क्या हायर एजुकेशन के लिए स्कॉलरशिप लेने से डर रहे हैं अल्पसंख्यक स्टूडेंट?

सरकार द्वारा प्रदान किया गया डेटा दिखा रहा है पिछले पांच सालों में स्कॉलरशिप लेने वाले छात्रों और दी जाने स्कॉलरशिप में भी कमी आई है. ये तीनों स्कॉलरशिप मुस्लिम, सिख, क्रिश्चियन, बौद्धों, जैन और पारसियों को दी जाती हैं.

News18Hindi
Updated: July 27, 2019, 5:43 PM IST
क्या हायर एजुकेशन के लिए स्कॉलरशिप लेने से डर रहे हैं अल्पसंख्यक स्टूडेंट?
अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के मनोबल पर असर
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Updated: July 27, 2019, 5:43 PM IST
देश में हायर एजुकेशन लेने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के मनोबल पर असर पड़ने की संभावना है. ऐसा हम नहीं सरकार की ओर से जारी डेटा बता रहा है. सरकार द्वारा प्रदान किया गया डेटा दिखा रहा है कि दी जाने स्कॉलरशिप की संख्या में कमी आई है. साथ ही पिछले पांच सालों में स्कॉलरशिप का फायदा लेने वाले छात्रों की संख्या में भी कमी आई है.

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) की ओर से स्कॉलरशिप को एक बड़े अंतर से कम किया गया है. ये डेटा News18 ने RTI और सकारी रिपोर्ट्स के आधार पर जमा किया. डेटा दिखाता है कि सिर्फ सरकार की तरफ से दी जाने वाली धनराशि में ही गिरावट नहीं आई बल्कि निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या में भी गिरावट आई है.

6 अल्पसंख्यक समुदायों को स्कॉलरशिप देती है सरकार
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय तीन स्कॉलरशिप- पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप, प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप और मेर्टी-कम-मीन्स स्कॉलरशिप के तहत 6 अलग-अलग अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को स्कॉलरशिप देते हैं. तीनों स्कॉलरशिप सभी समुदायों के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को दी जाती है.

Post-Matric scholarship हायर एजुकेशन लेने वाले स्टूडेंट्स को दी जारी है, Merit-Cum-Means प्रोफेशनल और टेक्निकल कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को दी जाती है. जबकि Pre-Matric प्राइमरी एजुकेशन लेने वाले छात्रों को दी जाती है. पिछले 5 सालों में प्राइमरी एजुकेशन के लिए दी जाने वाली स्कॉलरशिप लेने वालों में कोई खास कमी नहीं पाई गई. पिछले पांच सालों में बाकी दोनों स्कॉलरशिप के पैसे और लाभार्थियों में कमी देखी गई है.

ये तीनों स्कॉलरशिप मुस्लिम, सिख, क्रिश्चियन, बौद्धों, जैन और पारसियों को दी जाती हैं. आंकड़ों यह भी बताते हैं कि मंत्रालय को बाटें गए कुल बजट में इजाफा होने के बाद इन छात्रवृत्ति में गिरावट दर्ज की गई है.

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  • पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप पर साल 2014 में 598 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, जबकि 2018 में ये राशि 412.8 करोड़ रह गई.

  • मेर्टी-कम-मीन्स स्कॉलरशिप पर साल 2014 में 335 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, 2018 में ये राशि 280 करोड़ रह गई.

  • अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को 2018-19 में 4,700 करोड़ रुपये बाटें गए जबकि 2014-15 में 3,711 करोड़ रुपये दिए गए थे.


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First published: July 27, 2019, 4:36 PM IST
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