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सरकारी किताब में गांधीजी की मौत को ‘दुर्घटना’ लिखने को ओडिशा सरकार ने माना भूल

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Updated: November 16, 2019, 5:11 PM IST
सरकारी किताब में गांधीजी की मौत को ‘दुर्घटना’ लिखने को ओडिशा सरकार ने माना भूल
किताब में महात्‍मा गांधी की हत्‍या को दुर्घटना बताया गया है.

मामले में विवाद भड़कने के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को इसके लिये माफी मांगनी चाहिए और इस ‘‘बड़ी भूल’’ को तुरंत ठीक करने की मांग की.

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महात्मा गांधी की मौत को ‘‘दुर्घटना’’ बताने वाली एक सरकारी पुस्तिका को लेकर चौतरफा आलोचना झेल रही ओडिशा सरकार ने शनिवार को कहा कि यह असावधानीवश हुई भूल है. साथ ही कहा कि इस संबंध में बच्चों को गलत सूचना देने या घटनाक्रमों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की उसकी कोई मंशा नहीं थी.

विधानसभा अध्यक्ष एस एन पात्रों द्वारा शुक्रवार को निर्देश दिए जाने के बाद विद्यालय एवं जन शिक्षा मंत्री समीर रंजन दास ने विधानसभा में विवाद को लेकर सरकार का पक्ष रखा. दास, ने कहा कि सरकार पुस्तिका को वापस मंगाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है. उन्होंने कहा कि इस भूल के लिये एक अधिकारी को हटा दिया गया है और दो अन्य से इस बारे में जवाब मांगा गया है.

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर प्रकाशित दो पृष्ठों की पुस्तिका ‘आमा बापूजी : एका झलका’ (हमारे बापूजी : एक झलक) में उनकी शिक्षाओं, कार्यों और ओडिशा से उनके जुड़ाव की संक्षिप्त जानकारी दी गयी है. इसमें कहा गया है कि ‘‘दिल्ली के बिड़ला हाउस में 30 जनवरी 1948 को अचानक हुए घटनाक्रम में दुर्घटनावश गांधी की मौत हुई.’’

मामले में विवाद भड़कने के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को इसके लिये माफी मांगनी चाहिए और इस ‘‘बड़ी भूल’’ को तुरंत ठीक करने की मांग की. इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ. पार्टी लाइन से ऊपर उठकर विधायकों ने राष्ट्रपिता पर भ्रामक तथ्यों को लेकर चिंता जाहिर की.

दास ने कहा, ‘‘गलत सूचना देने और बच्चों को भ्रमित करने या घटनाक्रमों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोई मंशा नहीं है. यह अनजाने में हुई भूल है.’’ मंत्री ने सदन को बताया कि पुस्तिका में आवश्यक सुधार किये जायेंगे और इसे एक महीने के भीतर फिर से मुद्रित कर छात्रों के बीच बांटा जायेगा.

सभी दलों के विधायकों ने शुक्रवार को इस प्रकरण पर खेद जताया. कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री को इसके लिये माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने ‘‘भ्रामक सूचना’’ देने के पीछे सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठाया.

विधानसभा में शुक्रवार को उन्होंने कहा, ‘‘सत्तारूढ़ बीजद और भाजपा के बीच संबंध में बदलाव के कारण गांधीजी पर भ्रामक सूचना देने के पीछे की मंशा को लेकर मुझे संदेह है. भाजपा नेताओं का एक धड़ा नाथूराम गोड्से की पूजा करता है जिसने गांधीजी की हत्या की.’’
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मिश्रा ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि बीजद ने पूरी तरह से भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. इसलिए यह पुस्तिका बीजद-भाजपा के गुप्त गठबंधन का हिस्सा हो सकती है.’’ सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी सरकारी पुस्तिका में गांधीजी पर भ्रामक सूचना की निंदा की. विधायकों की चिंता साझा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने विद्यालय एवं जन शिक्षा मंत्री को इस संबंध में शनिवार को सदन में बयान देने का निर्देश दिया. (इनपुट-भाषा)

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First published: November 16, 2019, 5:09 PM IST
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