वारा विद्यार्थियों के ज्ञान में विस्तार करने के लिए नई समय सारणी जारी कर दी है. यह जानकारी देते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि एजुसेट के द्वारा शिक्षा प्रदान करने के लिए जनवरी और फरवरी महीने के लिए समय सारणी बनाई गई है.

विभाग की नई समय सारणी के अनुसार गुरुवार 21 जनवरी को पहला लेक्चर होगा. शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि ये लेक्चर 6 फरवरी तक चलेंगे. इस दौरान विद्यार्थी को पेपरों को हल करने के लिए टिप्स बताए जाएंगे. इसके अलावा ‘स्वागत जिंदगी’ विषय और बच्चों को प्रेरणा देने वाले लेक्चर भी दिए जाएंगे. 21 जनवरी को पहला लेक्चर ‘समाज सुधार-नशे और बुरी संगत का त्याग’ विषय पर होगा.

विभाग के प्रवक्ता के अनुसार यह लेक्चर 6वीं  से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को दिए जाएंगे. ज्यादातर लेक्चर तीसरे और चौथे पीरियड दौरान सुबह के समय 11.25 से लेकर दोपहर 12 बजे तक और दोपहर 12 बजे के बाद दोपहर 12.30 बजे तक होंगे. शिक्षा विभाग के डायरेक्टर (सीनियर सेकंडरी) ने विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया है कि सभी विद्यार्थी इस लेक्चर कार्यक्रम का लाभ उठाएं, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्यों की होगी. डायरेक्टर के मुताबिक विद्यार्थी इन लेक्चर्स का अधिक से अधिक लाभ उठा सकें, यह प्रयास करना है.



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एजूसेट प्रोग्राम


जीसैट-3,जिसे एजूसेट (Educational Satellite) के नाम से भी जाना जाता है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization) द्वारा सितम्बर 2004 में स्थापित किया गया एक कृत्रिम उपग्रह है. इसका प्रक्षेपण शिक्षण-सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है. दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को प्रभावी ढंग से चलाने में एजूसेट का अहम योगदान माना जाता है. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के लिए शिक्षा का वैकल्पिक माध्यम तैयार करने में इसकी अहम भूमिका है.

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