छात्र ध्यान दें : सिलेबस में होगा ये बड़ा बदलाव! एनसीईआरटी ने तैयार किया ड्राफ्ट

छात्र ध्यान दें : सिलेबस में होगा ये बड़ा बदलाव! एनसीईआरटी ने तैयार किया ड्राफ्ट
कोरोना वायरस के चलते देशभर की शिक्षा व्यवस्था पर खासा असर पड़ा है.

नेशनल काउंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी (NCERT) ने अपने ड्राफ्ट में सिलेबस में बदलाव को लेकर कई अहम बातें शामिल की हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) ने भारत में न केवल पढ़ाई के तरीकों पर बड़ा असर डाला है, बल्कि अब पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए नए एकेडमिक सत्र में गुंजाइश निकालने की योजना बनाई जा रही है. यही वजह है कि सिलेबस में कटौती भी न हो और पढ़ाई का बोझ भी कम हो जाए, इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. इसी प्रयास के तहत नेशनल काउंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी (NCERT) ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है. इसमें नए एकेडमिक सत्र में पढ़ाई का बोझ कम करने के सुझाव शामिल हैं.

एनसीईआरटी के ड्राफ्ट के अनुसार, सेल्फ स्टडी की भूमिका अहम
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गत चार जून को हुई बैठक में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई (CBSE) ने एनसीईआरटी (NCERT) से दसवीं और बारहवीं क्लास के सिलेबस का विश्लेषण करने को कहा था. ये मामला सिर्फ सीबीएसई से सबद्ध स्कूलों में एनसीईआरटी टेक्स्टबुक से जुड़ा है. ड्राफ्ट के अनुसार, एनसीईआरटी सिलेबस में कटौती करने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे हायर एजुकेशन में छात्रों को समस्या पेश आ सकती है. इसकी बजाय एनसीईआरटी ने ऐसे टॉपिक्स और थीम की पहचान की है जिनमें से कुछ टीचर्स द्वारा पढ़ाए जाने चाहिए और कुछ छात्रों को सेल्फ स्टडी कर समझने चाहिए.

इस तरह हो मार्किंग
एनसीईआरटी के ड्राफ्ट (NCERT Draft) के अनुसार, टीचर्स द्वारा पढ़ाए गए टॉपिक्स का मूल्यांकन बोर्ड एग्जाम के ​जरिये होना चाहिए और सेल्फ स्टडी का मूल्यांकन इंटरनल असेस्मेंट में शामिल होना चाहिए. सूत्रों के अनुसार, एनसीईआरटी के ड्राफ्ट पर विचार किया जा रहा है. इसमें अभी और भी बदलाव किए जा सकते हैं. हालांकि इन सुझावों को लागू करना है या नहीं, इस पर फैसला सीबीएसई द्वारा ही लिया जाएगा.



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बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सिलेबस में कटौती करने को लेकर सार्वजनिक रूप से लोगों से सुझाव मांगे थे ताकि कोरोना वायरस के चलते पढ़ाई में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके.
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