विश्वविद्यालयों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के निर्देश वाली अर्जी पर सुनवाई से दिल्ली HC का इनकार

कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है.
कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है.

अर्जी में यह आरोप लगाया गया था कि कुछ शैक्षणिक संस्थान अभिभावकों को बार बार संदेश भेज रहे हैं कि फीस का भुगतान नहीं किये जाने पर उनके बच्चों के नाम काट दिया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 7:48 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर सुनवायी करने से इनकार कर दिया जिसमें विश्वविद्यालयों और ऐसे अन्य संस्थानों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वे कोविड-19 महामारी की स्थिति के मद्देनजर केवल शिक्षण शुल्क लें और वह भी किस्तों में. अदालत ने कहा कि ‘‘रियायत अधिकार का कोई मामला नहीं है.’’

अर्जी को एक प्रतिवेदन के तौर पर लें 
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की एक पीठ ने संबंधित प्राधिकारियों से कहा कि वे अर्जी को एक प्रतिवेदन के तौर पर लें और कानून, नियम और मामले के तथ्यों में लागू सरकारी नीति के अनुरूप एक निर्णय करें. विधि के चौथे वर्ष के एक छात्र द्वारा दायर अर्जी का इस निर्देश के साथ निस्तारण कर दिया गया.

विश्वविद्यालय अपने प्रोफेसरों को भुगतान करें
पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के दौरान कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने प्रोफेसरों को भुगतान करना है और ऑनलाइन कक्षाओं के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण भी करना है, इसलिए उन्हें शुल्क रियायतें देने के लिए निर्देशित नहीं किया जा सकता.





अभिभावकों को शुल्क जमा करने की समय अवधि में रियायत
विधि के छात्र ने अपनी अर्जी में शिक्षा मंत्रालय से विभिन्न विश्वविद्यालयों और ऐसे अन्य संस्थानों को निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया था कि वे ली जा रही फीस में विभिन्न मदों को उल्लेखित करें और विभिन्न मामलों के आधार पर अभिभावकों को शुल्क जमा करने के लिए समय अवधि के विस्तार के रूप में रियायतें दें.

तेज गति वाला इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करें
याचिका में यह भी सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का अनुरोध किया गया था वे ऐसे छात्रों को गैजेट और तेज गति वाला इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करें जो इसका खर्च नहीं उठा सकते ताकि महामारी के दौरान सभी छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा या कक्षाओं तक पहुंच प्राप्त हो सके.

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बच्चों के नाम काटने का आदेश
अर्जी में यह आरोप लगाया गया था कि कुछ शैक्षणिक संस्थान अभिभावकों को बार बार संदेश भेज रहे हैं या ईमेल कर रहे हैं जिसमें यह धमकी दी जाती है कि फीस का भुगतान नहीं किये जाने पर उनके बच्चों के नाम काट दिये जाएंगे या उन्हें आनलाइन कक्षाओं तक पहुंच प्रदान नहीं की जाएगी.
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