SUCCESS STORY: पिता-भाई को खोकर भी नहीं हारी हिम्मत, पहली बार में पास किया IAS एग्जाम

एक बार क्लास में लोग उन पर इसलिए हंसे थे क्योंकि उन्होंने पूछ लिया था, एमपी और एमएलए में क्या फर्क है.

News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 2:52 PM IST
SUCCESS STORY: पिता-भाई को खोकर भी नहीं हारी हिम्मत, पहली बार में पास किया IAS एग्जाम
IAS हिमांशु नागपाल
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Updated: July 30, 2019, 2:52 PM IST
IAS SUCCESS STORY: ये कहानी है 2018 में UPSC में ऑल इंडिया 26वीं रैंक पाने वाले IAS हिमांशु नागपाल की. हिमांशु की कहानी अपने आप में हिम्मत की मुकम्मल दास्तां है. उनकी कहानी शुरू हुई हरियाणा के Bhuna नगर से ग्रेजुएशन के लिए दिल्ली आने से. वो दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में दाखिला लेने पिता के साथ आए. हॉस्टल इंटरव्यू बोर्ड की लिस्ट के नाम देखकर उनके पिता ने कहा, 'हिमांशु एक दिन मैं तुम्हारा नाम यहां देखना चाहता हूं.'

हिमांशु का का दाखिला कराने के बाद जब उनके पिता लौट रहे थे तो उनकी मौत हो गई. अभी हिमांशु की नई ज़िंदगी शुरू भी नहीं हुई थी कि सिर से पिता का साया उठ गया. हिमांशु कहते हैं मुश्किलों से सीखना बहुत जरूरी है. एक ओर पिता नहीं रहे थे, दूसरी ओर कॉलेज में नया माहौल था.

दोस्तों, टीचर्स ने दिया सहारा
हिमांशु की ज़िंदगी में जो तूफान आया उसका अहसास उनके कॉलेज के नए दोस्तों, टीचर्स को भी था. सभी ने उन्हें समझाया कि उनके लिए मेहनत बहुत जरूरी है. उनकी मां, बड़े भाई और अंकल ने समझाया, जिंदगी खत्म नहीं हुई है.

हिमांशु ने हरियाणा के भूना से ही पांचवीं तक हिंदी मीडियम से पढ़ाई की थी. इस समय तक उन्हें इंग्लिश नहीं आती थी. 12वीं की पढ़ाई उन्होंने हांसी शहर से की. जब कॉलेज आए तो भी अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण नहीं आता था. क्लास, कॉलेज में किसी के सामने कुछ भी बोलते हुए झिझकते थे. कॉलेज के पहले दो साल मे सीखा सिविल सर्वेंट कैसे बना जाता है. समय के साथ सब सीखते गए. झिझक शर्म भी आई लेकिन कभी सीखना नहीं छोड़ा.

जब क्लास में उड़ाया गया मज़ाक
एक बार क्लास में लोग उन पर इसलिए हंसे थे क्योंकि उन्होंने पूछ लिया था, एमपी और एमएलए में क्या फर्क है. दो साल पूरे होने पर गांव से आया हिमांशु कॉलेज के नॉर्मल शहरी बच्चों सा लगने लगा था. उनकी ज़िंदगी संभली ही थी कि किस्मत का एक और सितम हुआ. इस दफे बड़े भाई की अचानक मौत हो गई. इस बार उन्हें लगा अब पढ़ाई छूटेगी. मां के पास जाना होगा. पर ऊपर वाले ने दो सहारे छीने तो एक और दिया.
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हिमांशु को चाचा पंकज नागपाल का सहारा मिला. हरियाणा के इस लड़के ने इसी दुखी पल में तय किया कि  वो आईएएस बनेंगे. चाचा से मिले हौसले से उन्होंने एक ही अटेंप्ट में 26वीं रैंक हासिल कर ली. हिमांशु ने सोशल मीडिया पर अपने पिता समान चाचा की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'कौन कहता है जन्म देने वाला ही पिता होता है. चाचा मेरे लिए पिता से बढ़कर हैं. हर हालात में वो मजबूत पिलर की तरह मेरे रहे. इस जन्म में मैंने दो पिता पाए. एक ने जन्म दिया, दूसरे ने जीवन.'



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First published: July 30, 2019, 2:22 PM IST
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