बड़ी बात : 30 साल पुराने तरीके से होगी अब 10वीं क्लास में पढ़ाई! जरूरी है जानना

बड़ी बात : 30 साल पुराने तरीके से होगी अब 10वीं क्लास में पढ़ाई! जरूरी है जानना
गुजरात बोर्ड की 12वीं क्लास का रिजल्ट हाल ही में घोषित किया गया था.

गणित (Maths) विषय में स्टूडेंट्स के ​लगातार खराब प्रदर्शन को देखते हुए जल्द उठाया जा सकता है अहम कदम.

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अहमदाबाद. दसवीं क्लास के ऐसे स्टूडेंट्स जिन्हें गणित से डर लगता है और जो हायर एजुकेशन में साइंस स्ट्रीम नहीं लेना चाहते, उनके लिए राहत भरी खबर आई है. दरअसल, टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दसवीं क्लास के बोर्ड एग्जाम के लिए जल्द ही गणित की दो अलग-अलग किताबें लाई जा सकती हैं. राज्य सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है. अगर ऐसा होता है तो फिर गुजरात में पढ़ाई का वो 3 दशक पुराना तरीका भी वापस लौट आएगा, जिसका इस्तेमाल 30 साल पहले किया जाता था.

30 साल पहले...
दरअसल, गुजरात सेकंडरी और हायर सेकंडरी एजुकेशन बोर्ड (gujarat secondary and higher secondary education board) जल्द ही दसवीं बोर्ड एग्जाम के लिए गणित की दो अलग-अलग किताबों से पढ़ाई के तरीके को लागू कर सकता है. 30 साल पहले जब कोई छात्र साइंस स्ट्रीम नहीं लेना चाहता था तो उसके सिलेबस में एलीमेंट्री मैथ्स का विकल्प शामिल होता था. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई भी इसी फॉर्मूले को अपनाती है, जिसके तहत छात्रों के दो अलग-अलग समूहों के लिए गणित की दो अलग-अलग किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं.

ये है पुराने ढर्रे पर लौटने की वजह
दरअसल गुजरात बोर्ड (gujarat secondary and higher secondary education board) को ये फैसला इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि गणित में स्टूडेंट्स के प्रदर्शन में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. इसका असर कुल पास प्रतिशत पर भी पड़ रहा है. इस साल भी कुल 7.92 लाख में से 4.81 लाख ही बोर्ड एग्जाम पास कर सके. ये आंकड़ा करीब 60.76 फीसदी बैठता है. इसे देखते हुए बोर्ड की शिक्षा समिति ने ​गणित की दो किताबों को लाने का प्रस्ताव पास किया था, जो अब मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जा चुका है.



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सरकार कर रही विचार
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य शिक्षा सचिव विनोद राय ने बताया, हमें प्रस्ताव मिल चुका है और सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है. गणित में छात्रों के खराब प्रदर्शन की वजह से कुल पास प्रतिशत में भी बड़ी गिरावट आई है जो चिंता की बात है. ​गणित में छात्रों का प्रदर्शन लगातार खराब ही रहा है. साल 2015 में जहां 55.05 फीसदी छात्र ही इस विषय में पास हो सके थे, वहीं पिछले साल कुछ सुधार के साथ ये आंकड़ा 69.65 फीसदी तक पहुंचा था. मगर इस साल फिर ये 60.76 प्रतिशत पर पहुंच गया है.

 
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