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ग्लोबल रैंकिंग में घटा इंडियन यूनिवर्सिटीज का स्कोर, पढ़ें IIT दिल्ली के डायरेक्टर का रिएक्शन

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आईआईटी दिल्‍ली की छात्रा को 1.45 करोड़ रुपये का पैकेज हुआ ऑफर

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चौथे साल में भी अपनी टॉप जगह पर बनी हुई है, जबकि कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान पांचवें से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है.

  • News18Hindi
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    नईदिल्ली. देश के हायर एजुकेशन सिस्टम की प्रतिष्ठा में गिरावट आई है. ऐसा पहली बार है जब किसी भी भारतीय संस्थान को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय लीग टेबल के टॉप 300 में जगह नहीं मिली. हालांकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के डायरेक्टर वी रामगोपाल राव ने एक फेसबुक पोस्ट में इस पर अपनी राय दी है. उन्होंने कहा, अगर किसी विश्वविद्यालय के मूल सिद्धान्त मजबूत हैं तो रैंकिंग भी उसे फॉलो करेगी.

    लेटेस्ट टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में IIT रोपड़ बेस्ट रैंक यूनिवर्सिटी में शुमार की गई है. इसके साथ ही इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (IISC) बैंगलुरू को भी दुनिया की टॉप 301-350 रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी में रखा गया है. इसी लिस्ट में टॉप 200 तक की लिस्ट में इन संस्थानों को व्यक्तिगत पदों (individual positions) की बजाय ग्रुप्स रैंक में रखा गया है.

    56 संस्थानों ने लिस्ट में जगह बनाई
    2012 के बाद से इसे भारत के सबसे खराब प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि इस बार 56 संस्थानों ने लिस्ट में जगह बनाई, जबकि पिछले साल 49 संस्थान थे. हालांकि, राव का कहना है टाइम्स रैंकिंग पूरी तस्वीर नहीं दिखाती. बता दें कि दिल्ली, मुंबई और खड़गपुर आईआईटी को 401-500 रैंकिंग ब्रैकेट में रखा गया है. दिल्ली और खड़गपुर की ब्रांच में पिछले साल से 100 रैंक में सुधार हुआ है.

    ऑक्सफोर्ड की जगह
    बता दें कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चौथे साल में भी अपनी टॉप जगह पर बनी हुई है, जबकि कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान पांचवें से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर खिसक गए.

    IIT दिल्ली के डायरेक्टर वी रामगोपाल राव ने टॉप रैंकिंग्स पर इंडियन संस्थानों के न पहुंचने के चार कारण बताए हैं.

    1- रैंकिंग मापदंडों की तीन स्टेज- अंतरराष्ट्रीय छात्र, अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और फैकल्टी-स्टूडेंट अनुपात में हमारे संस्थान शून्य के करीब स्कोर करते हैं. विश्व स्तर पर जगह पाने के लिए, हमें अपने कैंपस का अंतर्राष्ट्रीयकरण (internationalise) करना होगा.

    2- आम धारणा के विपरीत, रिसर्च इंपेक्ट स्कोर में हमारे टॉप संस्थान अच्छा स्कोर करते हैं. रिसर्च इम्पैक्ट स्कोर में 2018 में आईआईटी दिल्ली दुनिया में 39वें स्थान पर थी. पिछले दो सालों में हमने में बहुत सारी नई फैकल्टी रिक्रूट की, और अब यह 50वें स्थान पर है. जब नई फैकल्टी प्रोडक्टिव होंगी तो रैंक फिर से बेहतर होगी.

    अगर आप वर्ल्ड यूनिवर्सिटी को सिर्फ "रिसर्च इम्पैक्ट" स्कोर पर रैंक देंगे तो हमारे कई टॉप भारतीय संस्थान (जैसे आईआईटी और आईआईएससी) टॉप 100 में होंगे.

    3- हम वैश्विक स्तर पर धारणा आधारित मापदंडों पर अच्छा स्कोर नहीं करते. इसकी वजह हमारे संस्थानों की प्रकृति और सांस्कृतिक मुद्दे हैं. लेकिन अब ये नज़रिया भी बदल रहा है.

    4- रैंकिंग के लिए 50% स्कोर धारणा पर आधारित होता है. QS (QS World University Rankings) इस मामले में ज्यादा पारदर्शी है. वे धारणा के आधार पर स्कोर देते हैं. हमने THE (Times Higher Education World University Rankings) की रैंकिंग के बारे में परवाह करना बंद कर दिया है.

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    Tags: Better education opportunities, College education, IIT, Modern Education

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