Success Story: ओडिशा के बिहाबंध गांव की लड़की संयुक्त राष्ट्र सलाहकार समूह में हुई शामिल

अर्चना का कहना है, ‘मेरे स्वर्गीय पिता ने अपने बुजुर्गों से प्रकृति के संरक्षण का जो सबक सीखा था, वह उन्होंने मुझे भी सिखाया. (सांकेतिक तस्वीर)

अर्चना को चार दिन पहले तक ज्यादा लोग नहीं जानते थे, लेकिन अब उन्हें उनके गांव, जिला, राज्य और देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के बहुत से लोग जानते हैं.

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    नई दिल्ली. ये कहानी ओडिशा के बिहाबंध गांव की रहने वाली अर्चना सोरेंग की है. ये गांव आदिवासी बहुल सुंदरगढ़ जिले के रांची रोड से करीब पांच किलोमीटर के फासले पर स्थित है. अर्चना सोरेंग खड़िया जनजाति से हैं.

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने उन्हें अपने नए सात सदस्यीय सलाहकार समूह में शामिल करने का निर्णय किया है. सात सदस्यीय सलाहकार समूह जलवायु संकट से निपटने के लिए जरूरी सलाह और समाधान उपलब्ध कराएगा. अर्चना इस दायित्व को लेकर बहुत उत्साहित हैं. उनका मानना है कि हमारे पूर्वजों ने युगों तक प्रकृति और इसकी आबोहवा को बचाए रखा. अब उसी पारंपरिक ज्ञान का इस्तेमाल करते दुनिया पर मंडराते खतरे को कम किया जा सकता है.

    पर्यावरण की तरफ कैसे हुआ झुकाव
    मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से रेग्युलेटरी गवर्नेंस की पढ़ाई के दौरान अर्चना का रुझान पर्यावरण नियमन से जुड़े विषय की तरफ हुआ क्योंकि इसके पाठ्यक्रम में कुछ ऐसी बातें थीं, जो उन्होंने बचपन में अपने पिता से सीखी थीं.

    अर्चना का कहना है, ‘मेरे स्वर्गीय पिता ने अपने बुजुर्गों से प्रकृति के संरक्षण का जो सबक सीखा था, वह उन्होंने मुझे भी सिखाया. मुझे लगा कि इस पारंपरिक ज्ञान का प्रसार और संरक्षण होना चाहिए. साथ ही इसे प्रकृति की धाती को बचाने में इस्तेमाल किया जाना चाहिए.’

    ओडिशा के वसुंधरा में में करती हैं काम
    ओडिशा के वसुंधरा में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत आजीविका पर काम करती है. वे अनुसंधान और नीति सलाहकार संगठन में है. अर्चना का कहना है, वह भाग्यशाली हैं कि उन्हें जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में विभिन्न स्वदेशी समुदायों के परंपरागत ज्ञान के दस्तावेजीकरण का मौका मिला, जिसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के संरक्षण के लिए किया जा सकेगा.

    बिगड़ते जलवायु संकट से निपटने के लिए ढूंढेंगी समाधान
    अर्चना सोरेंग विश्व के छह अन्य युवा जलवायु कार्यकर्ताओं के साथ उस समूह में शामिल होंगी जो बिगड़ते जलवायु संकट से निपटने के लिए समाधान और सलाह उपलब्ध देंगे.

    ये हैं समूह के अन्य 6 सदस्य
    -सूडान से निसरीन एल्सिम,
    -फीजी से अर्नेस्ट गिब्सन,
    -माल्दोवा से व्लादिस्लाव काइम,
    -अमेरिका से सोफिया कियानी
    -फ्रांस से नाथन मेतेनियर और
    -ब्राजील से पालोमा कोस्ता को शामिल किया गया है.

    संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में सोरेंग को इस समूह में शामिल करने की जानकारी दी. संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि वह शोध और अनुसंधान में अनुभवी हैं. वह स्वदेशी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए काम कर रही हैं.

    अर्चना की शिक्षा
    अर्चना ने सेंट जॉन मेरी वियानी स्कूल, कुतरा से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की. इसके बाद राउरकेला, हमीरपुर स्थित कारमेल कॉन्वेंट स्कूल से इंटर किया. पटना वूमेंस कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की. मुंबई के टीआईएसएस से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की. इसी दौरान छात्रसंघ की अध्यक्ष भी रहीं.

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    अर्चना का परिवार
    परिवार की बात करें तो उनके पिता बिजय कुमार सोरेंग का 2017 में कैंसर के कारण निधन हो गया. उनकी मां उषा केरकेटटा सेंट जॉन मेरी वियानी स्कूल में लाइब्रेरियन और खेल शिक्षक हैं.

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