कॉलेज के चपरासी ने पास की PHD प्रवेश परीक्षा, अब करेगा ये काम

Success Story: अरुण के माता-पिता के पास बहुत कम जमीन थी. इसलिये पढ़ाई के ल‍िये उन्‍हें खुद ही काम करना था. चपरासी की नौकरी से जो कुछ म‍िलता है अरुण उसे पढ़ाई का खर्च न‍िकालते हैं.

News18Hindi
Updated: July 12, 2019, 2:14 PM IST
कॉलेज के चपरासी ने पास की PHD प्रवेश परीक्षा, अब करेगा ये काम
सूरत के चपरासी ने पास की पीएचडी प्रवेश परीक्षा, अब करेगा ये काम
News18Hindi
Updated: July 12, 2019, 2:14 PM IST
सूरत: कहते हैं आसमान में छेद करने के ल‍िये ताकत से ज्‍यादा इरादे की जरूरत होती है. यह बात गुजरात के रहने वाले अरुण वाल्‍वी ने साबित कर द‍िखाया है. सूरत के एक कॉलेज में चपरासी का काम कर रहे अरुण वाल्‍वी ने पहले अटेम्‍प में ही पीएचडी का एंट्रेंस एग्‍जाम क्‍लीयर कर ल‍िया है. अरुण वाल्‍वी, 34 साल के हैं और वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी(VNSGU) के वाइस चांसलर के ऑफिस में चपरासी का काम करते हैं. उनकी एक साल की बेटी है और पत्‍नी सूरत पुल‍िस में कांस्‍टेबल की नौकरी करती हैं. अरुण वाल्‍वी, दक्ष‍िणी गुजरात के आद‍िवासी क्षेत्र के पहले ऐसे व्‍यक्‍त‍ि हैं, ज‍िन्‍होंने पीएचडी की परीक्षा पास की है.

वाल्‍वी ने 10 जून को PhD का एंट्रेंस एग्‍जाम क्‍लीयर क‍िया. उन्‍होंने 200 में से 110 स्‍कोर हास‍िल क‍िया है. वाल्‍वी ने गुजराती भाषा में ही यह परीक्षा दी थी. वाल्‍वी ज‍िस कस्‍बे में रहते हैं, वहां ऐसा कोई नहीं कर पाया है. वह कहते हैं क‍ि वह भले ही छोटे से कस्‍बे में रहते हैं, पर ख्‍वाब बड़े देखते हैं. दुनिया को पीछे छोड़ने का ख्‍वाब.



बनेंगे प्रोफेसर:
बातों ही बातों में वाल्‍वी कहते हैं क‍ि आज के आधुनिक समय में लोग एक दौड़ में शामिल हो गए हैं. वह दौड़ तो रहे हैं, पर कहां जाना है यह पता नहीं है. मैं इनसे अलग और आगे न‍िकलना चाहता हूं. कुछ लोग ऐसे भी भी हैं, ज‍िन्‍होंने व‍िपरीत पर‍िस्‍थि‍यों के बावजूद, अपनी जीवन में बुलंदी हास‍िल की है. मैं भी कुछ ऐसा ही करना चाहता हूं. मैं तो अभी बहुत युवा हूं और मुझमें मेहनत करने की क्षमता है. मैं पीएचडी पूरा कर प्रोफेसर बन सकता हूं.

हेमशा अच्‍छा रहा र‍िजल्‍ट:
हालांकि वाल्‍वी के एकेडमिक ड‍िग्र‍ियों पर नजर डालें तो आपको यह यकीन हो जाएगा क‍ि वह प्रोफेसर बनने की कूवत रखते हैं. तापी ज‍िला के छोटे से गांव भीलामोली गांव से आने वाले वाल्‍वी ने वीएनएसजीयू से संबद्ध उच्‍चल कॉलेज से फर्स्‍ट क्‍लास में बीए पास क‍िया. इसके बाद उन्‍होंने सूरत से एमए पास क‍िया और वह भी फर्स्‍ट क्‍लास में.

अनपढ़ मजदूर का बेटा:
Loading...

माता-प‍िता मजदूरी करते हैं. वह पढ़े ल‍िखे नहीं हैं. अपना खर्च न‍िकालने के ल‍िये अरुण ने पेट्रोल पंप पर काम शुरू कर द‍िया. कई बार वह द‍िहाड़ी मजदूर की तरह भी काम करता. अरुण के माता-पिता के पास बहुत कम जमीन थी. इसलिये पढ़ाई के ल‍िये उन्‍हें खुद ही काम करना था. अरुण बताते हैं क‍ि मेरे प‍िता मेरी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते थे. इसलिये मैंने अपनी पढ़ाई का खर्च न‍िकालने के ल‍िये काम करना शुरू कर द‍िया.

हालांकि शुरुआत में जब मैंने जब लोगों से पीएचडी करने का खयाल साझा क‍िया तो उन्‍होंने मेरी बहुत आलोचना की. खासकर मेरी भाषा को लेकर. मेरी भाषा बहुत अच्‍छी नहीं है, मैं बहुत अच्‍छी गुजराती नहीं बोल पाता. अपनी सोच को समझाने के ल‍िये मैं बोलचाल की भाषा का ही इस्‍तेमाल करता हूं.

पीएचडी की तैयारी:
अरुण इन द‍िनों पीएचडी के ल‍िये प्रेजेंटेशन तैयार करने में व्‍यस्‍त हैं. वह चपरासी की नौकरी भी करते हैं, ज‍िससे उन्‍हें हर महीने 13000 रुपये की आय हो जाती है. अरुण की पत्‍नी सव‍िता को अभी डेढ़ साल पहले ही कांस्‍टेबल की नौकरी म‍िली है. उनकी एक साल की बेटी है वीरा. अरुण वीरा और सव‍िता को अपने जीवन की प्रेरणा मानते हैं.

सेकन्‍ड प्‍लान भी तैयार:
अरुण कहते हैं क‍ि अगर वह प्रोफेसर नहीं बन सके तो वह सोशल सर्व‍िस के क्षेत्र में काम करेंगे. अरुण से जब पूछा गया क‍ि वह क‍िस व‍िषय से पीएचडी करना चाहते हैं तो उन्‍होंने कहा क‍ि एक बार मुझे प्रेजेंटेशन तैयार कर लेने दीज‍िए, फ‍िर मैं विषय का चुनाव करूंगा, जो ज्‍यादा से ज्‍यादा समाज को लाभान्‍व‍ित कर सके.

यह भी पढ़ें:
CA की नौकरी छोड़ इस लड़के ने शुरू किया ये बिजनेस, आज कमा रहा करोड़ों

Govt Job Opportunity: जुलाई में निकली बंपर सरकारी नौकरियां, पढ़ें पूरी डिटेल

केंद्रीय सुरक्षाबलों के 84 हज़ार पद खाली, जल्द आएंगी वैकेंसी
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...